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राजस्थान: महाराष्ट्र के राजनीति पर माथुर का बयान, BJP को आंख दिखाने की हिम्मत अब किसी में नहीं

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का जल्द ही समाधान होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा.

राजस्थान: महाराष्ट्र के राजनीति पर माथुर का बयान, BJP को आंख दिखाने की हिम्मत अब किसी में नहीं
माथुर ने कहा कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियां, अपने मुद्दे और चुनावी व्यूह रचना होती है.

जयपुर: भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के बीच महाराष्ट्र में चल रही खींचतान जल्द खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है. बीजेपी के विधायकों ने विधायक दल का नेता एक बार फिर देवेन्द्र फड़णवीस को चुनाव है और इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम माथुर ने कहा कि इस संकट का जल्द समाधान हो जाएगा. ओम माथुर ने कहा कि बीजेपी को आंख दिखाने की अब न तो किसी में हिम्मत है और न ही किसी में ऐसी क्षमताएं बची हैं. दोनों राज्यों के चुनावी नतीजों पर बोलते हुए माथुर ने कहा कि इसे मोदी के असर से न जोड़कर रणनीति और स्थानीय मुद्दों के प्रभाव के रूप में देखा जाना चाहिए.

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के एक सप्ताह बाद भी सरकार का स्वरूप तय नहीं हो पाया है. फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले पर अड़ी हुई शिवसेना भी इस बार अपने तेवर दिखा रही है. पांच साल पहले हुए विधानसभा चुनाव के दौरान महाराष्ट्र बीजेपी के प्रभारी रहे ओम माथुर कहते हैं कि शिवसेना ने पिछली बार भी ऐसी कोशिश थी और यही कारण रहा कि शिवसेना के रवैये के चलते पिछली बार गठबंधन नहीं हो पाया था.

बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का जल्द ही समाधान होने की उम्मीद जताते हुए कहा कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा. माथुर ने कहा कि पिछली बार भी शिवसेना से गठबंधन नहीं होने के बाद उन्होंने 24 घंटे में ही 80 टिकिट बांटे और उसके नतीजे भी आए. माथुर ने शिवसेना की तरफ से बीजेपी को आंख दिखाए जाने के सवाल पर कहा कि अब बीजेपी को आंख दिखाने की क्षमताएं किसी में बची ही नहीं हैं. 

इसके साथ ही महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों को मोदी मैज़िक से जोड़े जाने के सवाल पर माथुर ने कहा कि सभी नतीजों को मोदी के असर से जोड़ा जाना ठीक नहीं. उन्होंने कहा कि हर राज्य की अपनी परिस्थितियां, अपने मुद्दे और चुनावी व्यूह रचना होती है. ऐसे में सभी जगह मोदी के नाम से नतीजों को जोड़ा जाना सही नहीं कहा जा सकता. 

दोनों राज्यों को विधानसभा चुनाव में बीजेपी की सीटें कम होने के बावजूद भी ओम माथुर काफी आशावादी दिख रहे हैं. वे कहते हैं कि आमतौर पर दोनों ही राज्यों में पांच साल पूरे करने के बाद सीएम रिपीट नहीं होते हैं लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र की जनता ने इस बार ट्रेन्ड बदला है और बीजेपी के मुख्यमन्त्रियों में भरोसा जताया है. माथुर कहते हैं कि यह लोगों के बीच पार्टी की स्वीकार्यता का ही सन्देश है.