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राजस्थान: बेटियों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में ये बढ़ा कदम उठाने जा रही है सरकार

झुंझुनूं के एक स्कूल में शिक्षक छात्रा के साथ गलत हरकत करता था, लेकिन छात्रा शिकायत नहीं कर पाती थी. स्कूल के एक समारोह में जज साहब मुख्य अतिथि बनकर आए तो छात्रा ने शिक्षक की शिकायत कर दी. 

राजस्थान: बेटियों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में ये बढ़ा कदम उठाने जा रही है सरकार
बेटियों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग का ये कदम अहम बताया जा रहा है- शिक्षा मंत्री

जयपुर: बेटियों की हिफाजत के लिए के लिए राजस्थान शिक्षा विभाग एक बेहतर कदम उठाने जा रहा है. जिससे बच्चियां स्कूल में गुरू जी से महफूज़ रह सकेंगी. सुनने में बड़ा अटपटा सा लग रहा है लेकिन ये सच्चाई है. गुरू जी की ऐसी घिनौनी हरकतों को रोकने के लिए शिक्षा विभाग अब सभी गर्ल्स स्कूलों में तैनात पुरुष शिक्षकों का डाटा तैयार कर रहा है. जिसमें इस बात का खास ख्याल रखा जा रहा है कि अगर किसी शिक्षक की उम्र 50 साल से ऊपर है तो उसको बॉय स्कूल में पोस्टिंग दी जाए. 

साथ ही इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि गर्ल्स स्कूलों में सिर्फ महिला टीचर की ही नियुक्ति हो. जिससे बेटियां स्कूल में हिफाजत के साथ पढ़ सकेंगी. गर्ल्स स्कूलों में करीब 3400 शिक्षक 50 साल की उम्र से नीचे हैं. 50 साल से ऊपर की उम्र के शिक्षक ही गर्ल्स स्कूलों में पढ़ाएंगे. जबकि संयुक्त स्कूलों में संयुक्त रूप से शिक्षकों की नियुक्ति होगी. 

दरअसल, झुंझुनूं के एक स्कूल में शिक्षक छात्रा के साथ गलत हरकत करता था, लेकिन छात्रा शिकायत नहीं कर पाती थी. स्कूल के एक समारोह में जज साहब मुख्य अतिथि बनकर आए तो छात्रा ने शिक्षक की शिकायत कर दी. जिसके बाद शिक्षक को एपीओ कर दिया गया. इसी को मद्देनज़र रखते हुए शिक्षा विभाग ये कदम उठाने जा रहा है. 

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि समाज में विकृत मानसिकता के लोग भी रहते हैं और इन्हीं की मानसिकता की वजह से समाज को शर्मिंदा होना पड़ता है, लेकिन ऐसे शिक्षकों को सबक सिखाना बहुत जरूरी है. शिक्षा विभाग ऐसे मामलों को लेकर काफी गंभीर है और जांच में अगर शिक्षक दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ा है, जो इस बात का गवाह है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार हुआ है लेकिन अगर समाज में कोई एक व्यक्ति गंदा है तो उसकी सजा पूरे समाज को नहीं दी जा सकती. इससे पूरा सिस्टम गड़बड़ा सकता है. बहरहाल, बेटियों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग का ये कदम अहम बताया जा रहा है. अगर ये कदम सफल होता है. तो बेटियां ना ही सिर्फ सुरक्षित पढ़ सकेंगी साथ ही अपने सपनों को पंख भी दे सकेंगी.