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राजस्थान: डेंगू और निमोनिया से पीड़ित बच्चे की डॉक्टरों ने इस तकनीक से बचाई जान, पढ़ें खबर

हॉस्पिटल के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव बंसल ने बताया कि बीते 19 सितंबर को 11 साल के प्रिंस को गंभीर डेंगू के चलते सवाई माधोपुर से जयपुर रैफर किया गया था.

राजस्थान: डेंगू और निमोनिया से पीड़ित बच्चे की डॉक्टरों ने इस तकनीक से बचाई जान, पढ़ें खबर

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सकों की टीम ने डेंगू की गंभीर स्थिति हो जाने के बाद भी नई तकनीक से 11 साल के प्रिंस को नई जिंदगी दी है. दरअसल, प्रिंस के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था. जिसके बाद हालात इतने खराब हो गए कि कृत्रिम सांस देने के लिए जब उसे वेंटीलेटर पर लगाया गया तो वो भी फेल हो गया. 

ऐसे में डॉक्टरों ने उसे वीवी एक्मो तकनीक द्वारा कृत्रिम फेफड़ों की मदद से छह दिन के लगातार प्रयास द्वारा बचा लिया गया. जयपुर शहर के निजी हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने नवीनतम तकनीक द्वारा अति गंभीर स्थिति में मरीज को बचाया. डॉक्टर्स ने दावा किया है कि वीवी एक्मो तकनीक द्वारा बच्चे को डेंगू की गंभीर स्थिति से बचाने का प्रदेश में पहला और देश में दूसरा मामला है. प्रिंस के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी इसलिए अस्पताल ने मानवता के नाते इलाज खर्च में 2 लाख रूपये की छूट भी दी है.

क्या है वीवी एक्मो तकनीक
विनो वीनस एक्मो तकनीक कृत्रिम फेफड़ों की तरह काम करती है. इसमें मरीज की नसों से खून खींचकर उसे मशीन द्वारा ऑक्सीफाई किया जाता है और फिर से नसों में डाला जाता है. इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है.

हॉस्पिटल के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव बंसल ने बताया कि बीते 19 सितंबर को 11 साल के प्रिंस को गंभीर डेंगू के चलते सवाई माधोपुर से जयपुर रैफर किया गया था. उसे एक हफ्ते से बुखार, पेट दर्द, उल्टी, शरीर में सूजन और सांस में तेजी की समस्या हो रही थी. उसकी डेंगू एनएस-1 जांच पॉजिटिव आई और प्लेटलेट्स भी 20 हजार तक आ गईं. जिससे उसके फेफड़ों में निमोनिया हो गया. जब प्रिंस की और जांचे की गई तो पता चला कि उसके दोनों फेफड़ों में हवा अंदर नहीं जा रही थी. जिससे उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लग गई थी. जब मरीज के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया तो उसे नाक के माध्यम से नॉन इनवेंसिव वेंटीलेटर लगया गया लेकिन मशीन की पूरी क्षमता के बाद भी उसकी श्वास की 94 प्रतिशत जरूरत ही पूरी हो रही थी. वेंटीलेटर फेल होने के बाद उसे वीवी एक्मो पर ले जाने का प्रयास किया जाने लगा.

डेंगू के मरीज को कहीं से भी रक्तस्त्राव होने का खतरा होता है. ऐसे में वीवी एक्मो तकनीक में इस्तेमाल किए जाने वाले कैथेटर लगाने से प्रिंस को आंतरिक रक्तस्त्राव होने का बहुत खतरा था लेकिन प्रिंस के केस में ऐसा नहीं हुआ. छह दिन तक वीवी एक्मो तकनीक पर निर्भर रहने के बाद जब डॉक्टर्स ने उसके फेफड़ों को फिर से काम करने की स्थिति में पाया तो कृत्रिम श्वास प्रणाली हटा ली गई और अब प्रिंस बिल्कुल स्वस्थ है. डेंगू से गंभीर पीड़ित किसी बच्चे को वीवी एक्मो तकनीक द्वारा बचाए जाने का, यह प्रदेश में पहला मामला है.