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राजस्थान: विकास कार्यों को लेकर पिछड़े अशोक गहलोत के विधायक, जानें पूरा मामला...

विधायक स्थानीय विकास योजना में विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए जिले के छह विधायकों ने तो अभी कलम तक नहीं चलाई है.

राजस्थान: विकास कार्यों को लेकर पिछड़े अशोक गहलोत के विधायक, जानें पूरा मामला...
एमएलए फंड के तहत अभी तक सिर्फ 59 विकास कार्यों की ही अनुशंसा की गई है.

जयपुर: जनता के विकास का पैसा विधायकों की जेब से खिसक ही नहीं रहा है. ये वो पैसा है जो विधायक कोष के नाम पर हर साल सरकार विधायकों को अपने इलाकों में विकास के लिए दिया जाता है. लेकिन अफसोस जनक बात यह है कि विधायक इन पैसों का उपयोग तो दूर की बात अनुशंसा करने के लिए कलम ही नहीं चला रहे हैं. जनता पानी, बिजली, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को तरस रही हैं.

जयपुर जिले में विकास कार्यों की होड़ में सत्तारूढ़ कांग्रेस के मंत्री-विधायक भाजपा विधायकों से पिछड़ गए हैं. विधायक स्थानीय विकास योजना में विकास कार्यों की स्वीकृति के लिए जिले के छह विधायकों ने तो अभी कलम तक नहीं चलाई है. सत्ता में होने के बावजूद जयपुर जिले के 7 कांग्रेसी विधायकों ने एमएलए फंड के तहत अभी तक सिर्फ 59 विकास कार्यों की ही अनुशंसा की है. जबकि भाजपा के 5 विधायकों ने चारगुना से अधिक 211 कार्यों के लिए जिला परिषद को अनुशंसा भेज दी है. निर्दलीय विधायक बाबूलाल नागर ने जिले में सबसे ज्यादा 123 कार्यों की अनुशंसा जारी कर दी है. लेकिन स्वीकृतियां धीमी गति से होने के कारण काम में तेजी नहीं आ पा रही है. 

जयपुर जिले के 19 में से 6 विधायक तो ऐसे है जिन्होंने अभी तक खाता तक नहीं खोला है. इनमें कांग्रेस के आर्दश नगर से रफीक खान, विराटनगर से इंद्राज गुर्जर, जमवारामगढ़ से गोपाल मीणा, बस्सी से लक्ष्मण मीणा, चाकसू से वेद प्रकाश सोलंकी और सांगानेर से भाजपा विधायक अशोक लाहोटी है.

इस मामले में विधानसभा क्षेत्र फुलेरा विधायक निर्मल कुमावत का कहना है की चुनाव बाद जनता अपेक्षा करती है कि छोटे-छोटे कार्य होंगे. वह विधायकों से विकास मांग रही है, लेकिन सरकार की नियति ठीक नहीं है अब पंचायतों और नगर निगमों के चुनाव आने से आचार संहिता लग जाएगी. ऐसे में पहला साल खाली चला जाएगा. सरकार की लापरवाही से जनता का नुकसान हुआ है. 

फुलेरा विधायक निर्मल कुमावत के अनुसार विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए अनुशंसा तो जारी करते हैं लेकिन नौकरशाहों की स्वीकृतियां देने में कंजूसी के कारण विकास कार्यों पर ब्रेक लग रहा है. गौरतलब है की हर विधायक को विधायक स्थानीय विकास योजना के तहत एक वर्ष में 2.25 करोड़ रुपए का फंड मिलता है. यह राशि अगले वर्ष भी इस्तेमाल की जा सकती है, लेकिन जनता की वर्तमान आवश्यकताएं तो अगले साल तक नहीं टाली जा सकती है. जिला परिषद के अधिकारियों की मानें तो कुछ विधायकों ने एक साल में मिलने वाले फंड से भी ज्यादा कामों की अनुशंसा की है. जिनकी आगामी वित्तीय वर्ष में स्वीकृतियां जारी की जाएंगी. विधायक रामलाल शर्मा, बाबूलाल नागर ने अपने विधानसभा क्षेत्र में 3 करोड से ज्यादा के कामों की अनुशंसा की है.

बहरहाल, कोई नेता जब आप से वोट मांगने आता है तो क्या कहता है? वह कहता है कि आप उसे वोट दें ताकि वह आने वाले पांच सालों तक आपकी सेवा करता रहे. मतलब, जनता मालिक और नेता सेवक. लेकिन चुनाव जीतने के बाद क्या होता है? क्या आपको यह पता चलता है कि विधायक जी को स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए जो करोड़ों रुपये सरकार की तऱफ से मिलते हैं, वो कहां जाते हैं? आपके क्षेत्र के विकास में विधायक फंड का कितना इस्तेमाल हुआ? कहीं उस फंड का बंदरबांट विधायक जी के चमचों के बीच तो नहीं हो गया या फिर ठेकेदार और नेताजी मिल कर इस फंड को हजम तो नहीं कर गए?

ऐसे तमाम सवाल आपके मन में ज़रूर आते होंगे, लेकिन आप यही सारे सवाल अपने विधायक से नहीं पूछते. वजह चाहे जो भी हो लेकिन, सवाल नहीं पूछ कर आप एक तरह से भ्रष्टाचार को ही ब़ढावा देते हैं. ऐसे में यह ज़रूरी है कि आप सवाल पूछें, ताकि व्यवस्था और आपके विधायक जी पर भी दबाव बन सके. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिना कोई काम किए या आधा-अधूरा काम कर के अब तक जो पैसा भ्रष्ट लोगों की जेब में चला जाता था, वह पैसा अब आपके क्षेत्र के विकास में काम आएगा.