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राजस्थान में कांग्रेस सरकार फिर तैयार करवाएगी पंचायतों के पुर्नगठन प्रस्ताव

राजस्थान में कैबिनेट सब कमेटी ने एक बार फिर से पंचायत पुनर्गठन का फैसला लिया है, यानी जो प्रक्रिया पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर पिछले 2 महीने से चल रही थी, वह फिर से चलेगी. 

राजस्थान में कांग्रेस सरकार फिर तैयार करवाएगी पंचायतों के पुर्नगठन प्रस्ताव
इसके तहत 31 अक्टूबर तक आपत्ति दर्ज करने का काम किया जाएगा.

जयपुर: राजस्थान में मंगलवार से पंचायत पुनर्गठन का काम नए सिरे से शुरू हो गया है. रूठे हुए जनप्रतिनिधियों को मनाने के लिए सरकार फिर से शुरू कर दी है. दरअसल, जिन जनप्रतिनिधियों की आपत्तियों को पंचायत पुनर्गठन के प्रस्ताव में शामिल नहीं किया गया, उनकी शिकायत के बाद आज फिर से पंचायतों के पुनर्गठन का काम शुरू किया जा रहा है. आज से 1 महीने तक आपत्तियां मांगी जाएगी.

सत्ता के सिंहासन पर बैठी कांग्रेस सरकार के पास पंचायतों के पुनर्गठन की चाबी है. हालांकि, ताला जरूर प्रशासनिक अधिकारियों की झोली में है. लेकिन जब तक सियासी चाबी सरकार के पास रहेगी, तब तक पंचायतों के पुर्नगठन का ताला भी नहीं खुल पाएगा. राजस्थान में कैबिनेट सब कमेटी ने एक बार फिर से पंचायत पुनर्गठन का फैसला लिया है, यानी जो प्रक्रिया पंचायतों के पुनर्गठन को लेकर 2 महीने से चल रही थी, वह फिर से चलेगी. ऐसा इसलिए क्योंकि कई जनप्रतिनिधि रूठे हुए हैं. उन्हें मनाने के लिए सरकार फिर से आपत्तियां लेगी.

दरअसल, कई जगह तो केवल प्रस्ताव लेकर ही हूबहू सरकार को सौंप दिए. लेकिन अब कैबिनेट सब कमेटी के फैसले के बाद अब आज से आपत्तियां दर्ज करने का काम फिर से शुरू किया जाएगा. सबसे हैरानी वाली बात तो यह है कि 20 जिलों में कई ग्राम पंचायतों और पंचायत समितियों में आपत्तिया ही दर्ज नहीं की गई, बल्कि सीधे ही प्रस्ताव सरकार को भेज दिए.आज सभी जिलो में पंचायत पुनर्गठन को लेकर ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा.

पहली बार बने पंचायत पुनर्गठन के प्रस्ताव में 450 नई ग्राम पंचायतें और 15 पंचायत समितियों के प्रस्ताव बने थे. लेकिन कई विधायकों और मंत्रियों के विरोध के बाद फिर से आपत्तियां मांगी जा रही है और नए सिरे से प्रस्ताव बनाए जाएंगे. 31 अक्टूबर तक आपत्ति दर्ज करने का काम किया जाएगा. इसके बाद एक से 2 नवंबर तक आपत्तियों की सुनवाई होगी और प्रस्ताव बनाए जाएंगे. 3 नवंबर को सभी जिला कलेक्टर पंचायती राज विभाग को प्रस्ताव के रिपोर्ट सौंपेंगे. उसके बाद फिर से दिए गए प्रस्ताव की चर्चा की जाएगी. 

डिप्टी सीएम सचिन पायटल का कहना है कि सरकार यही प्रयास कर रही है सभी लोगों की आपत्तियां दर्ज हो, ताकि पंचायतों का पुर्नगठन पूरे पारदर्शिता के साथ किया जा सके. सरकार पंचायत पुनर्गठन से न केवल पंचायती राज चुनाव पर निशाना साधने की कोशिश रहेगी बल्कि निकाय चुनाव में भी सरकार पुनर्गठन के जरिए सियासी लाभ लेने की पूरी कोशिश करेगी.