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कोटा: चार दिन बाद सुधरे हालात, चंबल का पानी उतरने के बाद अपने घरों को लौटे लोग

बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर और दुकानें, गंदगी, कीचड़ से सनी मिली. हालात यह हैं कि दुर्गंध के कारण वहां ठहर पाना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है. 

कोटा: चार दिन बाद सुधरे हालात, चंबल का पानी उतरने के बाद अपने घरों को लौटे लोग
बाढ़ का पानी उतरने के बाद लोगों को घर और दुकानें, गंदगी, कीचड़ से सनी मिली.

मुकेश सोनी, कोटा: चार दिन बाद पानी का जलजला शांत हुआ है. कोटा बैराज के गेट भी एक-एक कर बंद किए जा रहे हैं. इसके चलते कुछ बस्तियों से पानी उतर गया लेकिन पीछे छोड़ गया भारी तबाही की मंजर. नयापुरा स्थित खाई रोड में पानी उतरा तो व्यापारियों ने दुकानें संभालना शुरू किया. 

दिनभर व्यापारी दुकानों की सफाई करते नजर आए. बाढ़ में किराना, बेकरी, गल्ले का सामान बह गया. व्यापारियों ने कहा कि बाढ़ का पानी इतना तेजी से चढ़ा कि सामान तक नहीं निकाल पाए. अचानक दुकानें पानी में डूब गई. दुकानों के अंदर दस-दस फीट तक पानी था. चंम्बल के विकराल रूप ने  व्यापारियों को काफी नुकसान दिया.

बाढ़ का पानी उतरने के बाद घर और दुकानें, गंदगी, कीचड़ से सनी मिली. हालात यह हैं कि दुर्गंध के कारण वहां ठहर पाना भी लोगों के लिए मुश्किल हो रहा है. लेकिन, लोगों की मजबूरी है कि उन्हें अपने घरों और दुकानों को संभालना है. लोगों ने घरों का सामान छतों पर सुखाया. कपड़ों को पेड़ों पर सुखाया. 

लोगों ने बताया कि पानी का वेग इतना था कि उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला. घरों के अंदर इतना पानी था कि लोहे का ड्रम भी तैर गया. इससे सारे गेहूं खराब हो गए. उन्हें नाली में बहना पड़ा. फ्रिज, टीवी, हाथ मशीन, कम्प्यूटर सब में पानी भर गया. रजाई-गद्दे रखने का बड़ा बक्सा, वह भी पानी में तैर कर उल्टा हो गया. बाढ़ का पानी घर में घुसने से घरेलू सामान के अलावा बच्चों की किताबें तक खराब हो गईं. 

चंबल के कहर ने निचली बस्तियों में जमकर तांडव मचाया है. कई लोगों के अरमानों पर पानी फेर दिया. कइयों के आशियाने उजड़ गए. पानी का जलजला लोगों के सपने भी बहा कर ले गया. पीछे छोड़ गया तो बस बर्बादी की तस्वीर.