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राजस्थान: ऑनलाइन मतदाता वेरिफिकेशन में भरतपुर अव्वल तो कोटा है फिसड्डी, पढ़ें खबर

अब नया ऐप भी पिछले पांच दिन से काम नहीं कर रहा है. बीएलओ का कहना है कि ऐप के होम पेज पर विधानसभा कोड, बीएलओ का नाम, भाग संख्या और मतदाता सूची आती है.

राजस्थान: ऑनलाइन मतदाता वेरिफिकेशन में भरतपुर अव्वल तो कोटा है फिसड्डी, पढ़ें खबर
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: नगर निकायों के चुनावों के लिए जिला निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाताओं का नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन के साथ ही सत्यापन की प्रक्रिया की जा रही है. राजस्थान में पहली बार पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत विभाग द्वारा बीएलओ से ऑनलाइन सत्यापन कार्य करवा रहा है. मतदाता सूचियों में सत्यापन का कार्य 1 सितंबर से शुरू किया गया लेकिन विभाग ने 4 सितंबर को पहला हाइब्रिड मोबाइल ऐप वर्जन-4 लॉन्च किया.

इसके बाद ही मतदाता सूचियों में सत्यापन का काम प्रारंभ हुआ. ऐप में कमियों के चलते निर्वाचन विभाग ने 25 दिन में ऐप के पांच नए वर्जन अपलोड किए लेकिन पांचों ही काम नहीं कर पाए. इसी परेशानी के चलते अब तक प्रदेश में 20 फीसदी वोटर का ही सत्यापन हो पाया. बीएलओ को 15 अक्टूबर तक सत्यापन पूरा कर देना है. इसके बाद जिला निर्वाचन विभाग को 18 अक्टूबर को नई वोटर लिस्ट जारी करनी है.

समय पर कार्य पूरा नहीं होने से विधानसभा क्षेत्रों में कार्य कर रहे बीएलओ परेशान है. शहर में वार्डों और ग्रामीण क्षेत्र में पंचायतों के परिसीमन से भी परेशानी बढ़ी है. जिला निर्वाचन अधिकारी जगरूप सिंह यादव का कहना है कि सत्यापन और नाम जोड़ने के लिए बीएलओ को निर्वाचन विभाग ने ऐप का उपयोग करने के निर्देश दिए हुए है. निर्वाचन विभाग को ऐप-4 से ऐप-8 तक के वर्जनों बार-बार शिकायत मिलने पर हाइब्रिड मोबाइल ऐप-9 को 25 सितंबर को लॉन्च किया.

अब नया ऐप भी पिछले पांच दिन से काम नहीं कर रहा है. बीएलओ का कहना है कि ऐप के होम पेज पर विधानसभा कोड, बीएलओ का नाम, भाग संख्या और मतदाता सूची आती है. ऐप खोलने पर मोबाइल में ट्राई एगेन लिखा आ रहा है. चुनाव आयोग ने सत्यापन का काम कराने के लिए नेशनल वोटर सर्विस पोर्टल (एनवीएसपी) की सुविधा मतदाताओं को भी दी है.

इस ऐप पर जाकर कोई भी मतदाता अपने परिवार की एंट्री कर सकता है. इसमें मतदाता बीएलओ का 90 प्रतिशत काम कर सकता है. इसके बाद सारी जानकारी बीएलओ के पास ऑनलाइन चली जाती है और फिर बीएलओ सम्बन्धित मतदाता के घर जाकर बची प्रक्रिया पूरी कर देते हैं लेकिन चिंता की बात यह है कि एनवीएसपी से एंट्री करने वाले मतदाताओं की संख्या राजस्थान में महज 0.11 प्रतिशत है. इसका मुख्य कारण प्रचार-प्रसार की कमी रही है.

सत्यापन के लिए बीएलओ हर घर में पहुंचे इसके लिए निर्वाचन विभाग हर बीएलओ के मोबाइल के जीपीएस सिस्टम की मॉनिटरिंग कर रहा है. इस कारण बीएलओ को हर घर में जाना जरूरी हो गया. कई लोगों की मृत्यु हो गई है. इसके बावजूद अभी तक मतदाता सूची से उनका नाम हटाया नहीं गया है. कई मतदाता सालों से पुराने स्थान पर नहीं रहते और दूसरे स्थान पर नाम जुड़वा लिया. 

बीएलओ का कहना है कि आनॅलाइन ऐप के काम नहीं करने पर अब वे वोटर से उनके वोटर आईडी की फोटो कॉपी लेकर सत्यापन कर रहे हैं. जिसमें समय काफी लग रहा है. दिनभर में 20 घरों से ज्यादा का सत्यापन नहीं हो पा रहा है. एक बीएलओ के पास 1200 से 1400 मतदाता है. बीएलओ का कहना है कि ऐप पर वोटर वेरिफिकेशन करवाया जा रहा है जबकि इसमें इतनी कमिया हैं कि बार-बार एक्जिट हो जाता है.

इसका प्रमाण यह है कि वर्जन 4 से शुरू हुआ यह ऐप अब तक वर्जन 9 तक पहुंच चुका है यानी लगभग हर पांच-सात दिन में नया वर्जन आ रहा है लेकिन समस्या वैसी की वैसी है. जिले सहित प्रदेशभर में निर्वाचन विभाग के निर्देश पर चल रहे मतदाता सत्यापन कार्यक्रम की गति कच्छुवा चाल से भी धीमी है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह कार्यक्रम गत एक सितम्बर से शुरू हुआ और आगामी 15 अक्टूबर तक पूरा होना है, लेकिन अब तक की जो प्रगति है, वह निराशाजनक है.

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 75 प्रतिशत काम पूरा होना था. वहां प्रदेश में अब तक मात्र 20 प्रतिशत और जयपुर जिले में 15.43 प्रतिशत काम हो पाया है. प्रदेश में जयपुर की स्थिति 22वें स्थान पर है, जबकि भरतपुर (47.59 प्रतिशत) पहले स्थान पर और कोटा (7.45 प्रतिशत) सबसे खराब स्थिति में है. इसी गति से चले तो आगामी 12 महीनों में काम पूरा होगा यह कहना मुश्किल है. खास बात यह है कि इसकी वजह बीएलओ न होकर चुनाव आयोग के ‘मोबाइल हाइब्रिड ऐप’ की तकनीकी खामी और इंटरनेर की समस्या है. जिसको लेकर आए दिन सैकड़ों शिकायतें निर्वाचन विभाग के पास पहुंच रही हैं, लेकिन समाधान नहीं हो पाया है.

मतदाताओं के भौतिक सत्यापन में आ रही परेशानी से जूझ रहे बीएलओ का कहना है कि चुनाव आयोग के अधिकारी एयर कंडीशनर कमरों में बैठकर ऐसे फरमान जारी कर देते हैं, जो धरातल पर व्यवहारिक नहीं होते. ऐप-4 सही काम नहीं कर रहा था और आयोग ने ऐप-5 थोप दिया. उसकी शिकायतें गई तो हाल ही में ऐप-9 लागू कर दिया है, लेकिन सबमें वही परेशानी आ रही है. बीएलओ का कहना है कि मुख्य रूप से सर्वर डाउन होने, ऐप नहीं चलने तथा जीपीएस लोकेशन ट्रेस करने में समस्या आ रही है, कई घर ऐसे हैं, जहां नेट बिलकुल नहीं पकड़ता, वहां काम करना मुश्किल है.