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राजस्थान: छात्राओं की साइकिल स्कीम को लेकर बीजेपी ने किया गहलोत सरकार पर तंज, कहा...

प्रदेश में कक्षा 8वीं पास करने के बाद 9वीं कक्षा में जाने वाली छात्राओं को सरकारी स्कूलों में निशुल्क साइकिल का वितरण होता है.

राजस्थान: छात्राओं की साइकिल स्कीम को लेकर बीजेपी ने किया गहलोत सरकार पर तंज, कहा...
छात्राओं में साइकिल वितरण नहीं होने के कारण बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है.

जयपुर: सत्ता बदलने के साथ ही पिछली सरकार द्वारा किए जाने वाले कार्यों को अक्सर रुकते हुए देखा होगा. हालांकि, लोक कल्याणकारी योजनाओं पर इसका असर बहुत कम होता है. इस बार यह धारणा भी गलत साबित होती हुई नजर आ रही है. सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के ड्रॉप आउट को रोकने साथ ही स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा छात्राओं को जोड़ने के लिए निशुल्क साइकिल वितरण योजना की शुरूआत की गई, लेकिन सत्ता बदलने के साथ ही साइकिलें रंग के ऐसे फेर में फंसी की तीन महीने बीत जाने के बाद भी छात्राओं को साइकिलों का वितरण नहीं हो पाया है. ऐसे में स्कूल जाने वाले इन छात्राओं को आर्थिक रूप के साथ ही शारीरिक रुप से भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

बता दें कि, प्रदेश में कक्षा 8वीं पास करने के बाद 9वीं कक्षा में जाने वाली छात्राओं को सरकारी स्कूलों में निशुल्क साइकिल का वितरण होता है. पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान शुरू की गई इस योजना को पिछली बीजेपी सरकार ने भी जारी रखा. जुलाई में सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों में साइकिल वितरण का कार्य शुरू कर दिया जाता था. वहीं, बीजेपी सरकार की ओर से इन साइकिलों का रंग बदलकर केसरिया कर दिया गया. जिसको लेकर कई सवाल भी खड़े हुए, लेकिन वर्ष 2018 में प्रदेश में सत्ता बदलने के साथ  ही साइकिलों के रंग बदलने की अटकले भी तेज हो गई थी. अब ये साइकिलें रंग के फेर में फंसकर रह गई हैं. सत्र शुरू होने के करीब तीन महीने के बाद भी छात्राओं तक साइकिलें नहीं पहुंची है.

करीब तीन महीनों से स्कूलों में साइकिल नहीं पहुंचने के सवाल पर शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा पूरी तरह से अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आए. शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि 'साइकिल की टैंडर प्रक्रिया में मंत्री स्तर का कोई काम नहीं होता. साइकिल खरीद के लिए कमेटी बहुत पहले ही बना दी गई है. समय पर बच्चियों को साइकिल वितरण कर दिया जाएगा'.

वहीं, दूसरी ओर साइकिल वितरण में देरी की वजह से अब छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कोई छात्रा स्कूल तक पहुंचने के लिए ऑटो का सहारा ले रही है तो कोई बस का. जिन छात्राओं के पारिवारिक आर्थिक हालात ठीक नहीं है वो करीब 5 से 6 किलोमीटर से पैदल चलकर स्कूल पहुंच रही है. जिसके चलते उनको काफी परेशानी हो रही हैं.

साथ ही, अब छात्राओं को होने वाली साइकिलों का वितरण नहीं होने पर अब शिक्षक संगठनों में भी खासा आक्रोश व्याप्त होने लगा है. शिक्षक नेता अंजनी कुमार शर्मा का करना है कि 'सत्ता के संघर्ष में लोक कल्याणकारी योजनाओं पर असर नहीं पड़ना चाहिए. ऐसे में साइकिल के रंग तय करने की वजह से करीब 3 महीने हो चुके हैं. साइकिल का वितरण नहीं हो पाया है. वहीं शिक्षक बृजेश कुमार का भी कहना है कि 'हर साल जुलाई के महीने में साइकिलों का वितरण हो जाता है. पूर्व सरकार ने जब साइकिलों का रंग बदला तो उस समय भी समय पर साइकिलों का वितरण हो गया था. लेकिन वर्तमान सरकार को देखकर लगता है की अभी साइकिल वितरण में करीब 2 से 3 महीने का और समय लग सकता है'.

बालाकिओं को समय पर साइकिल वितरण नहीं होने की वजह से अब शिक्षकों को चिंता सताने लगी है कि कहीं साइकिल वितरण में देरी की वजह से बालिकाओं का ड्रॉप आउट होना शुरू ना हो जाए. प्रिंसिपल तुलिका गर्ग का कहना है कि 'इस साल लक्ष्य से ज्यादा नामांकन हुआ है और इनमें बालिकाओं की संख्या ज्यादा है. ऐसे में अगर साइकिल वितरण में देरी होती है तो कहीं बालिकाएं के ड्रॉप आउट होने की समस्या खड़ी ना हो जाए. इसका कारण ये है कि कई छात्राएं बहुत दूर से आती हैं और ऐसी छात्राएं बस और ऑटो का किराया वहन नहीं कर पाती हैं'.

तीन महीनों से बालिकाओं को साइकिल वितरण नहीं होने के चलते अब पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी वर्तमान सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए नजर आ रहे हैं. पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि 'सरकार को बने एक साल हो गया है और शिक्षा मंत्री अभी पुस्तकों में परिवर्तन करने और साइकिलों के रंग से ही बाहर नहीं निकल पाए हैं. ऐसे में स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं को कितनी समस्या का सामना करना पड़ रहा इस और शिक्षा विभाग का ध्यान ही नहीं है'.

बहरहाल, सरकार चाहे किसी भी पार्टी की हो,,लेकिन जब लोक कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होती है तो इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ता है. वहीं, इस बार प्रदेश की छात्राओं को इसका सामना करना पड़ रहा है. सरकार जहां एक ओर जल्द साइकिल वितरण का दावा कर रहा है तो वहीं दूसरी ओर अभी तक साइकिलों का रंग ही तय नहीं हो पाया है. ऐसे में लगता नहीं है कि करीब 1 से 2 महीनों तक इन साइकिलों का वितरण हो पाएगा.