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राजस्थान: करवा चौथ पर दमकेगा खुशियों का चांद, 70 साल बाद बन रहा है शुभ योग

प्रेम और समर्पण के पर्व करवा चौथ पर गुरुवार को खुशियों का चांद दमकेगा. साथ ही इस दिन कई विशेष संयोग भी देखने को मिलेंगे. पति के बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए नवविवाहिताएं व सुहागिनें दिनभर निर्जला रहेंगी.

 राजस्थान: करवा चौथ पर दमकेगा खुशियों का चांद, 70 साल बाद बन रहा है शुभ योग
करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में काफी मायने रखता है. (प्रतिकात्मक तस्वीर)

जयपुर: करवा चौथ का व्रत महिलाओं के लिए बेहद खास होता है. यह पति-पत्नी के बीच आपसी प्यार और समझ को बढ़ाने वाला पर्व है. करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में काफी मायने रखता है.दोनो के बीच वैसे तो प्‍यार से बड़ा कोई उपहार नहीं है. लेकिन फिर भी इस शुभ अवसर पर एक-दूसरे को उपहार देकर अपना प्यार व्यक्त किया जाता है.

प्रेम और समर्पण के पर्व करवा चौथ पर गुरुवार को खुशियों का चांद दमकेगा. साथ ही इस दिन कई विशेष संयोग भी देखने को मिलेंगे. पति के बेहतर स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए नवविवाहिताएं व सुहागिनें दिनभर निर्जला रहेंगी. फिर शाम को सोलह शृंगार कर पूजा-अर्चना के बाद चांद को अघ्र्य देकर व्रत खोलेंगी. इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेंगी. इसके अलवा विभिन्न स्थानों पर सामूहिक उद्यापन के कार्यक्रम भी होंगे.वहीं, शादी के बाद पहला करवा चौथ मनाने वाली युवतियों के लिए यह पर्व खास रहेगा. ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 70 साल बाद करवा चौथ पर इस बार शुभ योग बन रहा है. पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए है यह व्रत और भी खास है.

इस दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखेंगी.रात में चांद को अर्घ देकर व्रत खोलेंगी.यह व्रत सूर्योदय से पहले शुरू होकर चांद निकलने तक रखा जाता है. शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पति- पत्नी का प्रेम को बढ़ाता है और पारम्परिक प्रेम का प्रतीक है.इस बार रोहिणी नक्षत्र के साथ मंगल का योग होना करवा चौथ को अधिक मंगलकारी बना रहा है. ज्योतिषियों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा में रोहिणी का योग होने से मार्कण्डेय और सत्यभामा योग इस करवा चौथ पर बन रहा है. इस दिन करवा चौथ माता की पूजा में उनकी कथा पढ़ना और सुनना भी जरूरी है.यह पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है. करवा चौथ पर सुहागिनों के लिए भोले नाथ की पूजा खास लाभकारी रहेगी.इसलिए उद्यापन ना कर भोले नाथ से पति की लंबी उम्र की दुआ मांगे. इस दिन जीवनसाथी को उपहार में देने के लिए युवाओं ने मोबाइल, साड़ी व आभूषण आदि की खरीदारी की है. वहीं खरीदारी के साथ ही महिलाओं ने बाजार में मेहंदी रचवाई.

करवा चौथ जिसे संकष्टी गणेश चतुर्थी भी कहा जाता है. कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करवा चौथ का व्रत किया जाता है. कार्तिक मास की चतुर्थी जिस रात रहती है उसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है. शाम के समय चांद को देखने के बाद अपने पति के दर्शन करने के बाद ही व्रत खोलती हैं. पूजा के लिए शाम के समय एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करके इसमें करवें रखती हैं और सभी महिलाएं चौथ गीत गाती हैं. पति के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना के लिए रखे जाने वाले करवा चौथ व्रत को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है और उनमें सजने संवरने की होड़ लगी हुई है. यही कारण है कि साड़ी, गहनों की दुकानों से लेकर ब्यूटी पार्लर तक में विवाहित और अविवाहित युवतियों की भीड़ लगी है.