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राजस्थान: प्रोटोकॉल के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष को नहीं मिल रही चीफ जस्टिस के बराबर सुरक्षा

विधानसभा सचिव दिनेश कुमार जैन ने इसी बात पर नाराजगी जाहिर की है कि प्रोटोकॉल में जब चीफ जस्टिस, विधानसभा अध्यक्ष के बराबर है तो दोनों की सुरक्षा व्यवस्था भी समान होनी चाहिए. 

राजस्थान: प्रोटोकॉल के बाद भी विधानसभा अध्यक्ष को नहीं मिल रही चीफ जस्टिस के बराबर सुरक्षा
विधानसभा सचिव ने रिव्यू कमेटी के आदेश में विधानसभा अध्यक्ष को दी गई सुरक्षा व्यवस्था में चूक बताई है.

जयपुर: प्रदेश में प्रोटोकॉल समान होने के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष को चीफ जस्टिस के बराबर सुरक्षा नहीं दी जा रही है. सुरक्षा व्यवस्था में इसी कमी को लेकर विधानसभा सचिवालय ने नाराजगी जाहिर की है. विधानसभा सचिव दिनेश जैन ने मुख्य सचिव डीबी गुप्ता को पत्र लिखकर कड़ा एतराज जताया है.

ये हैं नियम
दरअसल, प्रदेश में रिव्यू कमेटी की अनुशंषा पर प्रतिरक्षित व्यक्तियों को सुरक्षा मुहैया करवाई जा रही है. रिव्यू कमेटी की अनुशंषा पर दी जा रही सुरक्षा की समीक्षा कर सरकार को रिपोर्ट दी जाती है. सुरक्षा को कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के आधार पर बांटा गया है. ऐसे में राज्यपाल और मुख्यमंत्री को जेड प्लस सुरक्षा दी गई है. विधानसभा अध्यक्ष को वाई कैटेगरी की सुरक्षा, हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी वाई कैटेगरी की सुरक्षा दी जाती है.
 
इस बात को लेकर उठे हैं सवाल
सामान्य प्रशासन विभाग की 31 अक्टूबर 1985 को जारी अधिसूचना में चीफ जस्टिस और विधानसभा अध्यक्ष को बराबर रखा गया है. विधानसभा सचिव दिनेश कुमार जैन ने इसी बात पर नाराजगी जाहिर की है कि प्रोटोकॉल में जब चीफ जस्टिस, विधानसभा अध्यक्ष के बराबर है तो दोनों की सुरक्षा व्यवस्था भी समान होनी चाहिए. विधानसभा सचिव के मुताबिक दोनों की सुरक्षा व्यवस्था में भिन्नता होना खेदजनक है.  

आपको बता दें कि विधानसभा सचिव ने रिव्यू कमेटी के आदेश में विधानसभा अध्यक्ष को दी गई सुरक्षा व्यवस्था में चूक बताई है. साथ ही विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से इस मामले को गंभीरता से लेने की बात कही है. विधानसभा सचिव ने एसीएस गृह से भी टेलीफोन पर बात कर इस ओर ध्यान दिलाया है. फिलहाल मामला विचाराधीन है.