स्कूली बच्चों को एक्टिव, अलर्ट और इन्फार्म्ड सिटीज़न बनाने के लिए लांच किया, "एक्टिज़न कांटेस्ट"

देश के स्कूली बच्चों को एकेडमिक एजुकेशन के साथ प्रैक्टिकल स्किल्स की भी जरूरत है. जिससे वो अपने आसपास की समस्याओं को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सके. वो अलर्ट, एक्टिव और इन्फार्म्ड सिटीज़न बने.

स्कूली बच्चों को एक्टिव, अलर्ट और इन्फार्म्ड सिटीज़न बनाने के लिए लांच किया, "एक्टिज़न कांटेस्ट"

महाराष्ट्र: देश के स्कूली बच्चों को एकेडमिक एजुकेशन(Academic Education) के साथ प्रैक्टिकल स्किल्स की भी जरूरत है. जिससे वो अपने आसपास की समस्याओं को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सके. वो अलर्ट, एक्टिव और इन्फार्म्ड सिटीज़न बने. इसको देखते हुए देश भर के हजारों स्कूलों के स्टुडेंट्स के लिए एक्टिज़न कांटेस्ट लांच किया जा रहा है. ये कांटेस्ट देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन की तरफ से लांच किया जा रहा है. ये एक ऐसा संगठन है जो पिछले चार सालों से देश के 800 से ज्यादा स्कूलों के बच्चों को सिटीजन एजुकेशन के फायदों को लेकर एजुकेट और इंस्पायर करता आ रहा है. ये एक नान प्राफिट संगठन है.

देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन के फाउंडर और चीफ मेंटर वल्लभ भंसाली का कहना है कि “एक्टिज़न कांटेस्ट का इकलौता मक़सद राष्ट्रीय महत्व है. ये कांटेस्ट देशभर की हजारों स्कूलों में दो फेज़ में होगा. इसका मक़सद सिविक अवेयरनेस को लेकर बच्चों का टेस्ट लेना और उन्हें अपने आसपास की समस्याओं को सुलझाने के लिए वालंटियर वर्क के लिए तैयार करना है. इसका मक़सद डेमोक्रेसी 2.0 के लिए बच्चों को तैयार करना ताकि वो सरकार के साथ मिलकर समस्याओं को सुलझाने में मदद करें. स्कूल प्रिंसीपल, टीचर्स और पैरेंट्स को इन्वाइट किया जाएगा कि वो 7वीं, 8वीं और 9वीं क्लास के बच्चों को इसमें हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित करें.“

एक्टिज़न कांटेस्ट में क्या होगा.

स्टुडेंट्स को ग्रैंड जूरी के सामने राष्ट्रीय स्तर पर कंपीट करते हुए समस्याओं के सॉल्यूशन डिजाइन करने होंगे. सभी एक्टिविटी आसान है और इसके लिए पहले से किसी खास तैयारी की ज़रूरत नहीं है. कांटेस्ट के टॉप थ्री विनर्स दंबग फिल्म(Dabangg) की टीम के फिल्म के सब्जेक्ट का हिस्सा होंगे. स्टुडेंट्स के प्रयासों को सराहा जाएगा और उन्हें सर्टिफिकेट्स और इनाम भी दिए जाएंगे. टीचर्स को यंग एक्टिजन मेंटर अवार्ड दिया जाएगा. शानदार प्रदर्शन करने पर स्कूल को ट्राफी दी जाएगी. स्कूल प्रिंसीपल को भविष्य की पीढ़ी तैयार करने का संतोष मिलेगा और नेशनल लेवल पर रोटेटिंग एक्टिज़न ट्राफी जीतने का मौका भी होगा.

देश अपनाएं सहयोग फाउंडेशन की इस पहल को जानेमाने खिलाड़ी और ओलंपिक पदक विजेता गगन नारंग(Gagan Narang) भी सपोर्ट कर रहे हैं. उनका कहना है की “ये कांटेस्ट स्कूली बच्चों को कम उम्र में ही डेमोक्रेसी को सही मायने में अनुभव करने और उन्हें अलर्ट, एक्टिव और इन्फार्म्ड बनाने में मददगार साबित होगा. मैं इसे लेकर बहुत एक्साइटेड हूं और पूरी तरह सपोर्ट कर रहा हूं. मेरा मानना है कि युवा पीढ़ी को मौका दिया जाए तो वो बहुत कुछ कर सकते है.“

सेंटर फार सिविल सोसायटी के फाउंडर एंड प्रेसीडेंट और इंडियन स्कूल आफ पब्लिक पालिसी के डायरेक्टर डाक्टर पार्थ जे. शाह का कहना है की "अच्छी नीतिया और सुशासन को सिटीजन एजुकेशन के साथ जोड़ दिया जाए तो राष्ट्र पर इसके बेहतरीन प्रभाव होते हैं. पिछले 25 सालों से एजुकेशनिस्ट और पालिसी एक्टिविस्ट होने के नाते मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि एक्टिजन गेम चेंजिंग मिशन साबित हो सकता है.“ एचवीबी ग्लोबल एकेडमी की प्रिंसिपल डाक्टर मिसेज पाठक का कहना है की “प्रिसिपल होने के नाते मैं अपने स्टुडेंट्स को इस कांटेस्ट में भेजने को लेकर काफी उत्साहित हूं."

क्लोरोफिल इनोवेशन लैब के ब्रांड कंसल्टेंट किरण खलप कहते हैं की "मैं एजुकेशन से निजी रूप में 1979 से जुड़ा हुआ हूं इसलिए शिक्षा मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है. क्लोरोफिल लैब की जो अहम जिम्मेदारी थी कि वह एक्टिज़न का महत्व आसानी से लोगो तक पहुंचाए. रिद्धिमा पांडेय जैसी बच्ची देश बदलने की कोशिश करती है तोह ये सारी बातें लोगों को पता होनी चाहिए.