निकाय चुनाव 2019: बाड़मेर में गठबंधन कर सकती है BJP और RLP, बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें

पश्चिमी राजस्थान में आरएलपी बाड़मेर जिले में जबरदस्त तरीके से मजबूत स्थिति में विधानसभा चुनाव में नजर आई थी. अब वह नगर निकाय चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ने की तैयारी कर रही है.

निकाय चुनाव 2019: बाड़मेर में गठबंधन कर सकती है BJP और RLP, बढ़ सकती है कांग्रेस की मुश्किलें
फाइल फोटो

बाड़मेर: राजस्थान में नगर निकाय चुनाव को लेकर मंगलवार को गहलोत सरकार ने मेयर चुनने का फैसला बदल दिया. अब अप्रत्यक्ष रूप से मेयर को चुना जाएगा. वहीं चुनावों को लेकर सभी पार्टियों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं. गहलोत सरकार लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब नगर निकाय चुनाव को जीतने के लिए पूरा जोर लगा रही है. इसी कड़ी में आज बाड़मेर में प्रभारी और कैबिनेट मंत्री बीडी कल्ला नगर निकाय चुनाव को लेकर रणनीति तैयार कर रहे हैं. 

वहीं बीजेपी ने भी प्रत्याशियों की खोजबीन शुरू कर दी है. तो आरएलपी बीजेपी गठबंधन के साथ नगर निकाय चुनाव लड़ सकती है. वहीं लोकसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद कांग्रेस के लिए नगर निकाय चुनाव की राह आसान नहीं है क्योंकि बीजेपी नगर निकाय चुनाव में भी आरएलपी के साथ गठबंधन का चुनाव लड़ सकती है. इसको लेकर आरएलपी भी अपनी तैयारी करती नजर आ रही है. फैसले के बाद कांग्रेस आरएलपी और बीजेपी के निशाने पर है.

राजस्थान में पहले चरण में 52 निकायों में नवंबर-2019 में चुनाव प्रस्तावित हैं. इसको लेकर आचार संहिता अब इस महीने में कभी भी लग सकती है. बाड़मेर में बालोतरा और बाड़मेर शहर नगर निकाय चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने अपने प्रत्याशियों की खोजबीन का कार्य शुरू कर दिया है. वहीं बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है. 

पश्चिमी राजस्थान में आरएलपी बाड़मेर जिले में जबरदस्त तरीके से मजबूत स्थिति में विधानसभा चुनाव में नजर आई थी. अब वह नगर निकाय चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन में लड़ने की तैयारी कर रही है. बाड़मेर के आरएलपी नेता उदाराम मेघवाल के अनुसार कांग्रेस को बाहर रखने के लिए आरएपलपी बीजेपी के साथ गठबंधन कर नगर निकाय चुनाव लड़ेंगी. हालांकि, यह फैसला उपचुनाव के बाद किया जाएगा लेकिन यह फैसला हो चुका है कि कांग्रेस को बाहर रखने के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं और इसके लिए हमने तैयारी शुरू कर दी है.

वहीं बाड़मेर शहर में लगातार दो बार कांग्रेस का बोर्ड बनाने वाले विधायक मेवाराम जैन का कहना है कि इस बार हम हेट्रिक लगाने की तैयारी कर रहे हैं. इसमें कोई भी किंतु परंतु नहीं है. सरकार ने जो पार्षद से चेयरमैन बनाने का फैसला किया हुआ अच्छा किया है. हमने प्रत्याशियों की खोजबीन शुरू कर दी है. 10 दिन पहले ही हमने मीटिंग बुलाकर पर्यवेक्षक वर्डवाइज नियुक्त कर दिए हैं. हमारी तैयारी नगर निकाय चुनाव को लेकर पूरी है.

अशोक गहलोत सरकार के लिए नगर निकाय चुनाव किसी परीक्षा से कम नहीं है क्योंकि सरकार का लोकसभा चुनाव में तो सूपड़ा साफ हो गया अब अगर नगर निकाय चुनाव में भी ऐसी हालत हो गई तो कांग्रेस में आपसी फूट बढ़ सकती है. कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है लोकसभा चुनाव की तरह ही उप चुनावों की तरह ही पश्चिमी राजस्थान में हनुमान बेनीवाल के साथ आरएलपी और बीजेपी का गठबंधन जो कि नगर निकाय चुनाव में हो जाता है तो कांग्रेस की नींद उड़ सकती है.