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राजस्थान: सहकारी बैंकों की मनमानी पर रोक के लिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला

सहकारी बैंकों द्वारा इन सभी अनियमितताओं को देखते हुए गाइड लाइन जारी की गई है. गाइड लाइन की अनुपालना नहीं होने पर अनियमितता के लिए संबंधित प्रबंध निदेशक भी जिम्मेदार होंगे. 

राजस्थान: सहकारी बैंकों की मनमानी पर रोक के लिए सरकार ने लिया बड़ा फैसला
एक से अधिक पदों का कार्यभार नहीं दिया जाएगा.

आशीष चौहान/जयपुर: केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा आरटीजीएस और एनईएफटी के माध्यम से होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए सहकारिता विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. 24 बिन्दुओं के निर्देश सभी केन्द्रीय सहकारी बैंकों के लिए जारी किए है. राज्य की कुछ केन्द्रीय सहकारी बैंकों जैसे अलवर, सीकर, चितौड़गढ  (रावतभाटा), हनुमानगढ़, बूंदी में आरटीजीएस, एनईएफटी में अनियमितता किए जाने प्रकरण सामने आए थे. 

सहकारी बैंकों द्वारा इन सभी अनियमितताओं को देखते हुए गाइड लाइन जारी की गई है. गाइड लाइन की अनुपालना नहीं होने पर अनियमितता जैसी घटनाएं होती है तो कार्मिक के वार्षिक कार्य मूल्यांकन प्रतिवेदन में प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ-साथ बैंक के सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही एवं संबंधित प्रबंध निदेशक भी जिम्मेदार होंगे. 

वहीं, एक ही पथ कार्मिक विशेष को अधिकतम तीन वर्ष तक रखा जा सकेगा तथा उसे एक से अधिक पदों का कार्यभार नहीं दिया जाएगा. शीर्ष बैंक खाते का नियमित मिलान करेगा, सीबीएस साफ्टवेयर आईडी के पासवर्ड एक दूसरे से साझा नहीं किए जाएंगे. समय-समय पर परिवर्तन भी किया जाएगा. बैंक या शाखा के अन्य बैंकों में वि़द्यमान खातों का भी नियमित मिलान होगा. शीर्ष सहकारी बैंक अपने सीबीएस साफ्टवेयर को अपडेट कराएगा. इसके अलावा ग्राम सेवा सहकारी समितियों के खाते का नियमित मिलान सुनिश्चित किया जाएगा.

सहाकरी समितियों के रजिस्ट्रार नीरज के पवन ने बताया कि आरटीजीएस और एनईएफटी के लिए खुले गए खातों का दैनिक मिलान सुनिश्चित होगा. सीबीएस साफ्टवेयर द्वारा संतुलन चित्र, लाभ-हानि खाते व रिपोर्टस को ही उपयोग में लिया जाएगा. मैनुअल इंटरवेशन को बंद किया जाएगा. ब्याज दरों में परिवर्तन का विलय केवल प्रधान कार्यालय में ही उपलब्ध होगा. आरटीजीएस और एनईएफटी हेतु मैन्डेट फॉर्म लिया जाएगा.

विभाग की निर्देश जारी करने के पीछे मंशा यह है कि बैंकों में होने वाली इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकें और बैंको की अमानत में वृद्वि हो सकें साथ ही जनमानस में सहकारी बैंकों के प्रति विश्वसनीयता को बनाया रखा जा सकें.