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पिता के साथ दिवाली मनाने घर पहुंची लाडली, प्रतापगढ़ छात्रवास में पढ़ने वाली छात्रा को लिया गोद

बिटिया उषा मीना बताती है कि चार भाई बहनों के बीच एक बहन है. माता-पिता रोजाना मजदूरी करने गांव मनोहरगढ घर से 7 किलोमीटर दूर प्रतापगढ आते हैं. 

पिता के साथ दिवाली मनाने घर पहुंची लाडली, प्रतापगढ़ छात्रवास में पढ़ने वाली छात्रा को लिया गोद

जयपुर: पापा की परी-लाडली बेटियां अपने डैडी के लिए किसी परी से कम नहीं होती..फिर वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो जाएं.अगर आप भी उनमें से एक हैं तो फिर यह खबर आपके दिल को जरूर छू जाएंगी..एक पिता और लाडली बिटिया के बीच के कुछ पलों को तस्वीरों में देखिए..जिसे देखकर आपका मन भी अपने पापा की झप्पी लेने का कर जाएगा..ये कहानी है प्रतापगढ कलक्टर रहते हुए आईएएस अधिकारी की गोद ली गई बेटी उषा मीना की..जो 417 किलो मीटर का सफर तय कर प्रतापगढ जिले से अपने पिता के साथ दिवाली मनाने जयपुर आई है

प्रतापगढ जिले के मनोहरगढ क्षेत्र की रहने वाली और टिमरवाड़ा एकलव्य छात्रावास में कक्षा 10वीं में पढ़ाई कर रही छात्रा उषा मीना की. फरवरी 2019 में उसकी जिंदगी में दोहरी खुशियां आईं. प्रतापगढ के तत्कालीन कलेक्टर श्यामसिंह राजपुरोहित स्वीप प्रोगाम के तहत एकलव्य छात्रावास में दौरा करने पहुंचे तो वहां उषा मीना की चित्रकारी से बेहद प्रभावित हुए. उसके अगले दिन ही उन्होंने उषा मीना को गोद ले लिया और उषा को पिता का प्यार मिल गया और श्यामसिंह राजपुरोहित को बेटी मिल गई.

पापा की लाडली बिटिया उषा दिवाली मनाने के लिए प्रतापगढ जिले से जयपुर आई है. भाई-भाभी और पिता के साथ दिवाली सेलिब्रेट कर रही है. फुलझडियां चला रही है. फव्वारे चलाकर खुशियां अपनों के साथ बांट रही है. उषा ने अपने पिता श्यामसिंह राजपुरोहित को कुछ दिनों पहले फोन किया कि मुझे दिवाली आपके साथ मनानी है. बस फिर क्या अगले ही दिन पिता आईएएस श्यामसिंह राजपुरोहित ने बुला लिया. 

स्टेशन पर बेटी को लाने के लिए गाड़ी भेज दी. घर पर पहुंचते ही पापा ने गले लगा लिया. तो भाई-भाभी ने खूब लाड लडाया. खूब मिठाई और चॉकलेट, पटाखे देखकर उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. आईएएस पिता श्यामसिंह राजपुरोहित बताते हैं कि पापा-बेटी का रिश्ता बेहद खास होता है. मेरे एक बेटा है और पुत्रवधु है. दो साल पहले दुर्घटना में पत्नी गीता राजपुरोहित का निधन हो चुका है. हालांकि, बेटी उषा को मां का प्यार को नहीं मिला लेकिन एक पिता को प्यारी बेटी उषा जरूर मिल गई. हर फंक्शन, पारिवारिक कार्यक्रमों में बेटी उषा को बुलाया जाता है. वो हर कार्यक्रम में आती है.

बिटिया उषा मीना बताती है कि चार भाई बहनों के बीच एक बहन है. माता-पिता रोजाना मजदूरी करने गांव मनोहरगढ घर से 7 किलोमीटर दूर प्रतापगढ आते हैं. प्रतिदिन 300 रूपए कमाकर ले जाते हैं तो घर का खर्चा चलता है. पारिवारिक परिस्थितियां ठीक नहीं होने के कारण प्राइवेट स्कूल में दाखिला तो नहीं हो सका. एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में पढाई के साथ रहना भी हो जाता है. साइंस विषय पसंद हैं लेकिन कक्षा 11में आर्टस विषय लूंगी और ग्रेजुऐशन के बाद सीधा पहली वैकेंसी में आईएएस का एग्जाम फाइट करूंगी.

पापा की जैसे में भी कलक्टर बनकर जनता की सेवा करना चाहती हूं. मैं भी फिर एक बेटी को गोद लेकर उसकी इसी तरह से देखभाल करूंगी प्यार दूंगी. आईएएस श्यामसिंह राजपुरोहित ने बताया कि इसकी इच्छा आईएएस अधिकारी बनने की है. इसको पूरा गाइड करता हूं. पढाई का विशेष ध्यान रखते हैं. एक खास बात इस बेटी की ये भी है कि ये जहां भी जाती है अपनी बुक्स-कॉपी साथ में लेकर चलती है. छुट्टियों में जयपुर आई है तो किताब-कॉपी साथ लेकर आई है. बेटियों के लिए पापा मां की ही तरह लाइफ के पहले टीचर, गाइड होते हैं. जो पढ़ाई, करियर के अलावा बाहर की दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए सलाह और सपोर्ट करते हैं. पापा बेटी के लिए सिर्फ पापा ही नहीं होते हैं बल्कि एक अच्छे दोस्त भी साबित होते हैं. जिनसे बेटियां अपनी हर बात आसानी से शेयर कर लेती है फिर चाहें वो बात किसी चीज की फरमाइश हो, फ्रेंड्स के साथ आउटिंग पर जाना हो या पर्सनल लाइफ में आगे बढ़ने की हो.

आज समय बदल रहा है, पिता का झुकाव घर के चिराग से ज्यादा घर की रोशनी पर होने लगा है. यानी बेटियों पर. उसे जीवन में बेटी का महत्व समझ में आने लगा है. इसलिए उसके पूरे जीवन को सजाने-संवारने में अपना पूरा योगदान दे रहा है. बेटियां जिन्हें कभी ये शिकायत रहती थी कि पापा तो सिर्फ भईया के ही हैं, वो तो सिर्फ उसे ही प्यार करते हैं. वहीं आज बेटियां पापा की आंखों का तारा, उनकी लाडली बन गई हैं और बेझिझक कहती हैं- हां मैं हूं पापा की लाडली हूं. सच तो यह है कि आज बेटियों के अंदर भी पापा की ‘हिटलर’ वाली छवि धुंधली होने लगी है. पापा का खौफ दोस्ती के रिश्ते में तब्दील होने लगा है. बेटियां पापा की लाडली यूं ही नहीं बन गई हैं. इसके लिए दोनों ने एक-दूसरे को खूब समझा है बल्कि भरपूर सहयोग भी दिया है.