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मुंबई: बारिश के दौरान शहर को जलजमाव से बचाने के लिए जापान की मदद से बनाया गया प्लान

बारिश के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि बारिश सड़कों और लोकल रेल की पटरियो पर घंटो तक जलजमाव (water logging) देखने को मिला. 

मुंबई: बारिश के दौरान शहर को जलजमाव से बचाने के लिए जापान की मदद से बनाया गया प्लान
(फाइल फोटो)

मुंबई: मुंबई (mumbai) में इस बार की बारिश (rain) ने कई दशको का रिकार्ड़ तोड़ दिया. मुंबई के उपनगरो में 3604 मिलीमीटर बारिश हुई जबकि दक्षिण मुंबई में 2589 मिलीमीटर बारिश हुई.  इस बारिश के दौरान कई बार ऐसा हुआ कि बारिश सड़कों और लोकल रेल की पटरियो पर घंटो तक जलजमाव (water logging) रहा जिससे मुंबई थम गई. ऐसे में ये बात जोर पकड़ने लगी है कि बारिश के पानी को सही रूप से ठिकाने लगाया जाए.       

मुंबई में जलजमाव की स्थिति से निपटने के लिए एक सुझाव जापान से आया है की बारिश का पानी के भूमिगत पानी की टंकियों बनाकर उसमें स्टोर किया जाए और लो टाइड  के दौरान उसे समुंदर में विसर्जित कर दिया जाय. बीएमसी की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से मुंबई में जल-जमाव से छुटकारा मिलने की उम्मीद है. यह परियोजना पहले से ही टोक्यो शहर में लागू है.

टोक्यो शहर की जापान के होन्शू द्विप पर बसा है और उसकी आबादी तकरीबन 90 लाख है. जापान मे होने वाली प्राकृतिक आपदाओ को देखते हुए 2 बिलियन डालर खर्च करके 2006 तक अंडरग्राउंड़ टनल बनाए गए जिससे ये शहर किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय सारा पानी टनल के जरिए बार निकाल देता है.

मुंबई के लिए टनल विकल्प रूप के सही नही हो सकता क्योकि ये शहर तीन तरफ से समंदर से घिरा हुआ है. ऐसे में अगर बारिश और हाई-टाइड साथ में आए तो पानी नही निकलेगा और टनल का सही इस्तेमाल नही किया जा सकेगा.

इन्ही सब बांतो के देखते हुए शहर के अंदर ही अंडरग्राउंड टैक बनाने की बात हो रही है. मुबई शहर में 24 वार्ड है सभी वार्ड़ो में छोटे-बड़े कई सारे मैदान है. इसके साथ सरकार के पास ब्रांदा-कुर्ला कांपलेक्स में जमीन का एक बड़ा हिस्सा है. बीएमसी की योजना है कि इन्ही स्थानो पर अंडर-ग्राउंट टैंक बनाए जाएं और बारिश का पानी इक्कठा किया जाए. 

बीएमसी के लोगो का यह भी कहना हैं कि बारिश के इस पानी को लो- टाइड होने पर समंदर में छोड़ा जा सकता है या फिर पानी को गार्डन मे पौधो की सिचाई, सड़कों की धुलाई जैसे कामो में इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसे में बीएमसी के कई हजारों मिनियन लीटर पानी की बचत होगी जिसके इस्तेमाल में आने वाले दिनों में कई दूसरे कामों में कर सकेगी.

फिलहाल ये योजना अभी कागजो पर आई है लेकिन इस योजना जमीन पर उतारने में कितना समय और पैसा खर्च होगा इसके बारे में कुछ भी कहना मुश्किल होगा.