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भीलवाड़ा: कचरे से पटी नहरों को बिना साफ किए ही पानी छोड़ने की तैयारी, किसान परेशान

सिंचाई विभाग के पास नहरों की मरम्मत और सफाई के लिए बजट ही नहीं है. 

भीलवाड़ा: कचरे से पटी नहरों को बिना साफ किए ही पानी छोड़ने की तैयारी, किसान परेशान
बारिश के बाद ज्यादातर क्षेत्रों में नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं.

दिलशाद खान, भीलवाड़ा: रबी की फसलों की सिंचाई के लिए बांधों और तालाबों से पानी छोड़ने की तैयारी है. प्रशासन ने जल वितरण कमेटियों की बैठकें तय कर दी हैं और इसी महीने के अंत तक रेलणी के लिए पानी छोड़ने की तारीख तय की जा रही है. 

बारिश के बाद ज्यादातर क्षेत्रों में नहरें क्षतिग्रस्त हो गई हैं. कई जगह नहरों में कचरा भरा पड़ा है. शहरी क्षेत्र से गुजरने वाली करीब 10 किमी नहर में निजी कॉलोनाइजरों और दबंगों द्वारा 10 साल में स्थाई निर्माण करा अतिक्रमण कर रखा है. सिंचाई विभाग के पास नहरों की मरम्मत और सफाई के लिए बजट ही नहीं है. ऐसे में बिना मरम्मत सफाई के ही नहरों में पानी छोड़ना पड़ेगा. 

ऐसा किया तो टेल के किसानों को पानी मिलना संभव नहीं होगा और जो पानी नहर में छोड़ा जाएगा, वो भीलवाड़ा शहर के कई वार्डवासियों के लिए परेशानी का कारण बन जाएगा. इस बार पर्याप्त बारिश होने से बांधों तालाबों में अच्छा पानी है. इससे इस बार सिंचाई के लिए पानी ज्यादा बार छोड़ने की उम्मीद है. 

मरम्मत और सफाई के लिए नहीं है बजट
जल संसाधन खंड प्रथम के अधिशासी अधिकारी सीएल कोली का कहना है कि नहरों की मरम्मत और सफाई के लिए बजट नहीं है. ऐसे में मनरेगा के भरोसे कोटड़ी उपखंड क्षेत्र की 66 किलोमीटर लंबी नहरें, सिंचाई विभाग के 5 बांधों में पानी से तीन बार 5174 हैक्टेयर में होगी रबी की फसल की सिंचाई और बुवाई होगी. कोटड़ी में अच्छी बारिश से इस बार क्षेत्र के पांच बांध कोठारी, देवरिया, झाड़ोल, शिवसागर तथा सांखड़ा उंडी लबालब हैं. रेलणी के लिए पर्याप्त पानी मिलने से किसानों को रबी की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है. समस्या यह है कि टूटी नहरों से खेतों तक पानी कैसे पहुंचेगा? ऐसे में किसान भी परेशान हैं.

Edited By: Sanjay Yadav, News Desk