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टोंक नगर परिषद में सामने आई अधिकारियों की मनमानी, CCTV कैमरों के साथ की खुलेआम छेड़छाड़

नगर परिषद के एंट्री गेट को छोड़ कर अन्य सभी अफसरों के चैम्बर में लगे सीसीटीवी कैमरों का मूहं दीवार की तरफ मोड़ा हुआ मिला.

टोंक नगर परिषद में सामने आई अधिकारियों की मनमानी, CCTV कैमरों के साथ की खुलेआम छेड़छाड़

पुरूषोत्तम जोशी, टोंक: राजस्थान में सरकारी महकमों में अफसरों की मनमानी, कामचोरी और सुविधा शुल्क की शिकायतों के पार पाने के लिए सरकार ने कई महकमों में सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए. अधिकांश नगर निकाय के दफ्तरों में भी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी शुरू की गई है. उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की गृह नगरी टोंक की नगर परिषद में सालों पहले तत्कालानी भाजपा सरकार में लाखों रूपए की लागत से हाईडेफिनेशन सीसीटीवी सभी अफसरों की चेम्बर में लगाए गए थे.

सभापति, आयुक्त, कैशियर सहित सभी शाखाओं के दफ्तरों में यह कैमरे लगाए गए थे .और कोशिश यह की गई थी कि अफसरों और कार्मिकों पर निगरानी रखी जाए लेकिन जब जी मीडिया की टीम ने नगर परिषद टोंक का रियल्टी चैक किया तो अफसरों की भारी लापरवाही और मनमानी देखने को मिली.

स्वागत द्वार को छोड़ कर अन्य सभी अफसरों के चैम्बर में लगे सीसीटीवी कैमरों का मूहं दीवार की तरफ मोड़ा हुआ मिला. यह हालात तो तब जब नगर परिषद आए दिन रिश्वतखोरी को लेकर विवादों में रहती है. आए दिन नगर परिषद में लोग हंगामा करते हैं. 

बीती रात तो सभापति के पति और भाजपा के वरिष्ठ नेता बेणी प्रसाद जैन के साथ समाज विशेष के लोगों ने जानलेवा हमला कर मारपीट कर दी थी. जानकारी सामने आया कि पिछले कई महीनों से सारे सीसीटीवी कैमरें तो बंद पड़े हैं. जब हमने ऑन कैमरा नगर परिषद आयुक्त पूजा मीना से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने पहले तो हमसे ही बदसलूकी की और फिर हम पर ही राजनीति करने का आरोप लगा दिया. यहां तक कह दिया कि आप बिना पूछे चैम्बर के घुसे कैसे.

अब आप अंदाजा लगाइये कि राजस्थान के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के गृह जिले की सबसे बड़ी नगर परिषद में इस तरह के लोकसेवक भाजपा शासन से ही कुर्सियों पर जमे हुए हैं. जो अपनी कामचोरी की पोल पट्टी खुलने पर मीडियाकर्मियों से भी बदसलूकी करने से नहीं चूकते.

सबसे बड़ी हैरत की बात तो यह है कि क्या कांग्रेस की सरकार में लोकसेवक इस तरह से मीडियाकर्मियों से बदलसूली करेंगे. क्या ऐसा नहीं हो सकता जब मीडियाकर्मियों से ऑन कैमरा बदसूलकी की जा रही है. तो कैसे आमजन को छोड़ा जाता होगा. कैसे आमजन अपनी समस्या के समाधान की उम्मीद कर सकता है. कैसे इन कामचोर और मनमाने अफसरों से परेशान हो रहे होंगे शहरवासी. आखिर क्यों सूबे के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट इन अफसरों पर कार्रवाई नहीं करते है. आखिर क्यों कांग्रेस के पदाधिकारी इसकी शिकायतें नहीं करते.