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MLA का रिपोर्ट कार्ड: राजस्थान के इस विधानसभा सीट पर दोबारा जीतना सपने जैसा!

इस विधानसभा का एक दिलचस्प रिकॉर्ड यह भी है कि यहां पर अब तक 13 विधायक बने हैं. इनमें से 2 विधायकों को छोड़ दें तो कभी भी कोई भी नेता दूसरी बार विधायक नहीं बना.

MLA का रिपोर्ट कार्ड: राजस्थान के इस विधानसभा सीट पर दोबारा जीतना सपने जैसा!
यह विधानसभा क्षेत्र हरियाणा और राजस्थान बॉर्डर पर स्थित है.

संदीप केडिया, झुंझुनूं: एमएलए के रिपोर्ट कार्ड में आज हम बात कर रहे है झुंझुनूं(Jhunjhunu) के सूरजगढ़ विधानसभा सीट(Surajgarh Vidhansabha Seat) की. इस विधानसभा की कई खास बातें हैं. यह विधानसभा क्षेत्र हरियाणा और राजस्थान बॉर्डर पर स्थित है. जिसके चलते हरियाणा और सूरजगढ़ की संस्कृति में काफी समानताएं है. वहीं, खास बात यह भी है कि सूरजगढ़ विधानसभा में हरियाणा की चार विधानसभाओं की सीमा लगती है. इनमें लोहारू, नारनौल, महेंद्रगढ़ और नांगल चौधरी के गांव शामिल है. 

इस विधानसभा का एक दिलचस्प रिकॉर्ड यह भी है कि यहां पर अब तक 13 विधायक बने हैं. इनमें से 2 विधायकों को छोड़ दें तो कभी भी कोई भी नेता दूसरी बार विधायक नहीं बना. यहां पर सर्वाधिक पांच बार विधायक सुंदरलाल बने. जो कांग्रेस(Congress), निर्दलीय और बीजेपी(BJP) से विधायक रहे. वहीं श्रवणकुमार ने पहला चुनाव 2008 में जीता. फिर 2013 में हार गए. लेकिन उप चुनाव में 2014 में फिर से विधायक बनें और सूरजगढ़ विधानसभा में दुबारा विधायक बनने वाले दूसरे व्यक्ति बनें.

मतदाता बेहद समझदार, हमनाम उम्मीदवार नहीं कर सके भ्रमित
बहरहाल, बात करें 2018 के चुनावों की तो. यहां पर 19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे. मुख्य मुकाबला बीजेपी के सुभाष पूनिया(Shubhash Poonia) और कांग्रेस के श्रवणकुमार(Shravan Kumar) के बीच था. करीबी मुकाबले में बीजेपी के सुभाष पूनियां ने श्रवणकुमार को 3425 वोटों से चुनाव हराया. इस चुनाव में हमनाम उम्मीदवार भी काफी चर्चा में रहे. कांग्रेस के श्रवणकुमार के अलावा यहां पर दो और श्रवणकुमार चुनाव मैदान में थे. तो वहीं बीजेपी के सुभाष पूनियां के अलावा एक और प्रत्याशी का नाम सुभाष पूनियां था. लेकिन ये हमनाम उम्मीदवार मतदाताओं को ज्यादा भ्रमित नहीं कर पाए और इन हमनाम उम्मीदवारों की वोटों की संख्या तीन अंकों में ही सिमटकर रह गई. हालांकि यहां पर कांग्रेस से बागी होकर चुनाव लड़ रहे बसपा के कर्मवीर यादव ने 30 हजार से ज्यादा वोट लेकर मुकाबला रोचक किया और कांग्रेस को हराने के अपने उद्देश्य में भी कामयाब रहे.

1962 में पहली बार अस्तित्व में आई थी सीट
सूरजगढ़ विधानसभा के इतिहास की बात करें तो यह सीट 1962 में अस्तित्व में आई. तब से 2008 के चुनावों से पहले तक यह सीट अनुसूचित जाति वर्ग के लिए सुरक्षित थी. यहां से पहले और दूसरे विधायक स्वतंत्र पार्टी के शिवनारायण और सूरजमल चुने गए. इसके बाद 1972 में झुंझुनूं के दिग्गज जाट नेता शीशराम ओला की सरपरस्ती में कांग्रेस की टिकट पर सुंदरलाल ने चुनाव लड़ा और चुनाव जीता भी. जैसा कि इस सीट का ट्रेंड रहा है. 

उसके मुताबिक सुंदरलाल 1977 में अगला चुनाव हार गए और यहां पर पहली बार फूल खिला. बीजेपी के सुभाषचंद्र आर्य ने चुनाव जीता. लेकिन इससे अगला 1980 का चुनाव सुंदरलाल ने निर्दलीय तथा 1985 में कांग्रेस की टिकट पर फिर से चुनाव जीता. सुंदरलाल ने यहां पर अंतिम चुनाव 2003 में लड़ा और वो भी जीत दर्ज की. 

2008 के चुनावों में इस सीट को सामान्य सीट में शामिल किया गया तो यहां पर श्रवणकुमार ने जीत दर्ज की. लेकिन अगले ही चुनाव में श्रवणकुमार को 50 हजार वोटों से हार मिली. पर एक साल बाद हुए उपचुनाव में ही श्रवणकुमार ने फिर जीत दर्ज कर. सुंदरलाल के रिकॉर्ड को तोड़ा और सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से दूसरी बार विधायक बनने का गौरव हासिल किया. फिलहाल यहां से बीजेपी के सुभाष पूनियां विधायक है. 

ये बने है अब तक विधायक-
1962 शिव नारायण स्वतंत्र पार्टी
1967 सूरजमल स्वतंत्र पार्टी
1972 सुंदरलाल कांग्रेस
1977 सुभाषचंद्र आर्य बीजेपी
1980 सुंदरलाल निर्दलीय
1985 सुंदरलाल कांग्रेस
1990 बाबूलाल खांडा जनता दल
1993 सुंदरलाल निर्दलीय
1998 हनुमानप्रसाद कांग्रेस
2003 सुंदरलाल बीजेपी
2008 श्रवणकुमार कांग्रेस
2013 संतोष अहलावत बीजेपी
2014 श्रवणकुमार कांग्रेस, उप चुनाव
2018 सुभाष पूनियां बीजेपी

दो बार निर्दलीय जीता, जीतने वाले थे सुंदरलाल
पार्टियों के लिहाज से देखा जाए तो सूरजगढ़ विधानसभा किसी एक पार्टी का गढ कभी नहीं रही. यहां अब तक तक 14 विधायक बनें हैं. इनें सर्वाधिक पांच बार कांग्रेस और दूसरे नंबर पर चार बार बीजेपी के विधायक रहे है. वहीं दो बार स्वतंत्र पार्टी तो दो बार निर्दलीयों ने चुनाव जीता है. दोनों ही बार निर्दलीय के रूप में यहां से काका सुंदरलाल ने चुनाव जीता.

महिलाएं रहीं थी पुरुषों से आगे
2018 के मतदाताओं पर गौर करें तो यहां पर कुल 2 लाख 68 हजार 968 मतदाता थे. जिनमें से 72.38 फीसदी लोगों ने मतदान किया. यहां पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में मतदान को लेकर उत्साह था. एक ओर जहां पुरुषों का मतदान प्रतिशत 71.26 प्रतिशत रहा. वहीं दूसरी ओर महिलाओं का मतदान प्रतिशत 74.54 प्रतिशत रहा. 

सरकार रो रही है संसाधनों और बजट का रोना
सूरजगढ़ विधानसभा के विधायक सुभाष पूनियां की मानें तो कांग्रेस सरकार ने उन्हें अब तक कोई सहयोग नहीं किया है. यही कारण है कि वे ज्यादा कुछ नहीं कर पाए. फिर भी उन्हें विश्वास है कि जिन आंकाक्षाओं के साथ क्षेत्र की जनता ने उन्हें विधायक बनाया है. वे उन पर खरा उतरेंगे. हमसे खास बातचीत में पूनियां ने कहा कि जनता से जो वायदे किए थे. उनमें हमें आंशिक सफलता मिली है. साथ ही सरकार पर विकास पर रोड़ा अटकाने, विकास कार्यों को ठप करने और संसाधनों का रोना रोकर पीछा छुड़ाने जैसे आरोप लगाए है. उन्होंने बातचीत में बताया कि बात चाहे सरकारी कॉलेज की हो या फिर कुंभाराम लिफ्ट कैनाल के पानी की. सभी योजनाओं को लेकर वे विधानसभा में भी बोले है और सरकार के भी संपर्क में है. जिन्हें लेकर सकारात्मक संकेत मिल रहे है. 

श्रवणकुमार ने कहा, झूठ बोल रहे है पूनियां
विधायक सुभाष पूनियां के सामने चुनाव लडऩे वाले कांग्रेस के प्रत्याशी एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्रवणकुमार ने सुभाष पूनियां पर ताना मारा है. उन्होंने कहा कि उन्हें तो कहीं पर विधायक और उनका कार्यकाल और उनके द्वारा करवाया गया विकास नजर नहीं आ रहा है. उन्होंने कहा कि विधायक सुभाष पूनियां झूठ बोल रहे है कि उन्हें विधायक निधि का पैसा नहीं मिल रहा. जबकि विधायक निधि का पैसा सभी को मिलता है. परंतु ऐसी बातें बोलकर सुभाष पूनियां अपनी कमजोरी को दर्शा रहे है. 

श्रवणकुमार ने कहा कि वे चाहे चुनाव हार गए हो. लेकिन फिर भी सूरजगढ़ के विकास के लिए कटिबद्ध है. उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि सूरजगढ़ और बुहाना में सरकारी कॉलेज खुले और कुंभाराम लिफ्ट कैनाल का पानी सूरजगढ़ को मिले. जिसे आगामी साल तक लाने की कोशिश रहेगी. उन्होंने कहा कि सुभाष पूनियां बताएं कि वसुंधरा सरकार ने कौनसा काम शुरू किया और वो बंद है, केवल झूठी बातें करने से जनता दुबारा बहकावे में नहीं आएगी. 

क्षेत्र के लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया
विधायक सुभाष पूनियां के इस कार्यकाल के बारे में हमनें बात की सूरजगढ़ के लोगों से भी. जहां पर भी मिली जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली. सूरजगढ़ कस्बे के लोगों ने बताया कि विधायक ने उन्हें आश्वासन तो खूब दिए. लेकिन अभी तक सूरजगढ़ कस्बे के लिए एक पैसा भी नहीं दिया. यही नहीं सूरजगढ़ पंचायत समिति के अंतर्गत आने वाली पंचायतों को भी पैसा ना देने का आरोप लगाया. 

वहीं, कुछ लोगों ने विधायक के कार्यकाल की प्रशंसा की और कहा कि विपक्ष में होने के बाद भी विधायक ना केवल काम करवा रहे है. बल्कि सरकार पर दबाव बनाकर सकारात्मक पहल भी कर रहे है. साथ ही कहा कि विधायक अकेले क्या करे? असल में तो कांग्रेस नेताओं के इशारे पर सूरजगढ़ में भ्रष्टाचार पनप रहा है.