राजस्थान: खुशियों की दिवाली मुहिम में लोकल कारिगरों से खरीदे गए 3 लाख दीपक

'दिवाली खुशियों वाली' अभियान के तहत तीन लाख मिट्टी के दीये स्थानीय कुम्हारों से तैयार कराए गए, जिनसे दिये खरीदकर सबसे पहले उन्हें रोजगार दिया गया. 

राजस्थान: खुशियों की दिवाली मुहिम में लोकल कारिगरों से खरीदे गए 3 लाख दीपक
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: दीपावली में अक्सर सोशल मीडिया में मिट्टी के दियों के उपयोग के अभियान चलाए जाते रहे हैं. लेकिन दीपावली के दिन शायद यह संदेश कहीं गायब सा नजर आता है, इसलिए अब जयपुर में एक संस्था ने मिट्टी के दियों को बढ़ावा देने के लिहाज से जमीनी स्तर पर पहल कर तीन लाख मिट्टी के दिए तैयार कराए हैं. जो बेरोजगारों को निशुल्क वितरित किए जा रहे हैं, ताकि ये दिए बेचकर उनकी दिवाली भी रोशन हो सके और मिट्टी के दियों को भी बढ़ावा मिले.

राजधानी के महारानी कॉलेज में आज 'दिवाली खुशियों वाली' अभियान की शुरूआत हुई. इस कार्यक्रम में छात्राओं से आह्वान किया गया कि वो दिवाली पर मिट्टी के दियों को ना सिर्फ खुद अपने घरों में जलाने के लिए खरीदें बल्कि अपने इलाके की मिट्टी से बने दियो के इस्तेमाल के लिए दीपावली पर लोगों को भी प्रेरित करें. मुनि पूज्य सागर की प्रेरणा से इस अभियान की शुरूआत की गई, जिसमें लोगों को कड़ी के रूप में विद्याथियों को जोड़ने का आह्वान किया गया. समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई डीओपी प्रमुख सचिव रोली सिंह ने भी इस मुहिम की सराहना की. साथ ही आम लोगों से अपील की कि वो दीपावली पर मिट्टी के दिये अपनाएं, ताकि प्रदेश के स्थानीय कारीगरों और श्रमिकों को आर्थिक मदद मिल सके.

'दिवाली खुशियों वाली' अभियान के तहत तीन लाख मिट्टी के दीये स्थानीय कुम्हारों से तैयार कराए गए, जिनसे दिये खरीदकर सबसे पहले उन्हें रोजगार दिया गया. इसके बाद संस्था और इससे जुड़े लोगों ने इन दियों को उन बेरोजगारों तक निशुल्क भेजा, जो जगह-जगह पर इसके स्टॉल लगा रहे हैं. आम जन से मिट्टी के दियों को खरीदने की अपील की जा रही है. जिससे स्थानीय कारीगरों और बेरोजगारों का हित हो सके. 

अभियान के प्रमुख संयोजक श्रवण सिंह राठौड़ ने बताया कि जयपुर समेत पांच शहरों में ये अभियान शुरू किया जा रहा है, जिससे ईको फ्रेंडली दिवाली मनाने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ सके. दिवाली के त्योहार से पहले की गई इस अनूठी मुहिम में आम जन का भी सहयोग मिलने लगा है. महारानी कॉलेज में हुए इस कार्यक्रम में छात्राओं ने भी मिट्टी के दियों की ना सिर्फ खरीदा बल्कि इन्हें अपनाने के लिए लोगों को प्रेरित करने का जिम्मा भी उठाया. बहरहाल, जरूरी नहीं कि आपके किसी बड़े काम से ही समाज का भला हो, इस तरह की छोटी- छोटी सामाजिक मुहिम से भी समाज के हर वर्ग, हर तबके की दिवाली को रोशन किया जा सकता है.