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राजस्थान: टोल की दर सरकारों के लिए बनी नई चाबी, कभी होती है हां तो कभी...

स्टेट हाईवेज(State Highways) पर चलने वाले निजी वाहनों से टोल की वसूली शुरू हो गई है. सरकार इस फ़ैसले पर अपनी मजबूरी बताने के साथ ही पक्ष भी रख रही है. तो विपक्ष ने विरोध में मोर्चा खोल दिया है.

राजस्थान: टोल की दर सरकारों के लिए बनी नई चाबी, कभी होती है हां तो कभी...
(फाइल फोटो)

जयपुर: स्टेट हाईवेज(State Highways) पर चलने वाले निजी वाहनों से टोल की वसूली शुरू हो गई है. सरकार इस फ़ैसले पर अपनी मजबूरी बताने के साथ ही पक्ष भी रख रही है. तो विपक्ष ने विरोध में मोर्चा खोल दिया है.

लेकिन इस हंगामे को देखकर चर्चा इस बात की भी हो रही है कि कहीं सरकारों को लोगों को प्रभावित करने के लिए टोल की दरों के रूप में कोई नई चाबी तो नहीं मिल गई है? दरअसल, यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि अब तक पेट्रोल-डीज़ल पर लगने वाले वैट की दरों को लेकर सरकारें घटत-बढ़त करती रही हैं.

राजे के कार्यकाल में उठे सवाल
वसुंधरा राजे(Vasundhra Raje) के कार्यकाल में भी यह सवाल उस वक्त उठे थे. जब अपने ही कार्यकाल में तत्कालीन सरकार ने पहले तो चार फीसदी वैट लगाया और फिर चार फीसदी की ही कटौती भी कर दी थी. लेकिन क्या अब टैक्स कटौती को सत्ता में लौटने की कुंजी और टैक्स बढ़ाने को राज चलाने के लिए आधार के रूप में देखा जाए?

टोल टैक्स की वसूली हुई शुरू
प्रदेश में अब स्टेट हाईवेज(State Highways) पर एक बार फिर से निजी गाड़ियों पर टोल टैक्स लगना शुरू हो गया है. पिछले दिनों सरकार में इस बात का प्रस्ताव तैयार हुआ, कैबिनेट ने सर्कुलेशन से पारित किया और 1 नवंबर की आधी रात से वसूली भी शुरू हो गई. लेकिन निजी गाड़ियों पर टोल फिर से लागू करने पर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने हैं. यह हालात इसलिए भी बने हैं, क्योंकि पिछली बीजेपी सरकार ने 1 अप्रेल 2018 से प्रदेश में निजी वाहनों को स्टेट हाईवेज़ पर टोल मुक्त करने का ऐलान किया था. 

जानिए अशोक गहलोत क्या दे रहे हैं तर्क
अब अपनी सरकार के फैसले के पक्ष में सीएम अशोक गहलोत(Ashok Gehlot) तर्क दे रहे हैं तो साथ ही पिछली वसुंधरा सरकार पर निशाना साधते हुए गहलोत कहते हैं कि वसुंधरा सरकार ने सत्ता में वापसी के लिए टोल फ्री करने का खेल किया था. सरकार के भले अपने तर्क हो. लेकिन बीजेपी कहती है कि उसने चुनाव में माइलेज लेने के लिए ऐसा कतई नहीं किया. 

बीजेपी को मिला बड़ा मुद्दा
निकाय चुनाव से पहले टोल टैक्स के विरोध के जरिये बीजेपी को एक मुद्दा मिल गया है. यही कारण है कि बीजेपी के नेता टोल वसूली का विरोध करने के लिए सड़कों पर भी उतरे और सरकार से टोल वसूली के ऐलान को वापस लेने की मांग भी की. इसके साथ ही बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया तो सरकार पर पैट्रोल-डीजल पर वैट की दरे भी असंगत तरीके से बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं. टोल पर भले हंगामा हो रहा हो. लेकिन वैट का मामला भी कम गंभीर नहीं है. अलग-अलग समय पर सरकारों ने वैट की दरों में घटत-बढ़त का खेल किया है.

बीजेपी सरकार ने वैट दरों में हुई थी वृद्धि
इस मामले में पिछली वसुंधरा सरकार पर भी सवाल उठते रहे हैं. वसुंधरा राजे ने पिछले विधानसभा चुनाव से पहले गौरव यात्रा के दौरान सितंबर 2018 में रावतसर की सभा में पैट्रोल-डीज़ल पर वैट की दरों में चार फीसदी कटौती का ऐलान किया था. सरकार ने तब वाहवाही लूटने की खूब कोशिश भी की. लेकिन मीडिया और सोशल मीडिया में तत्कालीन सरकार को 18 दिसम्बर 2014 की वह तारीख़ भी याद दिलाई गई. जब खुद के कार्यकाल में वसुंधरा राजे ने ही पेट्रोल-डीजल पर वैट की दरें बढ़ाईं थी. 

साल 2014 के दिसंबर में वैट बढ़ाने के बाद सरकार ने पौने चार साल जनता से वैट वसूला और राहत देने के नाम पर चार फीसदी की उसी बढ़ोतरी को वापस ले लिया गया. रावतसर की सभा में वैट में कटौती के ऐलान के बाद एक बार फिर पेट्रोल-डीज़ल पर वैट दिसम्बर 2014 में बढ़ोतरी से पहले के स्तर पर आ गया था.

पेट्रोल-डीज़ल में चार फ़ीसदी वैट की कटौती के रूप में वसुंधरा सरकार ने लोगों को राहत देने की कोशिश की थी. इस लिहाज से देखा जाए तो तत्कालीन सरकार ने लोगों को दो बड़ी राहत दी थी. इनमें से एक तो स्टेट हाईवेज़ पर टोल टैक्स में थीं. जबकि दूसरी राहत वैट में कटौती करके थी. हालांकि तब भी कांग्रेस ने इसे चुनावी एजेंडा ही करार दिया था. 

अब सतीश पूनिया ने जब गहलोत सरकार पर वैट और टोल टैक्स को असंगत तरीके से लागू करने के सवाल उठाये हैं. तो पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के वक्त भी वैट बढ़ाने की बात उठी है. इस पर सतीश पूनिया(Satish Poonia) कहते हैं कि उनकी सरकार ने तो लोगों को राहत दी थी. लेकिन जब उनकी ही पार्टी द्वारा वैट बढ़ाने की बात ध्यान में दिलाई तो पूनिया इस बात पर आ गए कि 11 महीने में ही मौजूदा सरका को क्या परेशानी आ गई?

जिस तरह पूनिया वैट में बढ़ोतरी और टोल को लेकर विरोध जता रहे हैं. कुछ वैसी ही हालत कांग्रेस के नेताओं की विपक्ष में रहते हुए थी. लेकिन हटे हुए टोल टैक्स को फिर से लागू करना सरकार के लिए भी कोई आसान फ़ैसला नहीं था. 

हालांकि राजनीतिक मामलों के जानकार इस बात की संभावनाएं भी जता रहे हैं कि कांग्रेस सरकार भी चुनावी साल में स्टेट हाईवे पर निजी गाड़ियों को एक बार फिर से टोल फ्री कर सकती है. लेकिन सवाल तो तब भी यही उठेंगे कि क्या सरकारों के लिए वैट और टोल भी जनता को लुभाने और सत्ता तक लौटने की कुंजी के रूप में ही देखे जाएंगे?