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राजस्थान: उड़ती धूल मिट्टी बनी लोगों के लिए मुसीबत, TB-सिलिकोसिस के मरीजों की बढ़ रही संख्या

नारेहेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इस तरह के मरीजों की दाताद रोजना बढ़ती जा रही है. जिसको लेकर यहां के चिकित्सक भी चिंतित हैं. 

राजस्थान: उड़ती धूल मिट्टी बनी लोगों के लिए मुसीबत, TB-सिलिकोसिस के मरीजों की बढ़ रही संख्या
राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इस तरह के मरीजों की दाताद रोजना बढ़ती जा रही है.

अमित यादव, कोटपूतली: नारेहेड़ा कस्बे के पास चोटिया मोड़ पर भारी मात्रा में क्रेशर जोन है जिसकी वजह से यहां 24 घंटे धूल मिट्टी का गुब्बार उड़ता रहता है. जिससे नारेड़ा चोटिया के आसपास के ग्रामीण लोग काफी परेशान हैं. पिछले 5 सालों से नारेड़ा चोटिया सहित आसपास के क्षेत्रों के लोग उड़ती धूल की वजह से हर तीसरा व्यक्ति खासी से पीड़ित है. 

चोटिया क्रेशर जोन होने की वजह से क्रेशर से उड़ती धूल से ग्रामीण दमा खांसी एलर्जी जैसे रोगों से पीड़ित देखे जा सकते हैं. आंकड़ों पर नजर डालें तो 2018 में टीबी रोग के 57 मरीज 2019 में 41 मरीज टीबी के नारेहेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रजिस्टर्ड हैं तथा कुछ लोग कोटपुतली और निजी हॉस्पिटल में भी अपना इलाज करवा रहे हैं.

सिलिकोसिस से मीणा की ढाणी और बंजारों की ढाणी में पिछले दिनों 2 मौते हो चुकी हैं. वहां से गुजरने वाले वाहनों और क्रेशर से उड़ती धूल को लेकर चोटिया और नारेड़ा के ग्रामीणों ने कई बार धरना प्रदर्शन भी किया लेकिन सरकारे बदलती गईं अधिकारी बदलते गए लेकिन ग्रामीणों को आज तक सिर्फ आश्वासन ही मिला किसी भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी ने भी इस क्षेत्र की ओर कोई ध्यान नहीं दिया. जिससे आज व्यापारी वर्ग को व्यापार करने में भी परेशानी हो रही है. जिससे ग्रामीण लोग भी काफी परेशान हैं अगर समय रहते हुए इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में स्थिति और भी भयानक हो जाएगी.

किसी भी क्षेत्र के लिए अगर कोई भी जनप्रतिनिधी और प्रशासनिक अधिकारी किसी भी प्रकार से क्षेत्र के लोगों पर ध्यान नहीं देते तो ऐसी ही हालत बनते नजर आएंगे. उड़ती धूल मिट्टी से यहां पर सैकड़ो के लगभग लोगों में टीबी और सिलोकोशिस की बीमारी फैलती जा रही है. स्थानीय निवासी पंचायत समिति सदस्य सुभाष मीणा ने इसके बारे में बताया. साथ में स्थानीय निवासी एएनएम शोभा ने बताया हमने यहां हर घर से सर्वे किया है. हर घर में खासी, जुकाम और टीबी से मरीज पीड़ित हैं जिसमे महिला बच्चे बुजर्ग सभी शामिल हैं.

इस विषय पर जी मीडिया ने जीरो ग्राउंड पर हर घर मे जाकर देखा तो हर घर मे एक दो लोग बीमारी से पीड़ित हैं और सभी पीड़ित परिवार लम्बे समय से बीमार चल हैं लेकिन इनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा. मरीजों और उनकेृ परिजनों ने कहा ये सब आसपास 24 घण्टे उड़ती धूल मिट्टी से हो रहा है. यहां तक कि एक 3 साल की मासूम बच्ची को भी पिछले दिनों जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती रखा गया था.

नारेहेड़ा राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में इस तरह के मरीजों की दाताद रोजना बढ़ती जा रही है. जिसको लेकर यहां के चिकित्सक भी चिंतित हैं. चिकित्सको ने साफ तौर से कहा कि धूल मिट्टी की समस्या को समय रहते ठीक नहीं किया गया तो यहां के हालत बहुत ज्यादा खराब हो जाएंगे. पिछले एक साल में दो लोगों की मौत भी हो चुकी है. जिसमे मानव आयोग ने सर्वोच्य न्यायलय में इसकी शिकायत की थी जिसको लेकर सर्वोच्य न्यालय ने एक पत्र जारी कर मामले की जानकारी मांगी है. 

जब इस विषय मे कोटपूतली के जिम्मेदार महकमो से जानकारी चाही तो खनिज विभाग के एएमई संजय शर्मा ने साफ तौर से कहा यह विषय हमारे अधिकारी क्षेत्र में नहीं है. इसके लिए प्रदूषण विभाग करेगा. जो समय समय पर जयपुर से टीम आकर सर्वे करती है फिर भी इसके बारे में प्रदूषण विभाग को सूचना दे दी जाएगी.

वहीं उपखण्ड अधिकारी नानूराम सैनी को मामले की जानकारी नहीं होने की बात बताई और कहा अगर इस तरह से कोई समस्या है तो इस पर कार्रवाई की जाएगी साथ अगर कोई भी विभाग इसके लिए जिम्मेदार है तो उसके खिलाफ भी कारवाई करने के निर्देश जारी किए जाएंगे. कोई भी विभाग अपनी जिम्मेदारी से इस तरह से मुंह नहीं फेर सकता है.