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पाली: खाप पंचायत का तुगलकी फरमान, परिवार का हुक्का पानी किया बंद

परिवार ने स्थानीय थाने को रिपोर्ट दी तो पंचों की रसूख के कारण थाने में भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. जिसके बाद पीड़ित परिवार ने एडीजी बीएल सोनी को अपनी पीड़ा सुनाई. 

पाली: खाप पंचायत का तुगलकी फरमान, परिवार का हुक्का पानी किया बंद
पंचायत ने आदेश जारी कर परिवार को 4 गांव से बहिष्कृत कर दिया है.

जयपुर: राजस्थान के पाली जिले में एक परिवार ने समाज के पंचों की ओर से किये गलत फैसले का विरोध किया तो उनका हुक्का पानी बंद कर दिया गया. इतना ही नहीं उन्हें 4 गांवो से बहिष्कृत कर दिया गया. वहीं, परिवार ने स्थानीय थाने को रिपोर्ट दी तो पंचों की रसूख के कारण थाने में भी मुकदमा दर्ज नहीं हुआ. जिसके बाद पीड़ित परिवार ने एडीजी बीएल सोनी को अपनी पीड़ा सुनाई. एडीजी के निर्देश के बाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया. 

वहीं, पीड़ित सुरेश का कहना है कि उनके चाचा का निधन होने के बाद उन्हे जबरदस्ती गोद जाने के लिए पंचों की ओर से दबाव बनाया गया. इसके लिए उनसे 30 हजार रुपये मांगे गये. परिवार के दबाव के बाद पंचायत को 30 हजार रुपये भी दे दिये गये, लेकिन बाद में समाज ने इसे गलत बताया तो राशी वापस मांगी गयी जिसके बाद पंच लक्ष्मण, भगवानलाल व हकाराम ने आदेश जारी कर उन्हे 4 गांव व समाज से बहिष्कृत कर दिया.

साथ ही पंचायत ने परिवार का हुक्का पानी बंद करने के आदेश दिया. पीड़ित का कहना है कि कुछ लोग दबंगई के चलते खुद को ही समाज में पंच घोषित कर लेते है और फिर मनमाने ढंग से आदेश मनवाते है. जो कानून हमारे संविधान में है उनसे विपरित जाकर ये पंचायते काम करती है. स्थानीय पुलिस भी इनके निर्देश पर काम करती है. समाज की प्रताडना के खिलाफ सुरेश ने रानी पुलिस थाने पहुंच कर समाज के 3 पंचों के खिलाफ मामला दर्ज कर न्याय की मांग की है.

देश के कानून से ऊपर है एक और कानून
पुलिस की ओर से मुकदमा दर्ज नहीं करने और उच्चाधिकारियों के दबाव के बाद मुकदमा दर्ज होने के बावजूद दबंगो के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की घटना ने साफ कर दिया कि आज भी देश के कानून से ऊपर एक और कानून है. जिसके आगे पुलिस की कानून व्यवस्था कोई मायने नहीं रखती. जिसके चलते आज भी समाज के पंचों का फैसला चाहे कुछ भी हो मानना पड़ता है. जो कि संविधान की बाते करने वालों पर एक करारा तमाचा है.