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शिवसेना ने सामना में लिखा, 'महाराष्‍ट्र की अधोगति हो रही है, लेकिन किसके कारण?'

Maharashtra Assembly Elections 2019 : शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में दूसरों को कर्ज बांटने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्‍य किया है. 

शिवसेना ने सामना में लिखा, 'महाराष्‍ट्र की अधोगति हो रही है, लेकिन किसके कारण?'

मुंबई : महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) में एक ओर जहां शिवसेना-बीजेपी (Shiv Sena- BJP) दोनों पार्टियां जमकर प्रचार में लगी हैं, वहीं शिवसेना अब भी बीजेपी की टांग खींचने से बाज नहीं आ रही है. शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में दूसरों को कर्ज बांटने के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर व्यंग्‍य किया है. 

सामना ने लिखा, “पैसे की व्यवस्था करनी ही पड़ती है और यही सत्ताधीशों की असली ताकत होती है. हिंदुस्थान के माथे पर बहुत कर्ज है, लेकिन उस कर्ज की चिंता न करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान और रूस जैसे देशों को कर्ज देने का पराक्रम किया ही है. खुद पर कर्ज होने का रोना रोने की अपेक्षा परिस्थिति का सामना करना हिम्मत का काम है.

वैसे शिवसेना के इस व्यंग्‍य के पीछे 2014 की वो घटना बताई जा रही है जब एनसीपी ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया था. 2014 में शिवसेना बीजेपी ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था. नतीजे आए, तब बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, पर बहुमत से थोड़ा दूर रह गई थी. शिवसेना सरकार में शामिल होने की कोशिश कर रही थी. साथ ही सत्ता में बड़े हिस्से के लिए तगड़ी जुगत कर रही थी. मगर तभी चुनाव हारकर सत्ता से बाहर हुई एनसीपी ने बीजेपी को अपनी तरफ से एकतरफा और बिना शर्त समर्थन का ऐलान कर दिया था. इसकी वजह से न सिर्फ शिवसेना को बार्गेनिंग पावर कम होने के चलते सत्ता में कम हिस्सेदारी से काम चलाना पड़ा था, साथ ही बीजेपी की सत्ता में बिन बुलाये मेहमान वाली स्थिति के चलते शिवसेना की जो फजीहत हुई थी, उसे शिवसेना अबतक भूल नहीं पाई है और वो टीस आज के सम्पादकीय में उसने निकाली है. 

संपादकीय में कहा गया है कि 'अजीत पवार ने अब कहा है कि 2014 में सत्ता के लिए भाजपा को समर्थन देना राष्ट्रवादी की गलती नहीं थी. समर्थन नहीं दिया होता तो दोबारा चुनाव हुए होते. ऐसी बात अजीत पवार ने कही है. ये निरर्थक है. राज्य की अधोगति का कारण अजीत पवार ने घोषित कर दिया, ये ठीक ही हुआ. 2014 में राष्ट्रवादी ने समर्थन देने की लतखोरी नहीं की होती तो आज राज्य की तस्वीर कुछ अलग होती. राष्ट्रवादी कांग्रेस ने ये लतखोरी उस समय दिल्ली के आदेश पर की थी. आज वही शरद पवार कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री फडणवीस दिल्ली के आदेश के कारण शासन कर रहे हैं.