राजस्थान: दिव्यांग अधिवक्ताओं को मिल सकेगा नोटरी पब्लिक में 5 फीसदी आरक्षण

नोटरी अधिनियम 1952 केंद्र सरकार का अधिनियम है और नोटेरी नियम 1956 भी केंद्र सरकार द्धारा जारी नियम है. इसका संशोधन केंद्र सरकार द्धारा ही किया जा सकता है.

राजस्थान: दिव्यांग अधिवक्ताओं को मिल सकेगा नोटरी पब्लिक में 5 फीसदी आरक्षण

जयपुर: राजस्थान में दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए विशेषयोग्यजन न्यायालय ने बड़ा निर्णय लिया है. कोर्ट ने ये माना है कि दिव्यांग अधिवक्ताओं को नोटरी पब्लिक के पद पर 5 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए. नोटरी पब्लिक के पद पर अधिवक्ताओं की नियुक्ति विधि विभाग के अंतगर्त की जाती है लेकिन दिव्यांग अधिवक्ताओं के आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है. 

ऐसी परिस्थिति में कोर्ट ने दिव्यांग अधिवक्ताओं को नोटरी पब्लिक के पदों पर नियुक्ति संबंधी प्रावधान के प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं क्योंकि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम में इस तरह का प्रावधान नहीं है. अब केंद्र सरकार के नियमों में संशोधन के बाद दिव्यांग अधिवक्ताओं को नोटरी पब्लिक के पदों पर आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. परिवादी हेमंत गोयल ने विशेषयोग्यजनों के हितों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट में याचिका लगाई थी.

नोटरी अधिनियम 1952 केंद्र सरकार का अधिनियम है और नोटेरी नियम 1956 भी केंद्र सरकार द्धारा जारी नियम है. इसका संशोधन केंद्र सरकार द्धारा ही किया जा सकता है. हालांकि, नोटेरी के पद पर दिव्यांग, एससी, एसटी, ओबीसी और दिव्यांग अधिवक्ताओं को 3 साल की अनुभव में छूट प्रदान की गई है लेकिन दिव्यांग अधिवक्ताओं के लिए आरक्षण का कोई भी प्रावधान नहीं है. अब उम्मीद यही जताई जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही नियमों में संशोधन कर आदेश जारी करेगा. परिवादी हेमंत गोयल का कहना है कि कोर्ट ने माना है कि दिव्यांग अधिवक्ताओं को आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए.

कोर्ट के निर्णय के बाद दिव्यांग अधिवक्ताओं में उम्मीद जगी है कि अनुभव छूट के साथ साथ उन्हें आरक्षण मिल सकेगा. दिव्यांगों की तरफ से ये मांग इसलिए उठी थी क्योंकि दिव्यांगजन बिना किसी भागदौड़ के बैठे बैठे नोटरी पब्लिक का कार्य कर सकते हैं. इसमें दिव्यांग अधिवक्ताओं को अधिक परेशानी नहीं होगी. परिवादी हेमंत गोयल का कहना है कि कोर्ट ने माना है कि दिव्यांगजन आरक्षण अधिनियम 2016 की भावना दिव्यांगजनों की समाज में पूर्ण और प्रभावी भागीदार के आधार पर अधिवक्ताओं के लिए ये कार्य उचित है.

ऐसे में अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार कब तक नियमों में संशोधन करती है और कब दिव्यांगों को और संबंल प्रदान करने के लिए ये फैसला लेगी. यदि ऐसा हुआ तो बड़ी संख्या में केवल राज्य के नहीं, बल्कि पूरे देशभर के दिव्यांगों को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा.