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दौसा में फसलों के लिए मुसीबत बना टिड्डियों का दल, किसान परेशान

दौसा में जो टिड्डी दल आया उसने आधी से ज्यादा फसल को चौपट कर दिया, जिसके चलते अब किसान मायूस हैं.

दौसा में फसलों के लिए मुसीबत बना टिड्डियों का दल, किसान परेशान
रात के वक्त तो गावों में टिड्डीयों ने जीना मुहाल कर दिया है.

दौसा: राजस्थान के दौसा में किसान परेशान हैं. इस बार किसानों की समस्या बन कर आया है टिड्डी दल जिसे बोल चाल की भाषामें पूर्वी राजस्थान में फड़का कहा जाता है. अधिक घास वाले खेतों में इस फड़का ने किसानों को खून के आंसू रोने को विवश कर दिया है. किसानों का कहना है धूप के वक्त बेशक ये कीट छांव में छुप जाता है लेकिन सुबह व शाम बाजरे की फसल को इस तरह चट करता है कि पत्तियों को साफ कर देता है जिससे बाजरे के पौधे की ग्रोथ रुक जाती है. जिले के सभी उपखण्डों में हाल बेहाल हो रहा है. रात के वक्त तो गावों में टिड्डीयों ने जीना मुहाल कर दिया है.

टिड्डी दल द्वारा किसानों की फसल चौपट करने के मामले को लेकर जब किसानों से बात की तो उनका कहना था कि अबकी बार मानसून अच्छा था जिसकी वजह से बारिश अच्छी हुई थी. बारिश अच्छी होने से फसल भी अच्छी थी लेकिन जो टिड्डी दल आया उसने आधी से ज्यादा फसल को चौपट कर दिया, जिसके चलते अब किसान मायूस हैं.

हांलाकि कृषि विभाग के अधिकारी खेतों का रुख नहीं कर रहे लेकिन किसानों को बचाव की सलाह दे रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि अब किसानों के पास सिर्फ़ एक ही बचाव है कि वे खेतो पर रात के वक्त लाईट जला कर पानी में करोसिन मिलाए जिससे कि फडका को मारा जा सके. दौसा कृषि विभाग के उप निदेशक श्रीकांत अग्निहोत्री का कहना है कि अब फसल पर दवा नहीं छिड़क सकते क्योंकि अब फसल पकने की कगार पर है. दवा छिड़कने पर चारे ओर बीज दोनो पर दवा जम जाएगी जिसका असर खाने में खतरनाक हो सकता है. अब बड़ा सवाल यह है कि कृषि विभाग के अधिकारियों ने टिड्डी के शुरुआती दौर में ध्यान क्यों नहीं दिया.

भारत की अर्थव्यवस्था कृषि पर टिकी हुई है और किसान देश की रीढ़ है, लेकिन हर बार किसान ही समस्याओं का शिकार होता है प्राकृतिक आपदाएं भी जहां किसान को मारती है. मोटी तनख्वाह लेने वाले कृषि अधिकारियों ने शुरुआत में इस परशानी का इलाज कर दिया होता तो आज खेतों में लहराती किसानों की फसल चौपट नहीं होती. खेतों में लहलहा रही फसल को देखकर एक उर्जा किसान खुश था लेकिन टिड्डी दल ने किसानों को खून के आंसू रुला दिए. ऐसे नहीं बड़ा सवाल ये कृषि विभाग के इन गैर जिम्मेदार हुक्मरानों पर क्या सरकार कोई एक्शन लेगी.