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राजस्थान में फिर बरपा मौसमी बीमारियों का कहर, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट

 स्वाइन फ्लू हो या डेगूं, कमोबेश हर बीमारी में जयपुर पहले पायदान पर है. पिछले सालों के आंकड़ों की बात करें तो राजस्थान को मौसमी बीमारियों ने पूरे 12 महीने अपनी जद में लिया था.

राजस्थान में फिर बरपा मौसमी बीमारियों का कहर, स्वास्थ्य विभाग हुआ अलर्ट
स्वाइन फ्लू हो या डेगूं, कमोबेश हर बीमारी में जयपुर पहले पायदान पर है.

जयपुर: मौसम के आए बदलाव के साथ ही राजस्थान में भी मौसमी बीमारियों की जद में आ गई है. मौसमी बीमारियां प्रदेश में धीरे-धीरे पांव पैर पसार रही हैं. स्वाइन फ्लू, डेंगू, स्क्रब टाइफस समेत अन्य बीमारियां राज्य कई हिस्सों में अपना असर दिखाने लगी हैं. वहीं, दूसरी तरफ पशुजनित कांगों फीवर भी चिकित्सा विभाग के लिए बड़ा सर दर्द बन गया है.

बता दें कि, बारिश के दौरान आस-पास के कई इलाकों से बहकर आई गंदगी व कचरे नदी में लम्बे समय से जमा हो जाती है. जिसके कारण पानी में मच्छरों के लाखों लार्वा विकसित होने की संभावना होती है. यही कारण है कि मौसमी बीमारियां कई इलाकों में फैलने लगती हैं.

वहीं, स्वाइन फ्लू हो या डेगूं, कमोबेश हर बीमारी में जयपुर पहले पायदान पर है. पिछले सालों के आंकड़ों की बात करें तो राजस्थान को मौसमी बीमारियों ने पूरे 12 महीने अपनी जद में लिया था. फिर चाहे स्वाइन फ़्लू हो या डेंगू, हर बीमारी मौत के रूप में कहर बरपा रही है.

सच्चाई ये है कि अकेले स्वाइन फ्लू ने इस साल में 208 जानें ली है, जो अपने आप में चिंता का विषय है. इसके साथ ही कांगो पॉजिटिव दो मरीजों की मौत ने एक बार फिर चिकित्सा विभाग को चिंता में डाल दिया है. एसएमएस ओपीडी में मरीजों की भीड़ को देखा जा सकता है.

हालांकि, सूबे के चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर काफी गंभीर है. स्वास्थ्य मंत्री लगातार प्रदेश भर में अधिकारियों से वीसी के जरिए संवाद किया और फील्ड में एक्शन प्लान बनाकर काम करने के निर्देश दे रहे है. वहीं, स्वाइन फ्लू के लक्षणों की बात करें तो तीन से चार दिन तक खांसी, जुखाम, बुखार, सांस लेने में कठिनाई, उल्टी, दस्त, पेटदर्द, बलगम में रक्त आना, नाखूनों में नीलापन ये सब इसके लक्षण हैं. 

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए भीड़-भाड़ वाले स्थान पर जाने से बचने की हिदायत दी जाती है. साथ ही, यदि किसी भी तरह के लक्षण नजर आए तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. वहीं, डेंगू लक्षणों की बात करें तो अचानक बुखार आना, सिर में आगे की तरफ तेज दर्द, आंखों के पीछे व आंखों के हिलने में दर्द, मांसपेशियों जोड़ों में दर्द, स्वाद का पता न चलना व भूख न लगता डेंगू होने का संकेत है. वैसे ही स्क्रब टाइफस में सर्दी लगकर अचानक बुखार आना, सिर में दर्द, शरीर के ऊपर दाने, आंखों में जलन, मांसपेशियों में दर्द, सूखी खासी, जैसे लक्षण नजर आते हैं. 

स्क्रब टाइफस बीमारी माइट या पिस्सू के काटने से फैलती है. ऐसे में जरूरी है कि खेतों में काम करते वक्त पूरी बाहों के कपड़े पहने, कीटों से बचाने वाली क्रीम त्वचा पर लगाए. घर या घर के आसपास चूहे ना होने दें क्योंकि, चूहों के शरीर पर वे कीट रहते है, जिनसे स्क्रब टाइफस बैक्टीरिया फैलते हैं.