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राजस्थान ने केंद्र सरकार से मांगा 2000 अतिरिक्त आंगनवाड़ी केंद्र खोलने के लिए फंड

मंत्री ममता भूपेश ने राजस्थान सरकार (Rajatshan Government) की ओर से केंद्र सरकार(Central Govbernment) से 2000 अतिरिक्त आंगनवाड़ी केंद्र खोलने के लिए वित्तीय सहायता की मांग की. 

राजस्थान ने केंद्र सरकार से मांगा 2000 अतिरिक्त आंगनवाड़ी केंद्र खोलने के लिए फंड
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान मंत्री ममता भूपेश.

नई दिल्ली: पोषण अभियान के अंतर्गत भारत की पोषण चुनौतियों पर गुरुवार को राष्ट्रीय परिषद की बैठक में राजस्थान (Rajasthan) की महिला एवं बाल विकास मंत्री ममता भूपेश (Mamta Bhupesh) ने हिस्सा लिया. बैठक में राजस्थान के महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव के.के पाठक भी मौजूद रहे.

बैठक में मंत्री ममता भूपेश ने राजस्थान सरकार (Rajatshan Government) की ओर से केंद्र सरकार(Central Govbernment) से 2000 अतिरिक्त आंगनवाड़ी केंद्र खोलने के लिए वित्तीय सहायता की मांग की. राजस्थान में दूरदराज के इलाकों में बच्चों, माताओं और किशोरियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों का स्थापित किए जाने की मांग की. भूपेश ने बैठक में केंद्र सरकार से मांग की कि किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के नए भवन बनाने के लिए वित्तीय सहायता तथा स्वीकृति प्रदान की जाए ताकि इन आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक तौर-तरीके से अपने भवनों में संचालित किया जा सके.

उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में दिए जाने वाले पोषाहार को और अधिक पोषक और बच्चों और किशोरियों, माताओं की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए. 

उन्होंने यह भी कहा कि इसके लिए इंटर स्टेट ग्रुप्स(Inter State Groups) बनाए जाएं ताकि सभी राज्य एक-दूसरे की पोषाहार प्रक्रिया परिचित हो सकें तथा हर राज्य नवाचारों को अपने राज्य में उपयोग में ला सके. इससे आंगनबाड़ी केंद्रों के पोषाहार को और अधिक उच्च गुणवत्ता युक्त बनाया जा सकेगा.

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मंत्री ममता भूपेश ने कहा कि राजस्थान में आंगनवाड़ी केंद्रों के आधुनिकीकरण किया जा रहा है. राज्य सरकार ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर 21430 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को मोबाइल फोन वितरित किए है. 

उन्होंने कहा कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोस मशीन रखवाई जाएंगी. ताकि पोषाहार वितरण तथा बच्चों की उपस्थिति के संबंध में व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जा सके.