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राजस्थान: महापौर और निकाय प्रमुखों के सीधे चुनाव कराने की घोषणा पर मुकर सकती है सरकार, पढ़ें खबर

नेताओं का ये भी तर्क है कि अगर वार्ड में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या कम रहती है तो भी सरकार होने के चलते निर्दलीयों के सहयोग से बोर्ड बनाया जा सकता है.

राजस्थान: महापौर और निकाय प्रमुखों के सीधे चुनाव कराने की घोषणा पर मुकर सकती है सरकार, पढ़ें खबर
फाइल फोटो

जयपुर: राजस्थान में महापौर और निकाय प्रमुखों के सीधे चुनाव करने की घोषणा कर चुकी राजस्थान सरकार अब इस मुद्दे पर यू-टर्न ले सकती है. राजस्थान में 2 दिन पहले प्रदेश कांग्रेस की बैठक में कांग्रेस नेताओं और पीसीसी पदाधिकारियों की तरफ से निकाय के सीधे चुनाव करवाने का विरोध किया गया था. कांग्रेसी नेताओं का तर्क था की धारा 370 का मुद्दा निकाय चुनाव में कांग्रेस पर भारी पड़ सकता है. 

लिहाजा सीधे चुनाव करवाने की बजाय पुरानी पद्धति से इनडायरेक्ट चुनाव करवाने पर ही विचार किया जाए. बैठक में पुरजोर तरीके से उठी इस मांग के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूडीएच मिनिस्टर शांति धारीवाल को मामले में फीडबैक लेकर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं. शांति धारीवाल और प्रदेश कांग्रेस के नेता और चुने हुए जनप्रतिनिधियों से बात कर रिपोर्ट तैयार कर सीएम को सौंपेंगे. उसके बाद ही इस संबंध में निर्णय लिया जाएगा.

दरअसल, राजस्थान कांग्रेस ने अपने मैनिफेस्टों में वादा किया था कि अगर कांग्रेस की सरकार बनी तो प्रदेश में निकाय और निगमों के चुनावों में शैक्षणिक बाध्यता की शर्त हटाई जाएगी ही इसके साथ ही प्रदेश में निगम और निकाय प्रमुखों के चुनाव भी प्रदेश में सीधे करवाये जाएंगे. प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो विधानसभा में शैक्षणित बाध्यता की शर्त हटाते हुए निगम महापौर और निकाय के सभापतियों के चुनाव सीधे करवाने का निर्णय कर दिया था. 

इसे लेकर लोकसभा चुनावों से पहले सब सही भी चल रहा था और कांग्रेस को लग रहा था कि विधानसभा में चुनाव जीतने और सरकार होने का फायदा कांग्रेस को मिलेगा लेकिन लोकसभा चुनावों के बाद प्रदेश के राजनितीक हालात बदल गए हैं और सरकार होने के बाद भी एक भी लोकसभा सीट जीतने में नाकामयाब रही. कांग्रेस के नेताओं में ये डर आ गया है कि कहीं सीधे चुनाव करवाने से ऐसा ना हो कि भाजपा लोकसभा चुनावों की तरह ही निकाय और निगम चुनावों में भी कांग्रेस को बडा नुकसान कर दे. 

नेताओं का ये भी तर्क है कि अगर वार्ड में कांग्रेस के पार्षदों की संख्या कम रहती है तो भी सरकार होने के चलते निर्दलीयों के सहयोग से बोर्ड बनाया जा सकता है. हालांकि, जयपुर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास डर जैसी किसी बात से इनकार किया है. उनका मानना है कि विधान निकाय चुनाव में कांग्रेस को धारा 370 का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा.

कांग्रेस के सामने एक दिक्कत ये भी है कि अपने ही नियम में बदलाव करे तो किरकिरी होने की संभावना है और अगर नियम नहीं बदला तो चुनाव में हार का डर है. ऐसे में अब कांग्रेस इस दिशा में किस तरह से और किस आधार पर निर्णय लेती है इसका जवाब शांति धारीवाल की रिपोर्ट के आधार पर ही मिल पाएगा.