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बाघिन अवनि को मारने में नियमों को ताक पर रखा गया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा

 निशानेबाज ने यह दावा किया था कि उसने अवनि पर आत्मसुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस दावे को झूठलाते हुए बताती है कि जिस गोली से बाघिन की मौत हुई वह उसके अगले बाएं पैर में पीछे की ओर से लगी थी. 

बाघिन अवनि को मारने में नियमों को ताक पर रखा गया, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ खुलासा

मुंबई : महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में मारी गई बाघिन अवनि की मौत के मामले में अब बेहद सनसनीखेज खुलासा हुआ है. दरअसल, महाराष्ट्र फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की ओर से वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट मिलिंद परिवकम ने बाघिन अवनि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट फाइल की थी. इस पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो रहा है कि बाघिन अवनि को मारने में नियमों को ताक पर रखते हुए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया गया.

आपको बता दें कि निशानेबाज ने यह दावा किया था कि उसने अवनि पर आत्मसुरक्षा के लिए गोली चलाई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस दावे को झूठलाते हुए बताती है कि जिस गोली से बाघिन की मौत हुई वह उसके अगले बाएं पैर में पीछे की ओर से लगी थी. जिस वक्त बाघिन पर गोली चलाई गई, उस समय बाघिन निशानेबाज से दूसरी ओर मुड़ गई थी. साफ़ है कि यह रिपोर्ट अवनि की हत्या की ओर इशारा करती है.

इतना ही नहीं, इस रिपोर्ट में मृत बाघिन के शरीर पर बेहोश करने वाले इंजेक्शन के निशान पर भी संदेह व्यक्त किया गया है. बाघ जैसे जानवरों को बेहोश करने के लिए खास इंजेक्शन को राइफल से शूट किया जाता है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक अवनि को यह इंजेक्शन राइफल से नहीं दिया गया. रिपोर्ट के मुताबिक जहां यह निशान है, वहां बाघिन की मांसपेशियों से रक्तस्राव नजर नहीं आया. सीरींज प्रोजेक्टर (राइफल) से जो सीरींज दागी जाती है, वह हमेशा लाल चकते जैसा निशान छोड़ती है जो इस मामले में नजर नहीं आता.

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यह फाइंडिंग इस ओर इशारा करती है कि कहीं निशानेबाज ने इस मामले को कवरअप करने के लिए बेहोशी का इंजेक्शन बाघिन की हत्या करने के बाद तो उसे नहीं दिया.

गौरतलब है कि इससे पहले निशानेबाज के बचाव में खुद महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया के सामने यह कहा था कि बाघिन को उस वक्त गोली मारी गई, जब उसने ट्रैंकुलाइजर (बंदूक द्वारा बेहोशी का इंजेक्शन) देने वाले वन्यकर्मी पर हमला कर दिया था. इसके अलावा राज्य के वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने भी निशानेबाज का बचाव किया था.

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गौरतलब है कि बाघिन को बचाने के लिए कुछ वन्य प्रेमी एनजीओ ने 'लेट अवनि लिव' अभियान चलाया था और अवनि को न मारने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक गुहार लगाई थी, लेकिन 2 नवंबर की रात यवतमाल जिले के पांढरकवड़ा के वन क्षेत्र में बाघिन अवनि (टी-1) को मार दिया गया गया था. नरभक्षी बाघिन अवनि (टी1) कथित रूप से 13 लोगों का शिकार कर चुकी थी. जानकारी के मुताबिक, उसे खत्म करने के लिए 200 लोगों की टीम लगाई गई थी, जिसमें वन कर्मचारी, निशानेबाज और शिकारी कुत्ते भी शामिल थे. केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अवनि की मौत पर दुख जताते हुए महाराष्ट्र सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की थी और अवनि की हत्या को एक अपराध का मामला बताया था. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी अवनि की मौत पर दुख जताया था. ऐसे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इस गंभीर और सनसनीखेज खुलासे के बाद महाराष्ट्र सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.