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निकाय चुनाव से पहले बदलाव कांग्रेस के लिए बना गले की फांस, जानिए पूरा मामला

इस बार निकाय चुनाव में सरकार और सत्ताधारी पार्टी क्या करें-क्या न करें की स्थिति में दिख रही है.

निकाय चुनाव से पहले बदलाव कांग्रेस के लिए बना गले की फांस, जानिए पूरा मामला
इस बार प्रदेश के 52 निकायों में चुनाव हो रहे हैं. (फाइल फोटो साभार: DNA)

जयपुर: निकाय प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव को लेकर गहलोत सरकार ने जो बदलाव साल की शुरूआत में किया है, वो अब गले की फांस बन गया है. बीते साल विधानसभा चुनाव में जीत से उत्साहित कांग्रेस का इस साल हुए आम चुनाव दम निकल गया. लेकिन एक बार फिर निकाय चुनाव में अपनी मजबूत धमक कांग्रेस दिखाना चाहती है. लेकिन इस बार निकाय चुनाव में सरकार और सत्ताधारी पार्टी क्या करें-क्या न करें की स्थिति में दिख रही है. 

सरकार बदलते ही बदले नियम
दरअसल राजस्थान में कांग्रेस सरकार बनते ही सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव पर मुहर लगाते हुए राजस्थान म्यूनिसिपल एक्ट इलेक्शन रूल्स-1994 में बदलाव किया था. लेकिन अनुच्छेद-370 और 35-ए को लेकर आ रही प्रतिक्रिया के बीच सरकार के कदम ठिठकते नजर आ रहे हैं. दरअसल विचार इस बात पर हो रहा है कि क्या सरकार अपने ही फ़ैसले को पलटे या नहीं.

52 निकायों के होने जा रहे हैं चुनाव
हालांकि नवम्बर में होने वाले निकाय चुनाव में इस बार प्रदेश के 52 निकायों में चुनाव हो रहे हैं. लेकिन इन चुनावों की तारीख के ऐलान से पहले सत्ताधारी पार्टी में हलचल मच गई है. पीसीसी में हुई बैठक में कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने इस विषय को रखा. 

इन मुद्दों पर बीजेपी को मिल सकता है माइलेज
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 और धारा 35-ए से हटाने के बाद बीजेपी इन मुद्दों पर माइलेज ले रही है. लिहाजा निकाय प्रमुखों के प्रत्यक्ष चुनाव में कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ सकता है. 

सीएम ने सौंपी है मंत्री को जिम्मेदारी
पार्टी नेताओं के इस फीडबैक के बाद इस एक्ट में बदलाव किया जाए या नहीं इसका परीक्षण करने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूडीएच मंत्री को दी है. ऐसे में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ी हलचल को देख कर लगता है कि सरकार निकाय प्रमुखों के प्रत्यक्ष निर्वाचन को लेकर चुनावी तारीखों के ऐलान और नोटिफिकेशन से पहले यू टर्न मार सकती है.