जानिए कैसे छोटे-छोटे बच्चे सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ चला रहे हैं अभियान!!

भारत सरकार ने देशवासियों से सिंगल यूज प्लास्टिक(Single Use Plastic) का उपयोग बंद करने के बाद राजस्थान के इस छोटे शहर के बच्चे भी जागरुकता अभियान चला रहे हैं.

जानिए कैसे छोटे-छोटे बच्चे सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ चला रहे हैं अभियान!!
इन छोटी-छोटी बच्चियों ने यह शुरुआत कर दी है.

नरेन्द्र राठौड़, चूरू: वैसे तो विज्ञान के सहारे मनुष्य ने पाषाण युग से लेकर आज तक मानव जीवन सरल और सुगम करने के लिए एक बहुत लंबा सफर तय किया है. इस दौरान उसने एक से एक वो उपलब्धियां हासिल की जो अस्तित्व में आने से पहले केवल कल्पना लगती थीं. 1907 में जब पहली बार प्रयोगशाला में कृत्रिम "प्लास्टिक" की खोज हुई तो इसके आविष्कारक बकलैंड ने कहा था, "अगर मैं गलत नहीं हूं तो मेरा ये अविष्कार एक नए भविष्य की रचना करेगा." और ऐसा हुआ भी, उस वक्त प्रसिद्ध पत्रिका टाइम ने अपने मुख्य पृष्ठ पर लियो बकलैंड की तसवीर छापी थी और उनकी फोटो के साथ लिखा था, "ये ना जलेगा और ना पिघलेगा."  लेकिन किसे पता था कि आधुनिक विज्ञान के एक वरदान के रूप में हमारे जीवन का हिस्सा बन जाने वाला यह प्लास्टिक एक दिन मानव जीवन ही नहीं संपूर्ण पर्यावरण के लिए भी बहुत बड़ा अभिशाप बन जाएगा.

प्लास्टिक के दुष्परिणाम को देखते हुए भारत सरकार ने देशवासियों से सिंगल यूज प्लास्टिक(Single Use Plastic) यानी एक बार प्रयोग किए जाने वाले प्लास्टिक का उपयोग बंद करने का आह्वान किया है. इसी कड़ी में सरदारशहर(Sardarsahar) के वार्ड 12 और 14 की दो दर्जन से ज्यादा छोटी-छोटी बच्चियों ने अपने घर मोहल्ले से प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का दृढ़ निश्चय किया है. इसी के तहत इन बच्चियों ने अपने घर मोहल्ले और गलियों में रंगोली बनाकर प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने का आग्रह किया है. साथ ही अपने घरों के आगे पोस्टर लगाकर प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने की सलाह दे रही हैं. 

अपने घर के सदस्यों को भी बच्चों ने कहा है कि आगे से प्लास्टिक हमारे घर में मत लाना, बच्चों की यह पहल सराहनीय है. बच्चों का मानना है कि हमें ना सिर्फ अपने गांव, शहर, देश बल्कि प्लास्टिक से मुक्त होने के लिए हमें अपने घर और मोहल्ले से शुरुआत करनी होगी. इन छोटी-छोटी बच्चियों ने यह शुरुआत कर दी है. 

इन बच्चियों ने अपने माता पिता, दादा-दादी व बड़े भैया बहन को समझाया है कि आज के युग में प्लास्टिक कितना ख़तरनाक है और आगे आने वाले समय में इसके क्या दुष्परिणाम होने वाले हैं. यह बच्चे जानते हैं कि अगर आज इस प्लास्टिक को बंद नहीं किया गया तो उनका आने वाला भविष्य क्या होगा. बच्चों के आग्रह पर इनके परिवार के सदस्यों ने भी अब कपड़े के थैले से बने बैग का इस्तेमाल शुरू भी कर दिया है. बच्चों ने अपने मोहल्ले की तमाम दुकानों पर जाकर दुकानदारों से भी आग्रह किया कि आप आगे से प्लास्टिक की थैलियों का उपयोग ना करें. बच्चों को इसका सकारात्मक जवाब भी मिल रहा है.

Jasmine Sharma, News Desk