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राजस्थान: कांग्रेस के न्याय के वादे पर भारी नाबार्ड की ना, नया फसली कर्ज मिलना हुआ मुश्किल

राजस्थान में ब्याजमुक्त फसली कर्ज लाखों किसानों की पहुंच से दूर है. 30 सितंबर तक कर्ज मुहैया करवाने के दावे भी हवा हो गए हैं. 

राजस्थान: कांग्रेस के न्याय के वादे पर भारी नाबार्ड की ना, नया फसली कर्ज मिलना हुआ मुश्किल
नाबार्ड अब 7.50 फीसदी की महंगी ब्याज दर पर धन उपलब्ध करवाने की बात कह रहा है.

जयपुर: नाबार्ड के पुनर्वित्त पर कर्ज देने से मना करने पर राज्य सरकार मुश्किल में आ गई है. राजस्थान सरकार को दस हजार करोड़ रुपये का फसली कर्ज उपलब्ध करवाना हैं, इसके मुकाबले महज तीन हजार करोड़ रुपए का नया फसली कर्ज किसानों को मुहैया करवाया गया है. राहुल गांधी के न्याय की घोषणा की राह में यह बड़ी रुकावट बन रहा है. किसानों की कर्जमाफी और नया फसली कर्ज उपलब्ध करने का वादा भी कांग्रेस की ओर से चुनावी सीजन में किया गया था.  

रियायती दर पर कर्ज देने से मना
राजस्थान में ब्याजमुक्त फसली कर्ज लाखों किसानों की पहुंच से दूर है. 30 सितंबर तक कर्ज मुहैया करवाने के दावे भी हवा हो गए हैं. प्रदेश सरकार को रियायती दर पर फसली कर्ज मुहैया करवाने के लिए पुर्नवित्त संस्था नाबार्ड ने धन नहीं होने का हवाला देकर हाथ पीछे खींच लिए हैं. नाबार्ड के इस फैसले से प्रदेश सरकार के किसानों को तय समय में शून्य ब्याज दर पर फसली ऋण उपलब्ध करवाने की उम्मीदें धराशाही हो गई हैं. सहकारिता विभाग ब्याजमुक्त ऋण बांटने में पचास फीसदी लक्ष्य को भी नहीं छू पाया हैं.

कई जिले लक्ष्य से काफी पीछे
प्रदेश में कर्ज वितरण के मामले में सबसे कमजोर जिला बीकानेर है. अजमेर, भरतपुर, चुरू और जालौर में भी आंकड़े सरकारी ढिलाई को दर्शाते हैं. बाड़मेर, चितौड़ ,भीलवाड़ा, जयपुर, जोधपुर में कर्ज वितरण की स्थिति अन्य जिलों के मुकाबले बेहतर हैं, लेकिन लक्ष्य से कम है. किसानों को कर्ज देने में राज्य सरकार के सामने वित्त संसाधन जुटाने की परेशानी खड़ी हो गई है. किसानों की कर्ज माफी के समय से बने वित्तीय संकट अभी बरकरार हैं, इसी दौरान नए कर्ज बांटने में आ रही परेशानी किसानों में आक्रोश पैदा कर सकती है.

अधिक बारिश से बिगड़ी फसल
कई जिलों में अधिक बारिश से फसलों में सौ प्रतिशत खराबा हैं, नया फसली कर्ज नहीं मिलने से इनकी फसल बीमा दायरे से भी बाहर हैं. नाबार्ड ने 4.50 फीसदी ब्याज दर पर पुनर्वित्त से कर्ज के लिए अपैक्स बैंक को इनकार करने के बाद विकल्पों पर ध्यान देना होगा. नाबार्ड का इसके पीछे तर्क भारत सरकार की ओर से बजट उपलब्ध नहीं करवाना है. 

निकाय चुनावों पर असर
नाबार्ड अब 7.50 फीसदी की महंगी ब्याज दर पर धन उपलब्ध करवाने की बात कह रहा है. इतनी महंगी दर पर कर्ज लेने से भुगतान संकट गहरा जाएगा. कर्ज नहीं मिलने से किसान संगठन पहले ही गहलोत सरकार को अपनी नाराजगी दर्ज करवा चुके है. अगर सरकार ने समय रहते इस पर कोई फैसला नहीं लिया तो पंचायत और निकाय चुनावों में परेशानी झेलनी पड़ सकती है.