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कोटा : वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर कोटा में जनजागृति कार्यक्रम का हुआ आयोजन

समस्त लोगों में लकवा मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है. लकवे के मरीज को शुरुआती दौर में यदि साढ़े चार घंटे के बीच में अस्पताल पहुंचाया जाता है तो उसे अपंगता व जान बचाई जा सकती है. 

कोटा : वर्ल्ड स्ट्रोक डे पर कोटा में जनजागृति कार्यक्रम का हुआ आयोजन
इस बीमारी से बचने के लिए लोगों में जागरुकता का होना बहुत जरुरी है.

मुकेश सोनी, कोटा : विश्व लकवा दिवस (वर्ल्ड स्ट्रोक डे) पर विज्ञान नगर स्थित जायसवाल न्यूरो हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट में जनजागृति के उद्देश्य से प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया. न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर संजय जायसवाल ने बताया कि हर साल विश्वभर में 1.5 करोड़ लोग लकवे का शिकार हो जाते हैं. 

इनमें 50 लाख लोगों की मौत हो जाती एवं 50 लाख लोग हमेशा के लिए विकलांग हो जाते है. इस बीमारी से बचने के लिए लोगों में जागरुकता का होना बहुत जरुरी है. इसी के चलते सम्पूर्ण विश्व में 29 अक्टूबर को वर्ल्ड स्ट्रोक डे के रूप में मनाया जाता है. ताकि लोग इस घातक बीमारी से बच सकें. इस साल की थीम वन इन 4 ऑफ यूस वील हेव ए स्ट्रोक (one in four of use will have a stroke, dont be the one ) डोन्ट बी दी वन है. 4 में से एक व्यक्ति को कभी न कभी लकवा, हाई बीपी हो जाता है. 

समस्त लोगों में लकवा मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है. लकवे के मरीज को शुरुआती दौर में यदि साढ़े चार घंटे के बीच में अस्पताल पहुंचाया जाता है तो उसे अपंगता व जान बचाई जा सकती है. डॉक्टर जायसवाल ने बताया कि देश में जिस तेजी से लकवे की बीमारी बढ़ रही है. उस तेजी से इस पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है. संतुलित जीवन शैली से हम लकवे पर 90 प्रतिशत तक नियंत्रण कर सकते है.वैसे आज पूरे विश्व में अलग अलग कार्यक्रम के जरिए लोगों को स्ट्रोक के लक्षण और बचाव के बारे में बताया जा रहा है. साथ ही लोगों को खान पान के बारे में भी जागरूक किया जा रहा है. जिससे लोगों को इस बीमारी को समझने और उससे बचने में मदद मिल सके.

एडिटिड बाय  संजय यादव