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राजस्थान: इस महीने 4 दिनों तक बंद रहेगा बैंकों में काम, 2 दिनों की है हड़ताल

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों की चार यूनियनों ने दस सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा के विरोध में 26 सितंबर से दो दिन की हड़ताल पर जाने की घोषणा की है.

राजस्थान: इस महीने 4 दिनों तक बंद रहेगा बैंकों में काम, 2 दिनों की है हड़ताल
केंद्र सरकार के निर्णय के खिलाफ कर्मचारी संगठनों ने हड़ताल की घोषणा की है. (फाइल फोटो)

जयपुर: अगर आपके बैंक से जुड़े कामकाज पेंडिंग हैं, तो शीघ्र निपटा लें. सितंबर महीने में लगातार चार दिन बैंक में कामकाज नहीं होगा. 26 व 27 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल है, जिसमें सभी बैंकों के अधिकारी शामिल होंगे. कर्मचारियों से जुड़े संगठनों ने अभी हड़ताल का समर्थन नहीं किया है.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अधिकारियों की चार यूनियनों ने दस सरकारी बैंकों के विलय की घोषणा के विरोध में 26 सितंबर से दो दिन की हड़ताल पर जाने की घोषणा की है. इसके अलावा, 28 सितंबर को भी बैंक में काम नहीं होंगे, क्योंकि महीने के अंतिम शनिवार को बैंकों में छुट्टी रहती है और 29 सितंबर को बैंक में रविवार की छुट्टी रहेगी.

26 से 29 सितंबर तक नहीं खुलेंगे बैंक
केंद्र सरकार ने दस सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों का विलय कर चार बैंक बनाने की घोषणा की है. इंडियन बैंक्स एसोसिएशन आईबीए को भेजे नोटिस में अधिकारियों की यूनियनों ने कहा कि उनका बैंकिंग क्षेत्र में विलय के खिलाफ हड़ताल पर जाने का प्रस्ताव है. सरकार ने 30 अगस्त को सार्वजनिक क्षेत्र के दस बैंकों का एकीकरण कर चार बैंक बनाने की घोषणा की थी.

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बैंक कर्मचारी नेता सूरजभान सिंह आमेरा का कहना हैं कि 26 और 27 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय हड़ताल है, जिसमें सभी बैंकों के अधिकारी शामिल होंगे. उन्होंने कहा कि बैंकों के विलय का विरोध कर्मचारी संगठन करते रहेंगे.

यूनियन के नेताओं ने यह भी कहा कि नवंबर के दूसरे सप्ताह से राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं. आल इंडिया बैंक आफिसर्स कनफेडरेशन, आल इंडिया बैंक आफिसर्स एसोसिएशन, इंडियन नेशनल बैंक आफिसर्स कांग्रेस और नेशनल आर्गेनाइजेशन आफ बैंक आफिसर्स ने संयुक्त रूप से हड़ताल का नोटिस दिया है.

अन्य मांगों पर भी आक्रोश
बैंकिंग विलय के अलावा बैंक यूनियनों की पांच दिन का सप्ताह करने और नकद लेनदेन के घंटों और विनियमित कार्य घंटों को कम करने की भी मांग है. यूनियनों ने सतर्कता से संबंधित मौजूदा प्रक्रियाओं में बाहरी एजेंसियों का हस्तक्षेप रोकने, सेवानिवृत्त

कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों को सुलझाने, पर्याप्त भर्तियां करने, एनपीएस को समाप्त करने, वेतन समझौते को लागु करने और उपभोक्ताओं के लिए सेवा शुल्क कम करने और अच्छा प्रदर्शन नहीं करने के नाम पर अधिकारियों को परेशान नहीं करने की मांग की
है. 

आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने दस राष्ट्रीयकृत बैंकों का विलय कर चार बड़े बैंक बनाने की घोषणा की है.इसके तहत यूनाइटेड बैंक आफ इंडिया और ओरियंटल बैंक आफ कॉमर्स का विलय पंजाब नेशनल बैंक में किया जाएगा.इसके बाद अस्तित्व में आने वाला बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. इसी तरह सिंडिकेट का विलय केनरा बैंक में किया जाएगा. इलाहाबाद बैंक का विलय इंडियन बैंक में होना है जबकि आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक आफ इंडिया में मिलाया जाएगा.

पहले के मर्जर के सुखद नहीं परिणाम
बैंक कर्मचारी नेता महेश मिश्रा का कहना है कि एसबीआई में सहयोगी बैंकों के मर्जर के परिणामों का अध्ययन किए बिना यह निर्णय लिया गया.एसबीआई मर्जर के बाद 2000 करोड़ रुपए के घाटे में आ गया था.बैँकों का कामकाज प्रभािवत हुआ था.मर्जर वर्तमान अर्थव्यवस्था के लिहाज से भी यह ठीक नहीं.चार दिन बैंक बंद रहने का असर अर्थव्यवस्था पर भी दिखेगा.बैँकिंग संगठनों के विलय के विरोध के बावजूद केंद्रीय मंत्रालय अपने निर्णय पर अड़ा हुआ हैं.अगर विलय पर टकराव बढ़ता हैँ तो उपभोक्ताओं को लंबे समय तक परेशानी होना तय हैं.