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राजस्थान: अन्य सेवाओं से IAS में प्रमोशन के खिलाफ एक और मंत्री ने लिखा CM गहलोत को पत्र

मंत्री शाले मोहम्मद ने अपने पत्र में लिखा है कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा हमारे प्रदेश के कैडर की है लेकिन फिर भी आरएएस अधिकारियों का आइएएस में प्रमोशन बहुत देरी से हो रहा है.

राजस्थान: अन्य सेवाओं से IAS में प्रमोशन के खिलाफ एक और मंत्री ने लिखा CM गहलोत को पत्र
फाइल फोटो

जयपुर: आरसीए में कांग्रेस नेताओं का दंगल अभी पूरी तरह थमा भी नहीं है कि नौकरशाही को लेकर सरकार के मंत्री लामबंद होने लगे हैं. प्रतापसिंह खाचरियावास के बाद अब मंत्री शाले मोहम्मद ने अन्य सेवाओं से आइएएस में प्रमोशन नहीं करने की पैरवी की है. मंत्रियों की इस पैरवी ने अब इस ब्यूरोक्रेसी में नई बहस छेड़ दी है. भाजपा की तर्ज पर कांग्रेस सरकार ने अन्य सेवा से आइएएस में चयन प्रक्रिया का विरोध कर रहे आरएएस अधिकारियों के समर्थन में सरकार के काबिना मंत्री भी मैदान में कूद गए हैं. अन्य सेवा से आइएएस प्रमोशन मामला ने अब राजनीति तूल पकड़ लिया है. मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के बाद मंत्री शाले मोहम्मद ने मुख्यमंत्री गहलोत को पत्र लिखकर नियम विरूद्ध हो रही चयन प्रकिया को रुकवाने का आग्रह किया है. 

मंत्री शाले मोहम्मद ने अपने पत्र में लिखा है कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा हमारे प्रदेश के कैडर की है लेकिन फिर भी आरएएस अधिकारियों का आइएएस में प्रमोशन बहुत देरी से हो रहा है. शाले मोहम्मद ने लिखा कि आरएएस अधिकारी अपनी लंबी सेवा काल में भी सभी तरह के काम करते हैं. चाहे वो दीवानी का काम हो या न्याय, काश्तकारी, अधिनियम हो या फिर कानून व्यवस्था, इन सब कामों में आरएएस अधिकारी पारंगत होते हैं. लेकिन राज्य की अन्य सेवा के अधिकारियों को कनिष्ठ होने के बावजूद आरएएस अधिकारियों से पहले प्रमोशन मिल जाता है और उनको आरएएस अधिकारियों के ऊपर ही आइएएस बनाकर बैठा दिया जाता है. ऐसे में यह सिस्टम आरएएस अधिकारियों के साथ कहीं ना कहीं अन्याय करता है.

मोहम्मद ने सीएम गहलोत से मांग की है कि अन्य सेवाओं के अधिकारियों की आइएएस में प्रमोशन करने की प्रकिया को फिलहाल रोका जाए. भारतीय प्रशासनिक सेवा (भर्ती) नियम 1954 के नियम 8(2) में यह प्रावधान है कि विशेष परिस्थितियों में ही अन्य राज्य सेवा के अधिकारियों का चयन आईएएस में किया जा सकता है. 

कई राज्यों में इस प्रकिया से आइएएस में चयन बंद कर दिया गया है. शेष राज्यों में यह चयन केवल विशेष परिस्थितियां उत्पन्न होने और राज्य सेवा के अधिकारी नहीं मिलने पर ही किया जा सकता है. राजस्थान प्रशासनिक सेवा के 28 से 29 साल कार्यकाल पूरे कर चुके अधिकारी आइएएस बनने के इंतजार कर रहे हैं. वहीं 17 साल पूरे कर चुके अन्य राज्य सेवा के अधिकारी जो राजस्थान प्रशासनिक सेवा के कई बैच कनिष्ठ हैं को भी आइएएस में चयन करना नैसर्गिक न्याय के विरुद्ध है.

अन्य सेवा के अफसर को आइएएस में प्रमोशन के लिए डिप्टी कलेक्टर के समकक्ष पद पर रहने का नौ वर्ष का अनुभव होना चाहिए लेकिन दूसरी सेवाओं में डिप्टी कलेक्टर जैसी मजिस्ट्रेट के पावर की शक्तियों का प्रावधान ही नहीं है. इसलिए अन्य सेवा से यह अनुभव संभव ही नहीं है. 

डिप्टी कलेक्टर को केंद्र सरकार के तहत मजिस्ट्रेट की शक्तियां मिली हुई हैं, जो दूसरी सेवा में नहीं है. राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसर 29 साल की सेवा के बाद भी आरएएस से आइएएस नहीं बन पा रहे हैं. पिछली सरकारों ने 18 से 20 साल सेवा पूरी करने वाले अन्य सेवा के अफसरों का आइएएस में प्रमोशन करा गया है. इससे आरएएस अफसरों के भीतर आक्रोश पैदा हो रहा है. कई ऐसे अफसर अन्य सेवा से आइएएस बन गए, जो आरएएस अफसरों के अंडर में काम कर चुके हैं.