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राजस्थान: वित्त आयोग ने नगर निकायों पर जताई चिंता, कहा कुछ ऐसा...

सरकार की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्य में नगरीय स्थानीय निकायों के जवाबदेही तंत्र और वित्तीय रिपोर्टिग लगातार कमजोर बने हुए हैं.

राजस्थान: वित्त आयोग ने नगर निकायों पर जताई चिंता, कहा कुछ ऐसा...
15वें केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान में चार दिवसीय दौरा किया था

नई दिल्ली: 15वें वित्त आयोग ने राजस्थान में पंचायती राज संस्थानों (पीआरआई) और नगरीय स्थानीय निकायों (यूएलबी) की जवाबदेही तंत्र और वित्तीय रिपोर्टिग को लेकर रविवार को चिंता जाहिर की.

सरकार की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्य में नगरीय स्थानीय निकायों के जवाबदेही तंत्र और वित्तीय रिपोर्टिग लगातार कमजोर बने हुए हैं. बयान में कहा गया है, 'वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान मात्र 68 प्रतिशत यूएलबी खाते सत्यापित किए गए हैं'.

सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि बड़ी बात यह कि धन को रोके रहना और बैंक खातों की बहुलता यूएलबी में चिंता के प्रमुख क्षेत्र हैं, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो रही है. 'मार्च 2018 तक म्युनिसिपल फंड में 1,652 करोड़ रुपये बिना उपयोग के क्लोजिंग बैलैंस के रूप में पड़े हुए थे'.

गौरतलब है कि 15वें केंद्रीय वित्त आयोग ने राजस्थान में चार दिवसीय दौरा किया. आयोग ने इस दौरे में चार बातों पर अधिक फोकस देने की बात कही, इसमें जल संकट का प्रभावी समाधान, पर्यटन संभावनाओं में इजाफा, कर्ज के भार में कमी और शिक्षण प्रक्रिया में सुधार की बात कही. हालांकि आयोग गहलोत सरकार के कामकाज पर आयोग सदस्य संतुष्ट नजर आया.

केंद्रीय वित्त आयोग ने जयपुर में दो दिन गांव, शहर, पंचायत, निकाय, जनप्रतिनिधि, सरकारी अधिकारियों और मंत्रीमंडल के सदस्यों से चर्चा कर राजस्थान की मांगों, आवश्यकताओं, खामियों और विकास के नए रास्तों पर चर्चा की. आज मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से साथ राजस्थान के विकास को लेकर खास मंत्रणा हुआ. मुख्य सचिव ने प्रदेश की डिमांड आयोग सदस्यों के सामने रखी.