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राजस्थान: नवरात्रि में मंदिर पहुंचे दरगाह के गद्दीनशीन, सांप्रदायिक सौहार्द का दिया संदेश

झुंझुनूं का चंचलनाथ टीला एक संत कुटिया है. वहीं कमरूद्दीन शाह दरगाह मुख्यालय की सबसे बड़ी दरगाह है. टीले के महंत ओमनाथ महाराज ने बताया कि यह कोई पहला मौका नहीं है. 

राजस्थान: नवरात्रि में मंदिर पहुंचे दरगाह के गद्दीनशीन, सांप्रदायिक सौहार्द का दिया संदेश

संदीप केडिया, झुंझुनूं: राजस्थान के शेखावाटी में एक दरगाह के गद्दीनशीन और मुस्लिम समाज ने नुसरत जहां का विरोध करने वाले देवबंदी उलेमा को करारा तमाचा मारा है. यहां पर नवरात्र के अंतिम दिन महोत्सव में ना केवल भगवा कपड़ों में गद्दीनशीन पहुंचे, बल्कि उन्होंने खुद ही पूरी आरती की. 

यहां पर समय-समय पर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल दी जाती रही है. एक बार फिर जिला मुख्यालय की सबसे बड़ी कमरूद्दीन शाह दरगाह के गद्दीनशीन एजाज नबी ने नवरात्र महोत्सव में ना केवल भगवा कपड़े धारण किए बल्कि उन्होंने पूर्व सभापति खालिद हुसैन और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ मां दुर्गा की आरती भी की. इस मौके पर जिला कलेक्टर रवि जैन भी मौजूद थे. जिन्होंने भी इस कदम की सराहना की और कहा कि वो कई जगहों पर प्रशासनिक अधिकारी रहे. कई नवरात्र महोत्सव में हिस्सा लिया लेकिन पहली बार देख रहे है कि जब कोई नवरात्र में दरगाह के गद्दीनशीन खुद और अन्य मुस्लिम समाज के लोगों के साथ मां दुर्गा की अराधना करते हो.

पहले भी आते रहे है चंचलनाथ टीले में
झुंझुनूं का चंचलनाथ टीला एक संत कुटिया है. वहीं कमरूद्दीन शाह दरगाह मुख्यालय की सबसे बड़ी दरगाह है. टीले के महंत ओमनाथ महाराज ने बताया कि यह कोई पहला मौका नहीं है. इससे पहले भी दोनों समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्यौहार मिलकर मनाते है. वहीं हर बार नवरात्र महोत्सव में गद्दीनशीन एजाज नबी पहुंचते हैं लेकिन वर्तमान में जिस तरह एक सांसद के महोत्सव पर जाने पर बवाल मचा है. खुद एजाज नबी ने इच्छा जाहिर की थी कि वो खुद मां दुर्गा की आरती करेंगे और पूजा अर्चना करेंगे.

सूफीज्म का संदेश बढ़ाने आया हूं
कमरूद्दीन शाह दरगाह के गद्दीनशीन एजाज नबी ने बताया कि बात चाहे नवरात्र की हो या फिर होली-दिवाली की. हमारे हिंदू भाइयों के त्योहारों में शरीक होकर हमें दिली खुशी होती है. साथ ही सूफीज्म का संदेश भी यही है कि सभी मिलकर और भाईचारे के साथ रहें. उन्होंने बताया कि उन्हें हर साल ऐसा मौका मिलता है कि वो मां दुर्गा के दर्शन पूजन करते हैं इसलिए खुद को खुशनसीब भी मानते है. उन्होंने सभी लोगों से एक-दूसरे के त्योहारों में शरीक होने तथा उनके सुख-दुख में साथ रहने की बात कही. 

दिवाली पर दरगाह में जगमगाते है दीपक, होती है आतिशबाजी
इन दिनों सांसद नुसरत जहां को लेकर देवबंदी उलेमा के आक्रोशित भरे बयान आ रहे हैं. वहीं झुंझुनूं में दरगाह के गद्दीनशीन द्वारा की गई दुर्गा पूजा और पूजा करने के बाद मिली खुशी के बयान के बाद अब थोड़ी बहुत तो फतवा जारी करने वालों के मुंह बंद होंगे. बहरहाल, झुंझुनूं ने हमेशा ऐसे फतवे वाले मुंह बंद किए है. फिर बात चाहे दिवाली के मौके पर दरगाह में आतिशबाजी के साथ-साथ दीप जगमगाने की हो या फिर मंदिर में नमाज अदा करने के बाद रोजे खोलने की हो. इस तरह के आयोजन समाज में सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाने के लिए पूरे देश को संदेश दे रहे हैं.