कोटा: नगर निगम के पॉलीथिन मुक्त दशहरे की खुली पोल, मेला हटते ही मिला पॉलीथिन से अटा ग्राउंड

अब जरा नगर निगम कोटा के महापौर साहब को भी सुन ली जिए, जिनके पास मामले पर हमेशा की तरह सिवाए आश्वासन और जांच के अलावा कुछ नहीं है.

कोटा: नगर निगम के पॉलीथिन मुक्त दशहरे की खुली पोल, मेला हटते ही मिला पॉलीथिन से अटा ग्राउंड

केके शर्मा, कोटा: दशहरा मेला को "पॉलीथिन मुक्त अभियान" बनाकर वाह वाह लूटने वाला कोटा नगर निगम किस तरह से अपने कार्य के प्रति गंभीर है उसका एक नजारा हम आपको दिखा रहे हैं. चाहे सफाई की बात हो, चाहे सड़कों पर आवारा पशुओं के जमावड़े की बात हो. अब तक नगर निगम पूरी तरफ से फेल साबित हुआ है. वहीं अब एक बार फिर नगर निगम के पॉलीथिन मुक्त दशहरा मेला "कागजी" अभियान की पोल उस समय खुली जब मेला हटने लगा. 

जैसे जैसे मेला हटा वैसे वैसे मेला ग्राउंड परिसर में पॉलीथिन का अंबार दिखाई देने लगा. पूरे दहशरे ग्राउंड में पॉलीथिन बिखरी हुई थी. जिससे पता चलता है कि किस तरह सुर्खियों में रहकर माला पहनने के बाद नगर निगम के अधिकारी महज दिखावे के लिए "पॉलीथिन मुक्त" अभियान कागजों में चलाकर भूल गए.

इन तस्वीरों को देखकर आप समझ सकते हैं कि किस तरह नगर निगम के पॉलीथिन मुक्त मेले के तमाम दावे फ़ेल साबित हुए हैं. इतनी मात्रा में मिली पॉलीथिन पर्यवारण के साथ साथ इंसान और पशुओं के लिए भी बेहद हानिकारक है. एक तरफ देश के प्रधानमंत्री लगातार सफाई और पॉलीथिन के उपयोग को बंद करने पर जोर दे रहे हैं. वहीं निगम प्रशासन अपनी कार्यशैली से उपहास करने में मशगूल हैं.

अब जरा नगर निगम कोटा के महापौर साहब को भी सुन ली जिए, जिनके पास मामले पर हमेशा की तरह सिवाए आश्वासन और जांच के अलावा कुछ नहीं है. वह इसे गंभीर तो मान रहे हैं लेकिन उन्होंने इसकी जिम्मेदारी मेला अधिकारी पर डालते हुए अफसरों से शिकायत कर ग्राउंड की सफाई करवाने की बात कह रहे हैं.

जब महापौर महेश विजय से पॉलीथिन मुक्त अभियान की बात की गई तो उनका कहना था कि शायद अंतिम दिनों में अधिकारी काम से और निगरानी करने से भटक गए और अब गार्ड को पाबंद कर पूरे मेले ग्राउंड की सफाई की बात कर रहें हैं. खैर जांच करने और कार्यवाही करने का जुमला तो नगर निगम का काफी पुराना हो चुका है लेकिन कोटा दशहरा मेला राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान रखता है. जिसे नगर निगम के लापरवाह अफसर किश्तों में धूमिल करने में लगे हैं. अगर इसी तरह से निगम के अभियान दिखावटी और कागजों में चलते रहे तो "राष्ट्रीय दशहरा मेला" के नाम से किताबों में दर्ज कोटा का नाम गायब हो जाएगा.