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जैसलमेर: प्रवासी पक्षी 'कुरजां' के कलरव से गुंज रहा है खींचन, देखने के लिए उमड़ी भीड़

मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर लाठी क्षेत्र में आने वाले मेहमान पक्षी (Migratory Bird) कुरजां (Demoiselle Cranes) ने जैसलमेर जिले के खींचन में दस्तक दे दी है.

जैसलमेर: प्रवासी पक्षी 'कुरजां' के कलरव से गुंज रहा है खींचन, देखने के लिए उमड़ी भीड़
बुधवार सुबह प्रवासी पक्षी कुरजां की आवाज गूंजी है. (फाइल फोटो साभार: DNA)

मनीष रामदेव, जैसलमेर: मंगोलिया, चीन, कजाकिस्तान से प्रतिवर्ष शीतकालीन प्रवास पर लाठी क्षेत्र में आने वाले मेहमान पक्षी (Migratory Bird) कुरजां (Demoiselle Cranes) ने जैसलमेर जिले के खींचन में दस्तक दे दी है. 

दरअसल, कुरजां को खीचन में आकाश में सुबह स्वच्छंद विचरण करते हुए देखा गया था. पहले जत्थे ने खीचन पंहुचकर अपने प्रवास स्थलों की पहचान की. लाठी क्षेत्र में कुरजां की दस्तक के साथ ही गांव के पक्षी प्रेमियों के चेहरों पर खुशी नजर आई. 

पक्षी प्रेमी राधेश्याम पेमाणी ने बताया कि बुधवार सुबह 8 बजे कुरजां की आवाज गूंजी, तो छत पर जाकर देखा. इस दौरान आकाश में अत्यधिक ऊंचाई पर करीब 60-70 पक्षियों का एक समूह दिखाई दिया. कुरजां का ये समूह दिनभर गांव पर मंडराता रहा था. इस दौरान स्थानीय लोग कुरजां की एक झलक पाने का काफी उत्सुक नजर आए. इससे पूर्व कमलेश कुमार वन रक्षक वन्यजीव ने भी कुरजां को खेतोलाई गांव के पास विचरण करते हुए देखा था.

प्रवास से पहले करेंगे जांच-पड़ताल
कुरजां के लाठी क्षेत्र में पंहुचने के बावजूद पक्षी कुछ दिन तक नीचे नहीं उतरेंगे तथा दिन व रात में आकाश में उड़ते हुए ही सुरक्षा के लिहाज से पूरी जांच पड़ताल करेंगे. उसके बाद ही पक्षी नीचे उतरेंगे तथा पक्षियों की दिनचर्या शुरू होगी. तापमान में गिरावट के साथ ही खीचन में पक्षियों की संख्या में वृद्धि होगी, फिर क्षेत्र में रात्रि विश्राम के बाद पक्षी प्रतिदिन क्षेत्र के पास स्थित खुले मैदान में पंहुचकर चुग्गा लेना शुरू करेंगे. 

सितंबर के पहले सप्ताह में शुरू होता है प्रवास
गत शीतकालीन प्रवास में कुरजां की वतन वापसी के बाद 3 कुरजां अस्वस्थ होने के कारण उड़ान नहीं भर पाई थी तथा यहीं रह गई थी. यहां भीषण गर्मी झेलने के बाद अब पिछले कई दिनों से सिर्फ 1 पक्षी ही नजर आ रहा है. अन्य 2 पक्षियों के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

इस अकेली कुरजां का इंतजार अब खत्म हो गया है और ये कुरजां अपने साथियों के साथ इस बार वतन वापसी करेगी. कुरजां प्रतिवर्ष सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में यहां पहुंच जाती है तथा मार्च में वतन वापसी की उड़ान भरती है. इस दौरान छ माह के शीतकालीन प्रवास में ये पक्षी यहां हजारों की तादाद में एकत्रित होकर क्षेत्र का माहौल खुशनुमा कर देती हैं.