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राजस्थान के झुंझुनूं में कैंसिल हो गई थी रावण की मौत, लेकिन आखिर में...

लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं में रावण का मरना इस बार कैंसिल हो गया था.

राजस्थान के झुंझुनूं में कैंसिल हो गई थी रावण की मौत, लेकिन आखिर में...
दो दिन की उठापटक के बाद आखिरकार झुंझुनूं में रावण का दहन तो हो गया.

संदीप केडिया, झुंझुनूं: पूरे देश में आर्थिक संकट की चर्चा है. इसमें कितनी सच्चाई है और कितनी राजनीति यह तो हम नहीं बता सकते. लेकिन इस बार झुंझुनूं में रावण दहन जरूर आर्थिक संकट की भेंट चढ़ गया

जी, हां झुंझुनूं में इस बार पहले तय था कि रावण दहन नहीं होगा. क्योंकि रामलीला परिषद के पास बजट नहीं था. इसके बाद जब यह खबर आम हुई तो कई भामाशाह आगे आए और लगातार 63 सालों से आ रही परंपरा को निभाया जा सका. राम के नाम पर देश में क्या क्या नहीं हो गया. 

वहीं मंगलवार को रावण के नाम पर सोशल मीडिया पर खूब मैसेज वायरल हो रहे है. लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं में रावण का मरना एक बार कैंसिल हो गया था. कारण था आर्थिक संकट. 

दरअसल झुंझुनूं की रामलीला परिषद के पास अब इतना फंड इकट्ठा नहीं हुआ कि वे रावण दहन का कार्यक्रम कर सके. इसके लिए उन्हें करीब एक लाख से ज्यादा रुपयों की आवश्यकता होती. लेकिन उनके पास तो रामलीला मंचन का भी पूरा बजट नहीं हुआ. ऐसे में रामलीला परिषद ने तय कर लिया था कि इस बार रावण दहन नहीं किया जाएगा. बाकायदा इसके लिए सोशल मीडिया पर भी मैसेज वायरल किए गए तो वहीं प्रेस रिलिज भी जारी की गई.  

मैसेज वायरल होने के बाद इकट्ठा हुए पैसे
मैसेज वायरल होने के बाद शहर के लोग आगे आए और उन्होंने आपस में एक-दूसरे से बातचीत कर रावण दहन का फंड इकट्ठा कर लिया. साथ ही तय किया कि 63 सालों से चली आ रही यह परंपरा बंद नहीं होनी चाहिए. इसमें सबसे पहले की झुंझुनूं में संचालित पत्रकारों की एसोसिएशन ने. एमजेएफ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. डीएन तुलस्यान ने अपनी तरफ से परिषद को आर्थिक सहयोग देने और अन्य से दिलवाने की पेशकश की. इसके बाद परिषद के अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया भी सक्रिय हुए और आज आखिरकार दो दिन की उठापटक के बाद रावण का दहन हो ही गया.

निकायों को करेंगे पाबंद, कलेक्टर ने कहा
इधर, रावण दहन के मौके पर पहुंचे कलेक्टर रवि जैन और एसपी गौरव यादव ने आर्थिक संकट पर चिंता जाहिर की. कलेक्टर ने कहा कि हर जगह पर स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी होती है. लेकिन यहां पर ऐसा नहीं हुआ तो वह गलत है. भविष्य में इस तरह के आयोजनों में किसी भी प्रकार के आर्थिक संकट को आने नहीं दिया जाएगा. साथ ही इस बार की भव्यता में कमी को भी दूर करने का आश्वासन कलेक्टर की ओर से दिया गया. इससे पहले कलेक्टर रवि जैन और एसपी गौरव यादव ने अग्णि बाण चलाकर रावण के पुतले का दहन किया.

सवाल अभी भी ये, कैसे चल पाएगी ये परंपरा
दो दिन की उठापटक के बाद आखिरकार झुंझुनूं में रावण का दहन तो हो गया. लेकिन रामलीलाओं और धार्मिक आयोजनों से दूर होते युवा और भामाशाह बेहद चिंता की बात है. साथ ही यह भी सवाल है कि ऐसे हालातों में ये रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आखिर कब तक चल पाएंगे. साथ ही उन परिस्थितियों में जब राम के नाम पर पूरे देश में कभी भी कहीं भी कुछ भी हो सकता है. वहीं राम की रावण की जीत पर पैसों का संकट छा रहा है. 

एमजेएफ ने फिर निभाया सामाजिक सरोकार
सामाजिक सरोकार निभाने में पत्रकारों के अग्रिम संगठन एमजेएफ ने पहल कर शहर की 63 साल पुरानी परंपरा को बचाने का काम किया है. 

दरअसल पत्रकार संजय सैनी की ओर से एक मैसेज सोशल मीडिया पर चला कि इस बार रावण दहन आर्थिक संकट के चलते नहीं होगा. जिसे एमजेएफ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. डीएन तुलस्यान ने पढ़ा तो उन्होंने तुरंत परिषद के अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया को 10 हजार रुपए की सहायता देने और अन्य लोगों से सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया. इसके बाद कड़ी से कड़ी मिलती रही और आखिरकार रावण दहन का कार्यक्रम हो गया. 

डॉ. तुलस्यान ने बताया कि उन्होंने श्री राणी सतीजी मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन देवेंद्र झुंझुनूंवाला से फोन पर बात करके उनसे संपर्क कर 21-21 हजार रुपए दोनों रामलीला आयोजकों को दिलवाए. जो कि इस बार तीसरी बार दोनों को प्राप्त हुए है.