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लंदन से खींच लाया राजस्थान की मिट्टी का प्रेम, डॉ. प्रहलाद बदलेंगे स्कूल की तस्वीर

स्कूल की ये तस्वीर डॉ. प्रहलाद को बहुत दुखी करती है और डॉ. प्रहलाद ने अब इस मैदान में फिर से वही रौनक लाने की ठानी है और इसी पहल के तहत उन्होंने ग़ांव के बाहर हाइवे पर एक होटल खोला है 

लंदन से खींच लाया राजस्थान की मिट्टी का प्रेम, डॉ. प्रहलाद बदलेंगे स्कूल की तस्वीर
डॉ. प्रहलाद का मानना है कि एक वक्त था जब केवल सरकारी स्कूल ही एकमात्र ऑप्शन होता था.

डीडवाना: विदेश जाना और वहीं रहना लोगों का सपना होता है लेकिन भारत की मिट्टी में वो खुशबू है कि वो विदेश की ज़मीन से भी अपनी ओर खींच लेती है. लंदन से राजस्थान की मिट्टी में खुशबू के साथ खिंचे चले आने वाले ऐसे ही एक प्रवासी हैं. नागौर जिले के जायल तहसील के फरड़ोद गांव के निवासी डॉक्टर प्रहलाद. जो रहते तो लंदन में हैं लेकिन उनका दिल हमेशा मातृभूमि के छोटे से ग़ांव में रहता, अपने ग़ांव से उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ और इस लगाव को बनाए रखने के लिए उन्होंने एक पहल की है.

दरअसल, डॉ. प्रहलाद फरड़ोदा ने नागौर जिले के जायल तहसील के फरड़ोद ग़ांव के सरकारी स्कूल की तस्वीर बदलने का वीणा उठाया है. वैसे तो ग्रामीण क्षेत्र के आम सरकारी स्कूलों की तरह ही यह विद्यालय भी है लेकिन एक समय था जब इस विद्यालय की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर जिले के बेस्ट फुटबाल खिलाड़ियों के लिए होती थी और यही वजह है कि अकेले इस स्कूल ने कई राष्ट्रीय स्तर के फुटबाल खिलाड़ी दिए हैं. लेकिन बदलते परिवेश और सरकारी स्कूलों के खस्ता हाल स्थिति में यह स्कूल भी अब पुरानी रौनक में नहीं रहा और ना ही अब यहां के खेल मैदान में वैसी रौनक है. 

स्कूल की ये तस्वीर डॉ. प्रहलाद को बहुत दुखी करती है और डॉ. प्रहलाद ने अब इस मैदान में फिर से वही रौनक लाने की ठानी है और इसी पहल के तहत उन्होंने ग़ांव के बाहर हाइवे पर एक होटल खोला है और घोषणा की है कि इस होटल से होने वाली पूरी आमदनी स्कूल पर खर्च की जाएगी. ये स्कूल प्रहलाद के लिए बेहद खास है वो इसलिए क्योंकि इसी स्कूल से डॉ. प्रहलाद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की थी. डॉ प्रहलाद इस समय लंदन में रहते हैं लेकिन उनका बचपन इसी स्कूल में बीता और यहीं फुटबाल के मैदान में उन्होंने फुटबाल के गुर भी सीखे. अपने बचपन की यादों को समेटे डॉ प्रहलाद जितनी बार भी ग़ांव आते हैं उतनी बार अपने पुराने स्कूल जरूर आते हैं.

डॉ. प्रहलाद का मानना है कि एक वक्त था जब केवल सरकारी स्कूल ही एकमात्र ऑप्शन होता था लेकिन निजी स्कूलों के कारण आज सरकारी स्कूलों की हालत दयनीय है और अब यहां लगभग उन्ही परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं जो निजी स्कूलों की भारी भरकम फीस चुकाने में असमर्थ है. ऐसे में इन बच्चों को भी समय के साथ कदमताल करने का मौका मिलना चाहिए. इसके चलते खेल और खिलाड़ियों की जरूरत पूरी होने के बाद होटल से होने वाली आमदनी को स्कूल में सुविधाएं बढ़ाने पर खर्च होगी. इसकी वजह से स्कूल के बाकी छात्रो में भी खुशी है.

डॉ. प्रहलाद की इस पहल से सबसे ज्यादा खुशी उन बच्चों में हैं जो फुटबाल खेलने के शौकीन है क्योंकि होटल से मिलने वाले फंड से सबसे पहले फुटबाल खिलाड़ियों और मैदान के दिन सवारे जाएंगे, खिलाड़ियों के लिए बॉल जूते ड्रेस सहित अन्य किट लाई जाएगी साथ ही मैदान को भी फिर से तैयार करवाया जाएगा ताकि एक बार फिर से यह विद्यालय अपनी खोई हुई पहचान वापस पा सके.

डॉ. प्रहलाद की पहल के बाद इस विद्यालय में पढ़े और आज यहीं पर प्राचार्य जगदीश डिडेल और शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत हनुमानराम कहते हैं डॉ. प्रहलाद की इस पहल से इस विद्यालय के पुराने दिन लौटेंगे और यहां के खिलाड़ियों और छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिल पाएंगी। जिसकी वजह से यहां से निकलने वाले छात्र छात्राओं का भविष्य संवर पाएगा.

लंदन में रहने वोले डॉ. प्रहलाद फरड़ोदा की कहना है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा इसी स्कूल से हुई थी और उस टाइम इस स्कूल का बहुत ही नाम था. इसका नेशनल लेवल पर इसका नाम था यहां के जो प्लेयर थे वह नेशनल कई बार खेल चुके हैं और नागौर की जो फुटबॉल की टीम बनती थी. वह 100 फीसदी हमारे गांव की ही बनती थी, गांव के लोगों का प्यार उन्हें बार-बार यहां खींच कर लाता है. 

वो होते वहां पर हैं लेकिन उनकी आत्मा उनका दिल यहीं पर बसता है इन्हीं गलियों में रहता है. डॉ. प्रहलाद विदेश में रहते हुए भी अपने देश और अपने ग़ांव के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं भूले लेकिन अगर डॉ. प्रहलाद की तरह ही और लोग भी प्रयास करें तो ग्रामीण क्षेत्रो ही नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों में भी सरकारी स्कूलों के हालात बदल सकते हैं.

--लक्ष्मी उपाध्याय, न्यूज डेस्क