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राजस्थान: खोले गए बीसलपुर बांध के 17 गेट, ओवरफ्लो के चलते बनास नदी में छोड़ा गया पानी

2016 में सबसे ज्यादा पानी की निकासी की जाने के बाद दूसरी बार 2019 में ज्यादा पानी की निकासी हुई है. पहली बार 2004 में खुले गेटों से 24 टीएमसी पानी की निकासी की गई थी.

राजस्थान: खोले गए बीसलपुर बांध के 17 गेट, ओवरफ्लो के चलते बनास नदी में छोड़ा गया पानी

जयपुर: पहली बार बीसलपुर बांध की मुस्कुराहट इतनी ज्यादा देखी गई. पिंकसिटी की लाइफलाइन बीसलपुर बांध पर मानसून की मेहरबानी अबकी बार इतनी हुई कि बांध के 17 गेट खोलने पड़े. बीसलपुर बांध के इतिहास में यह पहला मौका है जब 18 में से 17 गेट खोले गए. मरूधरा से मानसून की विदाई से पहले मूसलाधार बारिश से त्रिवेणी नदी अपना रौद्ध रूप दिखा रही है. नदियों के उफान को देखते हुए बीसलपुर के 17 गेट खोले गए. 

पहली बार बीसलपुर बांध के 17 गेट खोले गए. 17 गेटों में से 16 गेट तीन-तीन मीटर तक खोले गए हैं, जबकि एक गेट 2 मीटर तक खोल कर बनास नदी में पानी की निकासी की जा रही है. बांध के 17 गेट खोलने के बाद बीसलपुर बांध पर पर्यटकों की भीड़ उमड़ पड़ी है. बीसलपुर बांध पर कुल 18 गेट हैं, जिनमें से बांध परियोजना की ओर से 17 गेट खोल दिए गए हैं. इसी बीच त्रिवेणी का गेज वापस घटकर 5.70 मीटर रह गया है. 2016 में ओवरफ्लो होने पर बांध के 18 में से 16 गेट खोले गए थे.

बीसलपुर बांध के गेट पहली बार 2004 में खोले गए थे. 1999 से अब तक बांध के गेट 5वीं बार खुले हैं. 2016 में सबसे ज्यादा पानी की निकासी की जाने के बाद दूसरी बार 2019 में ज्यादा पानी की निकासी हुई है. पहली बार 2004 में खुले गेटों से 24 टीएमसी पानी की निकासी की गई थी. 2006 में दूसरी बार गेट खोले. 2006 में दूसरी बार गेट खोलकर 43 टीएमसी पानी की निकासी की जा सकी थी. 2014 में बारिश की कमी रही. चौथी बार 2016 में बांध में भारी पानी की आवक हुई और बांध बनने के बाद 2016 में 135 टीएमसी पानी की निकासी हुई जो सबसे ज्यादा रही. 2019 में बांध भरा और बांध बनने के बाद से दूसरी बार ज्यादा पानी की निकासी की जा रही है.

जल संसाधान विभाग ने पानी के आवेरफ्लो के चलते 18वां गेट भी खोलने की तैयारी कर ली थी लेकिन आखिरी गेट में डैमेज के चलते नहीं खोल सकता. ऐसे में जल संसाधन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है. ऐसे में सवाल यही उठते हैं कि समय रहते हुए विभाग ने पहले ही गेटों की जांच क्यों नहीं की.