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राजस्थान: उपचुनाव में होगी कांग्रेस की अग्निपरीक्षा, 2 सीटों पर दर्जनों दावेदार

प्रदेश में सत्तारूढ कांग्रेस विधानसभा चुनाव में ये दोनों सीटें नहीं जीत पाई थी और यहीं वजह है कि वो अब इन दोनों सीटों को जीतकर विधानसभा में भी अपनी स्थिति मजबूत करना चाह रही है.

राजस्थान: उपचुनाव में होगी कांग्रेस की अग्निपरीक्षा, 2 सीटों पर दर्जनों दावेदार
राजस्थान में दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 21 अक्टूबर को होगा.

जयपुर: राजस्थान में दो विधानसभा खींवसर और मंडावा सीट पर उपचुनाव की तारीखों का ऐलान हो गया है. लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव ना केवल प्रतिष्ठा का विषय होंगे बल्कि इन चुनाव के परिणाम निकाय चुनाव के नतीजों पर भी असर डालेंगे.

बता दें कि, राजस्थान की 2 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. चुनाव आयोग ने राजस्थान की खींवसर और मंडावा विधानसभा सीट के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है. राजस्थान में इन दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 21 अक्टूबर को होगा. नतीजे 24 अक्टूबर को आएंगे. 

गौरतलब है कि, रालोपा प्रमुख और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल और भाजपा नेता नरेंद्र खींचड़ के झुंझुनूं सांसद बनने से खाली हुई खींवसर और मंडावा पर उपचुनाव का कार्यक्रम आज घोषित कर दिया गया है. प्रदेश में सत्तारूढ कांग्रेस विधानसभा चुनाव में ये दोनों सीटें नहीं जीत पाई थी और यहीं वजह है कि वो अब इन दोनों सीटों को जीतकर विधानसभा में भी अपनी स्थिति मजबूत करना चाह रही है. इन दोनों सीटों पर होने वाले उपचुनाव कांग्रेस पार्टी के लिए किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है.

दोनों ही सीटों पर कांग्रेस की ओर से जिताऊ उम्मीदवार की तलाश के लिए पर्यवेक्षकों को क्षेत्र में जल्द भेजा जाएगा. कई नेताओं ने दोनों ही विधानसभा सीटों पर दावेदारों ने अभी से ही सक्रियता बढ़ा दी है. खींवसर विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो कांग्रेस में यहां से पूर्व मंत्री हरेंद्र मिर्धा, पूर्व सांसद ज्योति मिर्धा और इस सीट से विधानसभा का चुनाव हार चुके सवाई सिंह टिकट की दौड़ में शामिल है. इसके अलावा आधा दर्जन ओर नेताओं के नाम भी चर्चा में है. 

वहीं, मंडावा विधानसभा क्षेत्र में पूर्व विधायक रीटा चौधरी की दावेदारी सबसे मजबूत है. रीटा चौधरी को विधानसभा चुनाव में महज 2,346 से हार का सामना करना पड़ा था. इसके अलावा यहां पूर्व पीसीसी चीफ डॉ चंद्रभान का नाम भी चर्चाओं में है. 

विपक्ष में रहने के दौरान कांग्रेस को उपचुनाव में जीत मिली थी लेकिन अब सत्ता और संगठन के तालमेल से जूझ रही कांग्रेस के लिए यह दोनों उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. इस चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए कांग्रेस को सत्ता और संगठन का तालमेल फिर से दिखाना होगा. इन चुनावों के परिणामों का एक बड़ा असर निकाय चुनाव पर भी पड़ेगा.