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राजस्थान: IB की रिपोर्ट बढ़ा रही पाक विस्थापित नागरिकों का दर्द, जानिए पूरा मामला

प्रदेश के 11 जिलों से 809 विस्थापितों की आईबी रिपोर्ट पेंडिंग बताई जा रही है.

राजस्थान: IB की रिपोर्ट बढ़ा रही पाक विस्थापित नागरिकों का दर्द, जानिए पूरा मामला
गृह विभाग ने जनवरी से अब तक 132 को नागरिकता दी है. (फाइल फोटो)

विष्णु शर्मा, जयपुर: राजस्थान (Rajasthan) में बरसों से भारतीय नागरिकता (Indian Citizenship) की आस लगाए बैठे पाक हिंदू अल्पसंख्यकों (Pakistani Hindu Nationals) का दर्द इंटेलीजेंस ब्यूरो(Intelligence Bureau) की रिपोर्ट बढ़ा रही है. आईबी रिपोर्ट के कारण प्रदेश के 809 पाक विस्थापितों की नागरिकता अटकी हुई है. आईबी रिपोर्ट मिलते ही इन विस्थापितों को भारतीय नागरिकता दे दी जाएगी.

राजस्थान के करीब एक दर्जन जिलों में पाक हिंदू विस्थापित रह रहे हैं. यहां आने के बाद भी दुर्भाग्य इनका पीछा नहीं छोड़ रहा है. पाकिस्तान से यहां रहने के साल साल बाद ये अल्पसंख्यक भारतीय नागरिकता के लिए पात्र होते हैं. भारतीय नागरिकता की पात्रता मिलने के बाद अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करते हैं. आवेदन करने के बाद भी आईबी रिपोर्ट सहित विभिन्न कारणों से उनकी नागरिकता अटका दी जाती है. 

आईबी रिपोर्ट के कारण आ रही रुकावट
हाल ही केंद्रीय गृहमंत्रालय ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर जानकारी मांगी कि राजस्थान में कितने पाक विस्थापितों की आईबी रिपोर्ट पेंडिंग चल रही है. इसके बाद गृह विभाग ने जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर आंकड़े जुटाए. प्रदेश के 11 जिलों से 809 विस्थापितों की आईबी रिपोर्ट पेंडिंग बताई गई.

प्रदेश में नागरिकता के 809 मामले पेंडिंग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 11 जिलों के 809 मामलों में आईबी रिपोर्ट पेंडिंग है. जिसमें सबसे ज्यादा 673 मामले जोधपुर में पेंडिंग है. इसके अलावा जयपुर में 63 मामले पेंडिंग है. वहीं, उदयपुर में 2, बाड़मेर में 5, अलवर में 4, भीलवाड़ा में 9, अजमेर में 8, पाली में 21, जैसलमेर में 2, जालौर में 19 और बूंदी में 3 प्रकरण पेंडिंग है.

जानिए क्या है प्रक्रिया
आपको बता दें कि पाक विस्थापित नागरिक(Displaced citizens of Pakistan) सहित किसी भी विदेशी नागरिक को भारतीय नागरिकता लेनी है तो उसके लिए आईबी क्लीरियंस रिपोर्ट जरूरी होती है. हालांकि भारत में लम्बी अवधि में ठहराव के लिए एलटीवी अर्थात लोंग टर्म वीजा की जरूरत होती है, जिसे गृहमंत्रालय(Ministry of Home Affairs) समय समय पर बढ़ाता रहता है. आईबी क्लीरियेंस रिपोर्ट के कारण ही भारतीय  नागरिकता अटक जाती है. आईबी के पास सालभर से भी ज्यादा समय से पाक विस्थापितों की रिपोर्ट पेंडिंग चल रही है. 

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इन वजहों से भी होती है परेशानी
जानकारों का कहना है कि कई बार विस्थापित परिवार(Displaced Family) आवेदन में दिए गए पते से दूसरी जगह शिफ्ट कर जाता है, तो आईबी निगेटिव बताकर रिपोर्ट सौंप देती है. आईबीकर्मी गारंटर को नहीं पूछते कि विस्थापित परिवार कहां है, ऐसे में नागरिकता का मामला पेंडिंग चल रहा है.  

राजस्थान में पाक हिंदू विस्थापितों को नागरिकता देने का काम ढाई साल पहले शुरू किया गया था. जोधपुर, जयपुर, जैसलेमर में जिला कलेक्टर विस्थापितों को नागरिकता देते हैं, वहीं अन्य जिलों के विस्थापितों को गृह विभाग स्तर से नागरिकता दी जाती है. जोधपुर से एक हजार से ज्यादा विस्थापितों को नागरिकता दी जा चुकी है, वहीं गृह विभाग ने जनवरी से अब तक 132 को नागरिकता दी  है.