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राजस्थान: ई-मित्र से तिलहन-दलहन के पंजीयन में हुआ फर्जीवाड़ा, दिए गए जांच के आदेश

प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ओ.टी.पी. से हुए पंजीयन में किसान अपने अगूंठे के आधार पर पंजीयन करवाने में सक्षम थे या नहीं. 

राजस्थान: ई-मित्र से तिलहन-दलहन के पंजीयन में हुआ फर्जीवाड़ा, दिए गए जांच के आदेश
फाइल फोटो

जयपुर: तिलहन और दलहन के पंजीयन में प्रदेश के 8 जिलों में बड़ा फर्जीवाडा सामने आया है. ई-मित्र संचालक अपने चहेतों को जमकर रेवडियां बांट रहे हैं. ई मित्र संचालक प्रदेश के 8 जिलों में ओटीपी नंबर से पंजीयन कर रहे हैं, जबकि नियमों के तहत केवल बॉयोमैट्रिक सिस्टम से ही पंजीयन मान्य है. 

ये गडबड़झाला बारां, चूरू, जैसलमेर, नागौर, जोधपुर, उदयपुर, दौसा, श्रीगंगानगर में सामने आया है. सहकारिता प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार ने सभी 8 जिलों के कलेक्टर्स को जांच के आदेश दे दिए हैं. जांच के बाद दोषी ई मित्र संचालकों और किसानों के विरूद्ध कार्रवाई होगी. इन जिलों में 118 ई-मित्र केन्द्रों द्वारा आधार आधारित बायोमैट्रिक सत्यापन की जगह ओ.टी.पी. के आधार पर 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत पंजीयन फर्जी पंजीयन करवा दिए गए है.

प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार ने समर्थन मूल्य पर दलहन और तिलहन की खरीद के लिए किये गये पंजीकरण की समीक्षा की. गंगवार ने तत्काल ही 8 जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर निर्देश दिए कि ओ.टी.पी. के आधार पर हुए पंजीयनों की एस.डी.एम. और तहसीलदार स्तर के अधिकारी से खरीद शुरू होने से पूर्व जांच करवाकर राजफैड मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी जाए. उल्लेखनीय है कि मूंग, उडद, सोयाबीन की 1 नवम्बर तथा मूंगफली की 7 नवम्बर से खरीद प्रस्तावित है.

प्रमुख सचिव नरेशपाल गंगवार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के बाद यह सुनिश्चित हो सकेगा कि ओ.टी.पी. से हुए पंजीयन में किसान अपने अगूंठे के आधार पर पंजीयन करवाने में सक्षम थे या नहीं. जांच में सही पाए गए किसानों को ही तुलाई की दिनांक आवंटित की जाएगी. जो पंजीयन सही नहीं होंगे उन्हें निरस्त किया जाएगा. गंगवार ने संबंधित जिला कलेक्टर को यह भी निर्देश दिये कि जिन ई-मित्रों द्वारा नियम विरूद्व पंजीयन किया गया है उनके खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कठोर कार्रवाई अमल में लायी जाए. साथ ही यदि किसानों की भी इसमें संलिप्ता पायी जाती है तो उनके खिलाफ भी आवश्यक कार्यवाई की जाए. उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि समर्थन मूल्य खरीद में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए तथा वास्तविक किसानों से खरीद हो यह भी सुनिश्चित किया जाए.