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राजस्थान: CMO बैठक में हुए फैसलों पर BJP का विरोध, कहा- सरकार का यू-टर्न लेना उठा रहा सवाल

सराफ ने कहा कि निकाय चुनाव को लेकर सरकार ने जिस तरह से यू-टर्न लिया है. वह कई सवाल उठाता है पूर्व मंत्री ने पूछा कि क्या सरकार मोदी की लहर से घबरा गई है

राजस्थान: CMO बैठक में हुए फैसलों पर BJP का विरोध, कहा- सरकार का यू-टर्न लेना उठा रहा सवाल
बीजेपी ने कैबिनेट के फैसले के बाद सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में पारित फैसलों को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए हैं. विपक्षी पार्टी के खेमे में सबसे ज्यादा चर्चा निकाय चुनाव में निकाय प्रमुख के परोक्ष चुनाव को लेकर है. तो साथ ही मीसा बन्दियों की पेंशन बंद करने को लेकर भी बीजेपी में हलचल है. पार्टी के लिए दोनों ही मुद्दों की अहमियत इससे भी समझी जा सकती है. कि इस पर अपना ऐतराज जताने के लिए बीजेपी ने कैबिनेट खत्म होने के थोड़ी ही देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेन्स बुला ली. बीजेपी ने परोक्ष चुनाव को लेकर पूछा कि सरकार पहले गलत थी या अब गलत फैसला लिया है?

सोमवार का दिन वैसे तो सप्ताह की शुरूआत होती है लेकिन प्रदेश में यह नए वाक-युद्ध के आगाज के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने पहला फैसला निकाय चुनाव को लेकर किया था. बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ कहते हैं कि तब सरकार ने अपने फैसले के समर्थन में तर्क देते हुए कहा था कि परोक्ष चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग होती है और पैसे का बेजा इस्तेमाल होता है लेकिन अब बदलाव के बाद सराफ ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए सरकार से ही पूछा कि उसके पुराने तर्क अब कहां गए?

सराफ ने कहा कि निकाय चुनाव को लेकर सरकार ने जिस तरह से यू-टर्न लिया है. वह कई सवाल उठाता है पूर्व मंत्री ने पूछा कि क्या सरकार मोदी की लहर से घबरा गई है या उसके पास अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने के बाद कोई ठोस मुद्दे नहीं बचे हैं? सराफ ने कहा कि अगर कांग्रेस चुनाव के तरीके में बदलाव करके जीतने की सोच रही है तो यह सिर्फ कांग्रेस की खुशफहमी है. उन्होंने कहा कि चाहे प्रत्यक्ष हो या परोक्ष या फिर कोई तीसरा तरीका भी सरकार खोज लाए तब भी निकाय चुनाव में पलड़ा बीजेपी का ही भारी रहने वाला है. 

सराफ बीजेपी का पलड़ा भारी रखने की बात तो कह रहे हैं लेकिन सरकार के नए फ़ैसले के बाद बीजेपी कैम्प के कुछ नेताओं में भी मायूसी दिख रही है. हालांकि, सराफ इस पर अनभिज्ञता जता रहे हैं लेकिन पार्टी के ही कुछ वरिष्ठ नेता ऐसे भी हैं जो प्रत्यक्ष चुनाव में खुद महापौर का चुनाव लड़ने का मन बना रहे थे.

बीजेपी ने कैबिनेट के फैसले के बाद सरकार के खिलाफ मोर्चा तो खोल दिया लेकिन पार्टी यह तय नहीं कर पा रही है कि वह सरकार के पिछले फैसले के खिलाफ थी या हालिया फ़ैसले के खिलाफ? दरअसल, पहले प्रत्यक्ष चुनाव के ऐलान पर विधानसभा में विरोध करने के बाद अब परोक्ष रूप से चुनाव पर मुहर लगाने के बाद भी बीजेपी के विरोधी रवैये के चलते यह सवाल उठे हैं. हालांकि पार्टी इन सवालों के बीच भी अपनी जीत का दावा ही कर रही है लेकिन इसका जवाब नहीं देती कि बीजेपी का विरोध पहले सही था या फिर इस बार सही है?