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राजस्थान में मानसून ने 82 दिनों तक बरपाया जमकर कहर, अब जाकर हुई विदाई

राजस्थान में 82 दिनों की मेहरबानी के बाद आखिरकार मानसून प्रदेश से विदा हो गया. 

राजस्थान में मानसून ने 82 दिनों तक बरपाया जमकर कहर, अब जाकर हुई विदाई
बाढ़ के दौरान राहत अभियान चलाती भारतीय सेना. (फाइल फोटो साभार: ANI)

जयपुर: राजस्थान में 82 दिनों की मेहरबानी के बाद आखिरकार मानसून प्रदेश से विदा हो गया. 26 जून को मानसून ने प्रदेश (Monsoon in Rajasthan) की टर्फ लाइन को छूआ और उसके 6 दिन बाद प्रदेश में मानसून ने दस्तक दी. 

इस साल मानसून प्रदेश में करीब 5 दिन की देरी से पहुंचा. लेकिन जब पहुंचा तो इस साल मानसून पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ने के मूड में नजर आया. 

इस साल प्रदेश के इतिहास की छठी सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई. वहीं, इतिहास में पहली बार राजस्थान(Rajasthan) में मानसून 82 दिनों तक सक्रिय रहा. जिसकी मुख्य वजह ग्लोबल वार्मिंग(Global Warming) माना जा रहा है.

ग्लोबल वार्मिंग का असर अब सिर्फ समुद्री जल स्तर के बढ़ने तक ही सीमित नहीं रहा है. अब इसका असर ऋतुओं पर भी नजर आने लगा है. पिछले 50 सालों की बात की जाए तो मानसून तंत्र में करीब 15 से 17 दिनों का अंतर देखने को मिल रहा है. सर्दी,गर्मी और मानसून के प्रवेश से लेकर विदाई तक ये अंतर अब बढ़ता ही जा रहा है.

राजस्थान में मानसून अमूमन 25 से 26 जून तक दस्तक दे जाता है. लेकिन इस साल 2 जुलाई को प्रदेश में मानसून ने दस्तक दी. लेकिन विदाई तो 21 दिनों की देरी से हुई और इस दौरान राजस्थान में इतिहास की छठी सबसे ज्यादा बारिश दर्ज की गई

मौसम विभाग के अनुसार, औसत बारिश का आंकड़ा 419 एमएम रहा है. लेकिन पिछले 8 सालों में औसत बारिश 4 एमएम कम दर्ज की गई है. वर्ष 2012 से वर्ष 2019 तक प्रदेश में औसत बारिश का आंकड़ा 415 एमएम पर पहुंच गया है. वहीं जल संसाधन विभाग की ओर से प्रदेश में बारिश का औसत आंकड़ा 530 एमएम माना गया है. 

मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में 583.6 एमएम बारिश दर्ज की गई है. वहीं जल संसाधान विभाग राज्य की ओर से पूरे 1 जून से 30 सितंबर तक प्रदेश में 776.4 एमएम बारिश का आंकड़ा रहा है.

मौसम विशेषज्ञ एचएस शर्मा का कहना है कि ऋतुओं में अब करीब 15 से 17 दिनों का अंतर देखने को मिल रहा है. साथ ही प्रदेश में अब कई जिले ऐसे हैं जहां कभी बारिश नहीं होती थी. वहां आज बाढ़ के हालात बन रहे हैं. इसके साथ ही ज्यादा बारिश होने के बाद भी लोगों ने जल संरक्षण की ओर कोई ध्यान नहीं दिया.

बहरहाल, इस साल मानसून ने जमकर मेहरबानी की. लेकिन बुरी खबर यह भी है कि पिछले एक दशक से बारिश का औसत आंकड़ा भी गिरता जा रहा है. जो चिंता का विषय है.