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मुंबई की बदतर हालात देख घूमने आया युवक हुआ परेशान, बनाया एक ग्रुप और फिर...

एक आंकड़े के मुताबिक मुंबई में 27000 से ज्यादा गड्ढे हैं. अब इन गड्ढों को भरने का बीड़ा उठाया है. इरफान और मुश्ताकल नामके पॉटहोल्‍स वारियर्स ने. 

मुंबई की बदतर हालात देख घूमने आया युवक हुआ परेशान, बनाया एक ग्रुप और फिर...

मुंबई: मुंबई में मानसून आते ही सड़कें बदहाल हो जाती है. देश की सबसे रईस महानगरपालिका बीएमसी सड़कों की मरम्मत पर हर साल करोड़ों खर्च करती है लेकिन गड्ढ़े खत्म नहीं होते. कई बार ये गड्ढे जानलेवा भी साबित होते हैं. इसलिए मुंबई में अब पॉटहोल्‍स वारियर्स ने सड़कों के गड्ढे भरने का बीड़ा उठाया है. 

कौन हैं ये पॉटहोल्‍स वारियर्स 
बरसात के चलते लोगो मज़बूरी में फुटपाथ पर चलने को मजबूर होना पड़ता है और इसी तरह खुले मैनहोल घातक साबित हो जाते है. एक आंकड़े के मुताबिक मुंबई में 27000 से ज्यादा गड्ढे हैं. अब इन गड्ढों को भरने का बीड़ा उठाया है. इरफान और मुश्ताकल नामके पॉटहोल्‍स वारियर्स ने. ये दोनों गड्ढों की तस्वीरें खींचकर सोशल मीडिया पर डालते हैं जिसके बाद बीएमसी इन गड्ढों को भरने के लिए मजबूर हो जाती है.

यही नहीं खुले मैनहोल को भी बंद करने के लिए ये दोनों जुटे हुए हैं. इनका कहना है कि साल 2018 में इन्हीं गड्ढो में गिरने के चलते इनके साथ बड़ा हादसा होते होते टल गया औऱ इन्ही गड्ढो के चलते कई लोगो की जान चले गई है इसलिए खुद से गड्ढे और मैनहोल भरने का काम करते है साथ तसवीरें सोशल मीडिया पर भी अपलोड करते है ताकि अपने तैयारियों की दावे करने वाली बीएमसी के आँखों से पट्टी उतर पाए.

अब तक इनदोनो पोटहोल वारियर्स ने 316 गड्ढे जबकि 186 मैनहोल भरे है और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर अपलोड किया इससे बाकी जनता भी जागरूक होगी. पॉटहोल्‍स वारियर्स की इस पहल से सड़कों पर चलनेवाली जनता भी जागरूकता दिखा रही है और गड्ढे भरने में इनका साथ दे रही है बैंगलोर में बिज़नेस करने वाले राजेश नामक व्यक्ति इन दिनों अपने काम के सिलसिले में मुम्बई आए हैं और जब राजेश ने दोनों पोटहोल वारियर्स को सडक पर गड्ढे भरते देख खुद भी गाड़ी से उतरकर गड्ढे भरने में अपना योगदान देने लगे साथ ही कहाँ की हमे सिर्फ बीएमसी पर नही अपने आप पर की सुरक्षा के लिए खुद पर निर्भर होना पडेगा.

मुंबई में अंदाजन 27000 से ज्यादा गड्ढे हैं जिन्हें भरने में बीएमसी नाकाम साबित हुई है. इसी तरह  मुंबई में करीब 3.5 लाख मैनहोल वाले गटर हैं लेकिन महज 2.5 हजार मैनहोल है जिसने जाली लगाई गई है . देश मे सबसे ज्यादा बजट बीएमसी का होता है 30 हजार करोड़ से अधिक का और सबसे ज्यादा टैक्स मुम्बई देती है इसके बावजूद क्या बीएमसी के पास मैनहोल में जाली लगाने के लिए भी फंड नहीं है और ना ही गड्ढों को भरने के लिए इच्छा शक्ति . सवाल ये है कि कब तक मुंबई के लोग बीएमसी की लापरवाही की कीमत जान देकर चुकाते रहेंगे.