महाराष्‍ट्र के 26 जिले भयंकर सूखे की चपेट में, 1972 जैसे बुरे हालात की आशंका

महाराष्ट्र एक बार फि‍र भीषण सूखे की चपेट में है. सूबे के मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र में इस साल 1972 जैसे सूखे के हालात हैं. राज्य के करीब 26 जिले भीषण सूखे से जूझ रहे हैं.

महाराष्‍ट्र के 26 जिले भयंकर सूखे की चपेट में, 1972 जैसे बुरे हालात की आशंका
महाराष्‍ट्र के ज्‍यादातर बांधों में 10 फीसदी ही पानी बचा है. फोटो : IANS

मुंबई: महाराष्ट्र भीषण सूखे की चपेट में झुलस रहा है. महाराष्‍ट्र 1972 जैसे सूखे के हालात से गुजर रहा है. राज्‍य के छब्बीस जिले भीषण सूखे से ग्रस्त हैं. लोग बूंद बूंद पानी के लिये परेशान हैं. सूखे की मार से शहरी और ग्रामीण दोनों ही इलाकों पर पड़ी है. नदियां और तालाब सूख गये हैं और जलाशयों में पानी बेहद कम बचा है. सरकार टैंकरों से पीने के पानी की सप्लाई कर रही है.

महाराष्ट्र एक बार फि‍र भीषण सूखे की चपेट में है. सूबे के मराठवाड़ा, विदर्भ और उत्तर महाराष्ट्र में इस साल 1972 जैसे सूखे के हालात हैं. राज्य के करीब 26 जिले भीषण सूखे से जूझ रहे हैं. इलाके की नदियां और तालाब सूख गए हैं. भंडारदरा निवासी दत्तू बुधा निर्गुडे का कहना है कि भंडारदरा में पानी खूब था, लेकिन वह पानी सप्लाई के लिये छोड़ा गया. अब पानी का तल नीचे चला गया है. और हम यहां रहते हैं. यहां हमें पानी नहीं मिल रहा है. टैंकर के पानी पर ही हम निर्भर हैं.

ये जिले झेल रहे हैं सूखे की मार
सूखे की मार झेल रहे 26 जिलों में औरंगाबाद, बीड, हिंगोली, जालना, नांदेड़, लातूर, उस्मानाबाद, परभणी, अहमदनगर, धुले, जलगांव, नाशिक, नंदूरबार, अकोला, अमरावती, बुलढाणा, यवतमाल, वाशिम, वर्धा, चंद्रपुर, नागपुर, पुणे, सांगली, सातारा, सोलापुर और पालघर शामिल हैं.

महाराष्ट्र के ज्यादातर इलाके पिछले कई सालों से लगभग हर साल सूखे की चपेट में रहते हैं, लेकिन इस साल सूखे से हालात ज्यादा खराब हैं. जानकार मानते हैं कि साल 1972 के सूखे जैसे हालात हैं. सूखा ग्रस्त इलाकों की नदियां और तालाब सूख चुके हैं. हालात ये हैं कि कई-कई दिनों के बाद नल के पानी की सप्लाई होती है. महाराष्ट्र के 17 बड़े जलाशयों में से 5 में पानी इस्तेमाल के लायक नहीं बचा है. सूबे के 5 बड़े जलाशयों में महज 10 फीसदी पानी बचा है, जबकि  मराठवाड़ा इलाके में सूखे की सबसे ज्यादा मार है. यहां के पानी सप्लाई करने वाले जलाशयों में महज पांच फीसदी पानी बचा है.

जालना में 22 दिनों के बाद पानी की सप्लाई होती है, मनमाड़ में 20 दिन, परभणी में 14 दिन, लातूर, बीड और हिंगोली में 10 दिन, औरंगाबाद में 3 दिनों के अंतर पर पानी की सप्लाई होती है. सूखाग्रस्त इलाकों में देवेंद्र फडणनवीस सरकार 5 हजार 493 टैंकरों से पीने के पानी की सप्लाई कर रही है.

टैंकरों से हो रही है पानी की आपूर्ति
टैंकरों का पानी लेने के लिये लोगों को दूर दूर कई किलोमीटर पैदल चलकर बेहद मुश्किलों के बाद लाना पड़ता है. पानी की किल्लत इस कदर है कि धुले जिले के मोरदडतांडा गांव में पानी लेने गई 13 साल की नंदिनी पवार की इसी महीने पानी की जद्दोजेहद में मौत हो गई. उसकी  कुएं में फिसलकर ग‍िरने से मौत हो गई. सरकार पीने के पानी की टैंकर से सप्लाई कर रही है लेकिन वो कम पड़ रहे हैं. पिछले दिनों एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार सूबे के सूखाग्रस्त इलाकों का दौरा कर सी एम देवेंद्र फडणनवीस से मिलकर सरकार से सूखाग्रस्त इलाकों में लोगों को  राहत देने की मांग सरकार की.

सरकार का दावा-इंतजाम क‍िए जा रहे हैं
सूखे से निपटने के लिये राज्य सरकार 8862 करोड़ रुपए खर्च कर रही है. सरकार का दावा है कि लोगों के पीने के पानी, किसानों के जानवरों के लिये पीने के पानी और उनके लिये चारा छावनियों का इंतेजाम किया गया है. फसलों के नुकसान का भी मुआवजा दिया जा रहा है. 1417  चारा छावनियों में करीब 9 लाख 39 हजार 372 पशुधन है. सूखा राहत में राज्य सरकार के 4300 करोड रुपये और केंद्र से 4562 करोड रुपये खर्च किये जा रहे हैं. फडणवीस सरकार के राजस्व मंत्री  का दावा है कि राज्य सरकार सूखाग्रस्त इलाकों में हर मदद पहुंचा रही है.