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लड़कियों को जयपुर जिले की 1 दिन के लिए मिली कमान, सरकारी स्कूल को लेकर जारी किए आदेश

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girls Child Day) पर जयपुर(Jaipur) कलेक्ट्रेट में बालिकाओं को कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर की जिम्मेदारी सांकेतिक रूप से सौंपी गई. 

लड़कियों को जयपुर जिले की 1 दिन के लिए मिली कमान, सरकारी स्कूल को लेकर जारी किए आदेश
यह जिम्मेदारी सांकेतिक रूप से सौंपी गई थी.

जयपुर: अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस (International Girls Child Day) पर जयपुर(Jaipur) कलेक्ट्रेट में बालिकाओं को कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर की जिम्मेदारी सांकेतिक रूप से सौंपी गई. जिसके बाद एक दिन के लिए कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर बदल गए. दोनों ही पदों पर लड़कियों ने जिम्मेदारी संभाली.

दरअसल अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जयपुर कलेक्ट्रेट में बालिकाओं को कलेक्टर और अतिरिक्त कलेक्टर की जिम्मेदारी सांकेतिक रूप से सौंपी गई थी. 

कलेक्टर जगरूप सिंह ने बताया कि इंटरनेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे पर लड़कियों को कलेक्टर और सभी अतिरिक्त जिला कलेक्टर का चार्ज दिया गया. हालांकि यह चार्ज सांकेतिक था, लेकिन इस दौरान लड़कियों ने कार्य संपादन किया.

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए अवसर है. लड़कियां आफिस को हर तरीके से चला सकती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह अवसर उनकी क्षमता और आत्मविश्वास दोनों को बताने का था. इसका मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण(Women Empowerment) और उन्हें उनके अधिकार प्रदान करने में मदद करना है. ताकि दुनियाभर में उनके सामने आने वाली चुनौतियों का वे सामना कर सकें और अपनी जरूरतों को पूरा कर सकें.

दिलचस्प था नजारा
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस पर जयपुर को एक दिन की जिला कलेक्टर और 4 नए एडीएम मिल गए. भले ही 5 लड़कियों को सांकेतिक रूप से एक दिन के लिए इस अहम पद पर बैठाया गया. लेकिन इसके जरिए बालिकाओं की सुरक्षा और उन्हें आगे बढ़ने के संदेश देने की कोशिश की गई.

भारती मानवर बनीं एक दिन की कलेक्टर
जयपुर के हसनपुरा इलाके की रहने वाली 12वीं क्लास की स्टूडेंट भारती मावर जब जयपुर के कलेक्टर की कुर्सी पर यह बैठी तो मानों चेहरे पर अजीब सी ख़ुशी के साथ अपने शहर और जिले के विकास के लिए काम करने का जज्बा नज़र आया. कुर्सी पर बैठते ही सबसे पहले सरकारी स्कूलों(Government Schools) की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए एक आदेश जारी किया. जिसमें हर स्कुल में शिकायत बॉक्स लगाने और हर 15 दिन में उसे खोलकर समस्याओं के समाधान का निर्देश दिए. प्रशासन किस तरह से काम करता है इसकी जानकारी भी उन्हें मिली.

भारती मावर को कलेक्टर बनाने के अलावा उनकी सहायता के लिए चार एडीएम को चुनकर बनाया गया. इस दौरान उनके पद्भार से लेकर जनता दरबार तक का कार्यक्रम सब कुछ वैसे ही हुआ जैसा की आम दिनों में खुद असली कलेक्टर करते हैं.

इस दौरान एक दिन की कलक्टर और एडीएम ने कलेक्टर ऑफिस में कामकाज के नेटवर्क को समझने, मीटिंग्स में हिस्सा लेने के अलावा ब्रीफिंग सेशंन्स की अध्यक्षता भी की. इसके अलावा वहां पदस्थापित वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की.